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India-US tariffs: ट्रंप के टैरिफ से सिर्फ 7.38% निर्यात होगा प्रभावित, ICRIER ने दिया बातचीत का सुझाव

Sat, 16 Aug 2025 07:39 PM IST
राहुल कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: राहुल कुमार Updated Sat, 16 Aug 2025 07:39 PM IST
सार

ट्रंप द्वारा भारतीय वस्तुओं के निर्यात पर लगाए गए 50 फीसदी टैरिफ से अमेरिका जाने वाले लगभग 70% भारतीय निर्यात (करीब 60.85 अरब डॉलर) प्रभावित हो रहे हैं। भारतीय अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संबंध अनुसंधान परिषद (आईसीआरआईईआर ) ने अपनी रिपोर्ट में कई अहम आंकड़े साझा किए हैं। 

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Trump's tariff will affect only 7.38 percent of exports, ICRIER suggests negotiation
पीएम मोदी और ट्रंप - फोटो : एएनआई

विस्तार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 50 प्रतिशत आयात शुल्क लगाया है। इसके दायरे में भारत से अमेरिका भेजे जाने वाले 70 फीसदी सामान आते हैं। भारतीय अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक संबंध अनुसंधान परिषद (आईसीआरआईईआर) के विश्लेषण से पता चलता है कि ये आंकड़े भारत के सकल घरेलू उत्पाद का मात्र 1.56 प्रतिशत और उसके कुल निर्यात का 7.38 प्रतिशत हैं तथा 3.9 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लिए कोई संकट नहीं है।

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यह भारतीय अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संबंध अनुसंधान परिषद (आईसीआरआईईआर ) ने अपनी रिपोर्ट में कहा है। इसे अशोक गुलाटी, सुलक्षणा राव और तनय सुंतवाल ने नेविगेटिंग ट्रंप्स टैरिफ ब्लो शीर्षक से तैयार की है। इनके मुताबिक टैरिफ का प्रभाव श्रम प्रधान और उच्च मूल्य वाले क्षेत्रों जैसे-कपड़ा और परिधान, रत्न और आभूषण, ऑटो पार्ट्स और कृषि उत्पादों पर पड़ेगा।
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इन सेक्टर्स में मिल रही चुनौती
रिपोर्ट्स में कहा गया है कि ये क्षेत्र न केवल अमेरिका को व्यापारिक वस्तुओं के निर्यात को बढ़ावा देते हैं, बल्कि रोजगार सृजन और लाखों श्रमिकों एवं किसानों की आजीविका को भी सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं। कपड़ा और परिधान क्षेत्र को बांग्लादेश, पाकिस्तान और वियतनाम जैसे प्रतिस्पर्धियों की तुलना में 30 प्रतिशत से अधिक टैरिफ नुकसान का सामना करना पड़ रहा, जिससे एक प्रमुख निर्यात बाजार में इसकी प्रतिस्पर्धी स्थिति खतरे में पड़ रही है। 
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11.9 अरब अमेरिकी डॉलर के रत्न और आभूषण निर्यात को तुर्की, वियतनाम और थाईलैंड जैसे आपूर्तिकर्ताओं के सामने भी ऐसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। अमेरिका को भारत के निर्यात का 3 प्रतिशत हिस्सा ऑटो पार्ट्स सेक्टर से जाता है। यह सेक्टर भी असुरक्षित है।
 
झींगा निर्यात पर सबसे बुरा असर पड़ेगा
विश्लेषकों ने कहा, कृषि क्षेत्र में झींगा निर्यात पर सबसे बुरा असर पड़ेगा। दरअसल, भारत पर लगने वाला शुल्क इक्वाडोर, इंडोनेशिया और वियतनाम जैसे प्रतिस्पर्धियों पर लगने वाले शुल्क से 50 फीसदी अधिक होगा। भारत पर डंपिंग रोधी और प्रतिपूरक शुल्क भी लागू होंगे। ये ऐसे क्षेत्र हैं, जहां खरीदार अपेक्षाकृत तेजी से स्रोत बदल सकते हैं। 

आईसीआरआईईआर ने बताए उपाय
आईसीआरआईईआर ने त्रि-आयामी रणनीतिक प्रतिक्रिया की सिफारिश की। इसने सिफारिशों के सारांश में बताया कि सबसे पहले तर्क और विवेक के साथ बातचीत करनी होगी। दूसरा बुरी तरह प्रभावित क्षेत्रों के लिए तत्काल और लक्षित राहत सहायता की घोषणा करें। अंत में उच्च प्राथमिकता पर हमारे निर्यात बाजारों में विविधता लाएं। रिपोर्ट में कहा है कि हमारे नेताओं की सफलता यह सुनिश्चित करने में होगी कि अल्पकालिक व्यवधान दीर्घकालिक लाभ में बदल जाएं, ताकि वैश्विक अर्थव्यवस्था में विश्वसनीय और अपरिहार्य खिलाड़ी के रूप में भारत की स्थिति मजबूत हो। 


अमेरिकी राष्ट्रपति ने शुरुआत में भारतीय वस्तुओं पर 25% टैरिफ लगाने की घोषणा की थी। बाद में रूसी तेल खरीद का बहाना देते हुए ट्रंप ने भारत 25 फीसदी अतरिक्त लगाने का एलान कर दिया था। वहीं दूसरी ओर भारत के इतर वियतनाम (20 प्रतिशत), बांग्लादेश (18 प्रतिशत), इंडोनेशिया, मलेशिया और फिलीपींस (19 प्रतिशत), और जापान और दक्षिण कोरिया (15 प्रतिशत) जैसे प्रतिस्पर्धी देशों को कम दरें मिल रही हैं।

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