विकास और विश्वास से होगा कश्मीर समस्या का समाधान: मोदी
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि विकास और विश्वास बहाली करके ही कश्मीर समस्या का समाधान किया जा सकता है। प्रधानमंत्री ने भरोसा जताया कि कश्मीर के युवा गुमराह नहीं होंगे। कश्मीर सबके लिए सच्चे अर्थों में जन्नत बना रहेगा। उन्होंने कहा कि समस्याओं के समाधान भी होगा।
एक चैनल से साक्षात्कार में पीएम ने यह बात कही। उनसे पूछा गया था कि कश्मीर की समस्या के समाधान पर वह क्या सोचते हैं। उन्होंने कहा कि कश्मीर की समस्या का समाधान होगा। कश्मीर की समस्या नई नहीं है। जब देश का बंटवारा हुआ, तभी इस समस्या का बीज बोया गया था और तब से अब तक हर सरकार को इस समस्या जूझना पड़ा है।
उन्होंने कहा कि कश्मीर को विकास भी चाहिए और कश्मीर की जनता को विश्वास भी चाहिए। पूरा देश कश्मीर के विकास और उसे विश्वास देने के लिए प्रतिबद्ध है। देश के 125 करोड़ लोग कश्मीर को विश्वास देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि कश्मीर के युवा शांति और सौहार्द बनाएंगे।
श्वेत पत्र लाकर आर्थिक बदहाली का कच्चा चिट्ठा नहीं खोला
अर्थतंत्र को दी तेज रफ्तार
मोदी बोले, जब हम सत्ता में आए तब अर्थव्यवस्था में हर तरफ नकारात्मक माहौल था। दुनिया में मंदी का दौर और अकाल जैसी चुनौतियां भी हमारे सामने आईं। लेकिन हमारा इरादा नेक था, नीयत साफ थी। हमने बीमार अर्थतंत्र को तेज रफ्तार दी। हमने जीएसटी जैसे सबसे बड़े आर्थिक सुधार का कदम उठाया। अब सारी दुनिया की कहती है कि भारत सबसे तेजी से आगे बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था है। आम आदमी की जिंदगी आसान हुई है। इस बार अच्छी बारिश हुई, है इससे अर्थव्यवस्था और सुधरेगी।
सरकार ने किए कई सुधार
प्रधानमंत्री ने कहा कि लोग चर्चा में आए सुधारों को ही सुधार मानते हैं, जबकि सरकार ने सुधार के तमाम कदम उठाए हैं, जिनकी चर्चा ही नहीं हुई। हमने करीब एक हजार पुराने कानून खत्म किए। इनमें कई 15वीं, 20वीं शताब्दी के कानून थे। सरकार ने गवर्नेंस के क्षेत्र में सुधार किए। मनरेगा, गैस सब्सिडी समेत कई योजनाओं का पैसा डीबीटी से पहुंच रहा है। शिक्षा के क्षेत्र में हाल में बड़ा कदम उठाया गया है, जिसके तहत 20 यूनिवर्सिटी को यूजीसी से हटाने की बात है। अब इन यूनिवर्सिटी को वर्ल्ड क्लास यूनिवर्सिटी बनाया जाएगा। मोदी ने नया मंत्र भी दिया रिफार्म परफॉर्म, ट्रांसफार्म और इनफार्म। उन्होंने कहा कि हमारे सुधारों के केंद्र में आम आदमी है। उसे हक कैसे मिले। हमारा जोर इस पर है।
श्वेत पत्र लाकर आर्थिक बदहाली का कच्चा चिट्ठा नहीं खोला
पीएम ने कहा कि जब हमारी सरकार बनी तो देश में आर्थिक बदहाली थी। तो कुछ लोगों ने कहा कि हमें इस पर श्वेत पत्र पेश करना चाहिए और अर्थव्यवस्था के हालात का कच्चा चिट्ठा खोलना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनीति कहती है कि हमें कच्चा चिट्ठा खोलना चाहिए था। लेकिन राष्ट्रनीति कहती है कि देश में लोग अगर इस हालात के बारे में जानते तो निराशा आती, लोगों को धक्का लगता। ऐसे में मैंने राजनीतिक नुकसान झेलकर भी