{"_id":"5bec21b6bdec22696e0e5b44","slug":"trupti-desai-says-will-visit-sabarimala-temple-on-17-november","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"तृप्ति देसाई का एलान, बोलीं- 17 नवंबर को सबरीमाला मंदिर में करूंगी प्रवेश, सीएम से मांगी सुरक्षा ","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
तृप्ति देसाई का एलान, बोलीं- 17 नवंबर को सबरीमाला मंदिर में करूंगी प्रवेश, सीएम से मांगी सुरक्षा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम
Updated Wed, 14 Nov 2018 06:53 PM IST
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तृप्ति देसाई
- फोटो : ANI
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सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर चल रहे विवाद पर महिला कार्यकर्ता तृप्ति देसाई ने एलान किया है कि वह 17 नवंबर को मंदिर में प्रवेश के लिए जाएंगी। इसके लिए उन्होंने केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन को चिट्ठी लिखकर सुरक्षा की मांग भी की है। तृप्ति ने एलान किया है कि वह 17 नवंबर से शुरू हो रहे वार्षिक मंडल मकरविल्लक्कु में मंदिर में प्रवेश करेंगी।
तृप्ति देसाई ने कहा कि उन्हें मंदिर में प्रवेश को लेकर धमकियां मिल रही हैं। इसके चलते उन्होंने सीएम पिनराई विजयन से सुरक्षा की मांग की है। वहीं मुख्यमंत्री विजयन ने गुरुवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई है। बता दें कि तृप्ति देसाई भूमाता ब्रिगेड की संस्थापक भी हैं। इस ब्रिगेड के माध्यम से ही वह महिलाओं के हक की लड़ाई लड़ रही हैं।
बता दें कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने केरल के सबरीमाला मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति देने वाले अपने आदेश पर फिलहाल रोक लगाने से इंकार कर दिया है। हालांकि शीर्ष अदालत अपने 28 सितंबर को दिए आदेश पर पुनर्विचार करने के लिए तैयार हो गई है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने मंगलवार को कहा कि पुनर्विचार के लिए दाखिल 49 याचिकाओं पर 22 जनवरी को खुली अदालत में सुनवाई होगी।
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चीफ जस्टिस के अलावा जस्टिस रोहिंग्टन फली नरीमन, जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस इंदु मल्होत्रा की मौजूदगी वाली पांच सदस्यीय पीठ ने इन याचिकाओं पर चेंबर में सुनवाई की। इसके बाद पीठ ने आदेश दिया कि शीर्ष अदालत की उपयुक्त पीठ इन याचिकाओं और सबरीमाला से जुड़े अन्य लंबित मामलों पर 22 जनवरी को ओपन कोर्ट में सुनवाई करेगी। इससे पहले 9 अक्तूबर को पुनर्विचार याचिका पर तत्काल सुनवाई की मांग को शीर्ष अदालत ने खारिज कर दिया था।
बता दें कि 28 सितंबर को तत्कालीन चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता में सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने भगवान अयप्पा के सबरीमाला मंदिर के कपाट सभी आयु वर्ग की महिलाओं के लिए खोलने का आदेश दिया था। संविधान पीठ ने मंदिर में 10 से 50 साल तक की महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी की सदियों पुरानी प्रथा को असंवैधानिक व भेदभावपूर्ण बताया था। हालांकि इस निर्णय के बावजूद भगवान अयप्पा के भक्तों ने हिंसक आंदोलन चलाकर मंदिर के कपाट खुलने पर भी महिलाओं को प्रवेश नहीं करने दिया था।
ये भी कहा पीठ ने-
- 28 सितंबर को दिए गए आदेश पर फिलहाल किसी भी तरह की रोक नहीं लगेगी
- पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई का मतलब पिछले फैसले को खारिज करना नहीं
- पुरानी याचिकाओं पर ही सुनवाई होगी किसी नई याचिका को अभी प्रक्रिया में जगह नहीं मिलेगी
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तृप्ति देसाई ने कहा कि उन्हें मंदिर में प्रवेश को लेकर धमकियां मिल रही हैं। इसके चलते उन्होंने सीएम पिनराई विजयन से सुरक्षा की मांग की है। वहीं मुख्यमंत्री विजयन ने गुरुवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई है। बता दें कि तृप्ति देसाई भूमाता ब्रिगेड की संस्थापक भी हैं। इस ब्रिगेड के माध्यम से ही वह महिलाओं के हक की लड़ाई लड़ रही हैं।
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बता दें कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने केरल के सबरीमाला मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति देने वाले अपने आदेश पर फिलहाल रोक लगाने से इंकार कर दिया है। हालांकि शीर्ष अदालत अपने 28 सितंबर को दिए आदेश पर पुनर्विचार करने के लिए तैयार हो गई है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने मंगलवार को कहा कि पुनर्विचार के लिए दाखिल 49 याचिकाओं पर 22 जनवरी को खुली अदालत में सुनवाई होगी।
