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टीटीई को मिल सकता है ‘रनिंग स्टाफ ’ का लाभ, सरकार ने गठित की समिति

Tue, 25 Dec 2018 03:28 AM IST
Gaurav Pandey न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Gaurav Pandey Updated Tue, 25 Dec 2018 03:28 AM IST
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TTE can get benefits of running staff, government made a committee
सांकेतिक तस्वीर

रेलवे जल्द ही टिकट चेकर (टीटीई) को ‘रनिंग स्टाफ’ की सुविधाएं दे सकता है। दरअसल 87 साल पहले 1931 में आजादी के आंदोलन के दौरान क्रांतिकारियों की मदद करने के आरोप में ब्रिटिश सरकार ने टीटीई से यह सुविधा छीन ली थी। अब सरकार ने दोबारा से इन्हें यह सुविधा देने के लिए एक तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है। समिति को तीन महीने के भीतर इस मामले में अपना निर्णय देना है। समिति से मंजूरी मिलते ही साथ सरकार इसे हरी झंडी दे सकती है। बता दें कि पाकिस्तान ने साल 1962 में और बांग्लादेश ने टीटीई को रनिंग स्टाफ का पद देने और सुविधाएं दे दी थी ।  

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दरअसल ट्रेनों के परिचालन में सहयोग करने वाले लोको ड्राइवर, सहायक लोको ड्राइवर, गार्ड, ब्रेक्समैन और अन्य कर्मचारियों को ‘रनिंग स्टाफ’ कहा जाता है। इस के तहत आने वाले कर्मचारियों को अधिक भत्ते और एयर कंडिशन रेस्ट रूम समेत कई अन्य सुविधा मिलती है। टीटीई स्टाफ के मुकाबले रनिंग स्टाफ के ड्राइवर और गार्ड की सैलरी 30 फीसदी ज्यादा होती है। उन्हें महज 10 घंटे ही काम करना होता है और ट्रेन के लेट होने पर उन्हें रिलीवर भी मिलता है। 

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टीटीई का दैनिक भत्ता भी काफी कम

इसके अलावा रनिंग स्टाफ के मुकाबले टीटीई का दैनिक भत्ता भी काफी कम होता है जबकि  पेंशन के मामले मे भी टीटीई की पेंशन रनिंग स्टाफ के मुकाबले पांच से छह हजार रुपये कम होती है। इस संबंध में इसी सितंबर में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी समेत करीब 100 सांसदों ने रेल मंत्री से टीटीई को दोबारा से रनिंग स्टाफ देने के लिए पत्र लिखा था। 

यह था मामला

साल 1931 तक टीटीई भी रनिंग स्टाफ के तहत आते थे। लेकिन स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान इन पर आरोप लगा कि यह क्रांतिकारियों की मदद कर रहे हैं। क्रांतिकारियों को सीट देने, उनके सामान को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के आरोप में 1931 में टीटीई से यह सुविधा छीन ली गई थी।

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