राष्ट्रहित में चुप रहने का फैसला किया। देश के सामने हमने हकीकत नहीं रखी। हमारी आलोचना भी हुई। इसका नतीजा यह हुआ कि अब मैं चीजें ठीक कर पा रहा हूं। मैं बैंकों की व्यवस्था ठीक करने पर लगा हुआ हूं। तेजी से सड़कें बनना, रेलवे का आगे बढ़ना इसी का नतीजा है। इलेक्ट्रानिक मैन्यूफैक्चरिंग में छह गुना बढ़ोतरी हुई है। मैंने शॉर्टकट रास्ते पर जाने के बजाय कठिन रास्ता चुना। विश्लेषक भी बदलाव का आकलन करेंगे तो उन्हें हैरानी होगी।
प्रवासी भारतीय भारत के सच्चे एंबेसडर बनें
प्रवासी भारतीय भारत के सच्चे एंबेसडर बनें
प्रधानमंत्री ने कहा कि हिंदुस्तानी कहीं भी रह रहे हों उनके मन में हिंदुस्तान जरूर रहता है। वे भारत से जुड़ना चाहते हैं। वे देश के लिए कुछ करना चाहते हैं। लेकिन उनका इसका मौका नहीं मिल पाता। इसका जरिया नहीं मिल पाता। हम उनको यह जरिया देना चाहते हैं। हम चाहते हैं कि प्रवासी भारतीय भारत के सच्चे एंबेसडर बनें।
लोकसभा और विधानसभा चुनाव साथ हों
प्रधानमंत्री कहा कि देश में हर समय कहीं न कहीं चुनाव ही चल रहे होते हैं। चुनाव के चक्कर में देश का बहुत नुकसान हो रहा है। मेरा सुझाव है कि लोकसभा और विधानसभा के चुनाव साथ-साथ हों। उसी समय स्थानीय चुनाव भी हों। हर तरफ से ऐसा सुझाव आ रहा है। लेकिन यह काम अकेले सरकार नहीं कर सकती है। चुनाव आयोग के नेतृत्व में सभी दलों को मिलकर यह काम करना होगा। इस पर व्यापक चर्चा और बहस जरूरी है।
काला धन : 30 सितंबर के बाद ठोस कदम उठाएं तो दोष न देना
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार बनने के बाद उनकी कैबिनेट ने पहला फैसला काले धन पर एसआईटी बनाने का किया। दूसरा काम काले धन पर ऐसा सख्त कानून बनाने का कदम उठाकर किया गया कि कोई काला धन विदेश नहीं भेज पाए। सरकार ने देश में भी काले धन पर लगाम लगाने के लिए तमाम योजनाएं शुरू कीं। अब लोगों को अपने काले धन का खुलासा करने के लिए 30 सितंबर तक का मौका दिया है कि लोग खुद मुख्य धारा में आ सकें। लेकिन 30 सितंबर के बाद अगर सरकार खुलासा न करने वाले लोगों के खिलाफ कठोर कदम उठाए तो वे फिर उसे दोष नहीं दें।
गोमुख पर गंगा साफ तो नीचे भी होगी
मोदी ने कहा कि अब उच्च स्तर पर भ्रष्टाचार कम है। उन्होंने कहा कि गोमुख पर गंगा साफ है तो धीरे धीरे नीचे भी साफ होती जाएगी। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने बहुत से ऐसे फैसले किए जिन्होंने भ्रष्टाचार की संभावना को कम किया है। जैसे गैस सब्सिडी को डीबीटी से जोड़ा। चंडीगढ़ को केरोसिन फ्री किया गया। तीस लाख लीटर केरोसिन जो कालाबाजारी में बिकता था अब खत्म हो गया। पहले यूरिया की कालाबाजारी होती थी। किसानों पर लाठीचार्ज होता था। लेकिन अब हालात अलग हैं। यूरिया की इन दिनों कोई कमी नहीं है। पहले यूरिया किसानों के नाम पर निकलता था और फैक्ट्रियों में पहुंच जाता था। हमने यूरिया की नीम कोटिंग की, यह कैमिकल फैक्ट्री के काम का नहीं रहा। विदेश से आने वाले यूरिया को भी नीम कोट किया। नीम की फली को जमा करने से लोेगों को रोजगार भी मिला।
लुटियन कल्चर के लिए समय नहीं