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चीफ जस्टिस के अलावा जस्टिस रोहिंग्टन फली नरीमन, जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस इंदु मल्होत्रा की मौजूदगी वाली पांच सदस्यीय पीठ ने इन याचिकाओं पर चेंबर में सुनवाई की। इसके बाद पीठ ने आदेश दिया कि शीर्ष अदालत की उपयुक्त पीठ इन याचिकाओं और सबरीमाला से जुड़े अन्य लंबित मामलों पर 22 जनवरी को ओपन कोर्ट में सुनवाई करेगी। इससे पहले 9 अक्तूबर को पुनर्विचार याचिका पर तत्काल सुनवाई की मांग को शीर्ष अदालत ने खारिज कर दिया था।
बता दें कि 28 सितंबर को तत्कालीन चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता में सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने भगवान अयप्पा के सबरीमाला मंदिर के कपाट सभी आयु वर्ग की महिलाओं के लिए खोलने का आदेश दिया था। संविधान पीठ ने मंदिर में 10 से 50 साल तक की महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी की सदियों पुरानी प्रथा को असंवैधानिक व भेदभावपूर्ण बताया था। हालांकि इस निर्णय के बावजूद भगवान अयप्पा के भक्तों ने हिंसक आंदोलन चलाकर मंदिर के कपाट खुलने पर भी महिलाओं को प्रवेश नहीं करने दिया था।
ये भी कहा पीठ ने-
- 28 सितंबर को दिए गए आदेश पर फिलहाल किसी भी तरह की रोक नहीं लगेगी
- पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई का मतलब पिछले फैसले को खारिज करना नहीं
- पुरानी याचिकाओं पर ही सुनवाई होगी किसी नई याचिका को अभी प्रक्रिया में जगह नहीं मिलेगी
सबरीमाला मंदिर में हर उम्र की महिलाओं को प्रवेश देने संबंधी फैसले पर रोक से इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने केरल के सबरीमाला मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति देने के अपने फैसले पर बुधवार को रोक लगाने से इनकार कर दिया। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष एक वकील ने कोर्ट के 28 सितंबर के फैसले पर रोक लगाने का अनुरोध किया। इस पर पीठ ने कहा कि 22 जनवरी तक इंतजार करें जब संविधान पीठ पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई करेगी। चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने मंगलवार को ही चैंबर में इन पुनर्विचार याचिकाओं की विवेचना करने के बाद इन पर 22 जनवरी को सुनवाई करने का निर्णय किया था।
पीठ ने इसके साथ ही स्पष्ट किया था कि इस दौरान शीर्ष अदालत के 28 सितंबर के फैसले और आदेश पर कोई रोक नहीं रहेगी। शीर्ष अदालत की चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने 4:1 के बहुमत से सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 साल की आयु की महिलाओं का प्रवेश वर्जित करने को लैंगिक पक्षपात करार देते हुए इसमें सभी आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति प्रदान कर दी थी।
पीठ ने इसके साथ ही स्पष्ट किया था कि इस दौरान शीर्ष अदालत के 28 सितंबर के फैसले और आदेश पर कोई रोक नहीं रहेगी। शीर्ष अदालत की चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने 4:1 के बहुमत से सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 साल की आयु की महिलाओं का प्रवेश वर्जित करने को लैंगिक पक्षपात करार देते हुए इसमें सभी आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति प्रदान कर दी थी।
सबरीमाला मुद्दे पर लोगों की भावनाएं न हों आहत: मंत्री
केंद्रीय संस्कृति मंत्री महेश शर्मा ने बुधवार को सबरीमला मुद्दे पर ‘समग्र रवैया’ अपनाए जाने पर बल दिया ताकि लोगों की भावनाएं आहत नहीं हों। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर केंद्र मामले में ‘सही समय पर’ हस्तक्षेप कर सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने केरल स्थित सबरीमला मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति देने के अपने फैसले की समीक्षा करने पर मंगलवार को सहमति जता दी थी। लेकिन अपने फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। इस फैसले के विरोध में केरल में हिंसक प्रदर्शन देखने को मिला है।
सुप्रीम कोर्ट ने केरल स्थित सबरीमला मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति देने के अपने फैसले की समीक्षा करने पर मंगलवार को सहमति जता दी थी। लेकिन अपने फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। इस फैसले के विरोध में केरल में हिंसक प्रदर्शन देखने को मिला है।