जब पीएम से पूछा गया कि लुटियन दिल्ली को आप रास नहीं आए तो उनका जवाब था कि लुटियन कल्चर के लिए उनके पास समय नहीं है। यहां ऐसे लोगों का जमावड़ा है, जो सिर्फ कुछ लोगों के प्रति समर्पित हैं। इतिहास देखिए, सरदार बल्लभ भाई पटेल के साथ क्या हुआ। सरदार को गांव के एक सामान्य बुधि क्षमता वाले व्यक्ति के तौर पर पेश किया गया। मोरारजी देसाई के साथ भी यही हुआ। उनके काम की चर्चा कभी नहीं हुई। बस यही चर्चा रही कि वह क्या पीते हैं। किसान के बेटे देवगौड़ा पीएम बने। लेकिन उनकी पहचान बनाई गई कि वे सोते रहते हैं। चौधरी चरण सिंह का भी मजाक उड़ाया गया। मेरा भी मजाक उड़ाया जाता है, कुछ ठेकेदार हैं जो ऐसा करते है। मैं भी उनके लिए समय खराब नहीं करता। मैं देश के सवा सौ करोड़ लोेगों के बीच जीता रहूं। यह मेरे लिए ज्यादा जरूरी।
सरकार में मीडिया का डर जरूरी
प्रधानमंत्री ने कहा कि मैं आज जो भी हूं उसमें मीडिया की बड़ी भूमिका है। लेकिन मीडिया को शिकायत रहती है कि मोदी मसाला नहीं देते। मैं काम में लगा रहता हूं। यह शिकायत उनका हक भी है। मेरी आदत है कि काम ही बोलेगा। मीडिया जगत में मेरी दोस्ती भी रही। पीएम ने कहा कि सरकार में मीडिया का डर जरूरी है। सही आलोचना जरूरी है। मैं इसका पक्षधर हूं। लेकिन आज टीआरपी की मारामारी है। मीडिया भी इस दौड़ में फंसा है। मीडिया ने तथ्यों के आधार पर आलोचना बंद कर दी, जबकि ऐसा होना चाहिए।
मेरा काम ही मेरा आराम है
न्यायपालिका से टकराव की बात गलत
पीएम ने कहा कि सरकार को नियम कानूनों से चलना है। न्यायपालिका के साथ टकराव की धारणा गलत है। सरकार की तरफ से जितनी मर्यादाओं का पालन करना चाहिए कि उनका मेरा पूरा प्रयास रहता है।
मेरा काम ही मेरा आराम है
पीएम ने कहा कि मैं वर्तमान में जीना पसंद करता हूं। वर्तमान में डूब जाता हूं। लक्ष्य पर फोकस रहता हूं। जिस समय जो काम करता हूं। पूरा समय देता हूं। अपनी पुरानी चीजों का बोझ लेकर चलने की मेरी आदत नहीं है। मेरा काम ही आराम है। काम से कभी थकान नहीं होती। उन्होंने कहा कि काम न करने की थकान होती है, जबकि काम करने का संतोष होता है। मैं वर्तमान में जीने का शौकीन, इसलिए अपनी पहचान बनाने की चिंता क्यों करूं। सरकारों, सत्ता में बैठे लोगों ने अपनी छवि बनाने की कोशिश की, अच्छा होता कि वे अपनी छवि बनाने की बजाय देश की छवि बनाते। मैं ऐसा मोदी बनना चाहता हूं जो सवा सौ करोड़ लोगों में खो जाए। इतिहास के किसी पन्ने पर नजर नहीं आए।
गरीबों को करना होगा सशक्त
मोदी ने कहा कि गरीबी से मुक्ति पाने के लिए गरीबों को सशक्त करना होगा। इसमें पहले उन्हें शिक्षा देना और फिर उनका सशक्तीकरण करना है। सरकार ने योजनाएं चलाई हैं। अब तक 3.5 करोड़ लोगों ने मुद्रा योजना का लाभ लिया है। वे कुछ न कुछ करेंगे। स्टैंड अप योजना शुरू की गई है। बैंकों से कहा गया है कि वे एक दलित, एक आदिवासी, एक महिला को सशक्त करें। देश में 1.5 लाख बैंक शाखाएं हैं। हर शाखा तीन लोगों को सशक्त करेगी तो तो देश बदल जाएगा। स्किल डेवेलपमेंट आज के समय की मांग है। इसके लिए अलग मंत्रालय, अलग बजट है। प्रतिभा निखार दी जाए तो 80 करोड़ नौजवान 35 साल के कम उम्र के है और वे देश का भाग्य बदल देंगे।