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Tripura: ‘भाजपा के साथ टिपरा मोथा ने किया गुप्त समझौता’, सीपीएम के आरोपों को नेता प्रतिपक्ष ने किया खारिज

Mon, 09 Oct 2023 12:47 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अगरतला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अगरतला Published by: जलज मिश्रा Updated Mon, 09 Oct 2023 12:47 AM IST
सार

इसी साल फरवरी में हुए विधानसभा चुनावों में राज्य की सभी 60 सीटों पर चुनाव हुए थे। भाजपा ने इनमें से 32 सीटों पर जीत दर्ज की। इसके अलावा, भाजपा के सहयोगी दल आईपीएफटी मात्र एक सीट ही जीत सकी। वहीं, सीपीएम और कांग्रेस ने गठबंधन में चुनाव लड़ा।

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Tripura opposition leader Animesh Debbarma rejected CPM allegations
अनिमेष देबबर्मा - फोटो : Social Media

विस्तार

टिपरा मोथा के वरिष्ठ नेता और त्रिपुरा विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष ने सीपीआई (एम) के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। सीपीआई (एम) के वरिष्ठ नेता मणिक सरकार ने आरोप लगाए थे कि विधानसभा चुनावों में टिपरा मोथा की हार इसलिए हुई क्योंकि उन्होंने भाजपा के साथ गुप्त समझौता किया हुआ था।

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नेता प्रतिपक्ष ने की आलोचना
त्रिपुरा विधानसभा नेता प्रतिपक्ष अनिमेष देबबर्मा ने कहा कि मैं सीपीएम नेता मणिक सरकार का बहुत सम्मान करता हूं। उन्होंने 20 वर्षों तक मुख्यमंत्री के रूप में राज्य की सत्ता संभाली है। लोग कहते हैं कि 70 साल के बाद आदमी का व्यवहार एक बालक की भांति हो जाता है। मैंने अपने माता-पिता को भी देखा है। हम भाजपा के कारण नहीं सीपीएम के कारण सीटें हारे हैं। त्रिकोणीय मुकाबले में भाजपा भी कुछ सीट हारी है। सीपीएम की आलोचना करते हुए देबबर्मा ने कहा कि टिपरा मोथा ने तो बॉक्सनगर और धनपुर विधानसभा उपचुनाव में भी उम्मीदवार नहीं उतारे थे लेकिन बावजूद इसके सीपीएम एक भी सीट नहीं जीत पाई। दोनों ही सीटों पर पार्टी को बुरी तरह मुंह की खानी पड़ी।

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यह है विधानसभा की स्थिति
इसी साल फरवरी में हुए विधानसभा चुनावों में राज्य की सभी 60 सीटों पर चुनाव हुए थे। भाजपा ने इनमें से 32 सीटों पर जीत दर्ज की। इसके अलावा, भाजपा के सहयोगी दल आईपीएफटी मात्र एक सीट ही जीत सकी। वहीं, सीपीएम और कांग्रेस ने गठबंधन में चुनाव लड़ा, जिसमें सीपीएम 11 तो वहीं कांग्रेस मात्र तीन सीट ही अपने झोली में डाल सकी। वहीं, टिपरा मोथा, जिसने मात्र 42 सीटों पर चुनाव लड़ा उसने 13 सीटों पर जीत दर्ज कर राज्य की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई।

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यह है सीपीएम के हार का मुख्य कारण
बता दें, सीपीएम पूर्वी राज्यों में कई वर्षों तक आदिवासी राजनीति के बल पर सरकार बनाती रही है। त्रिपुरा में 20 सीटें एसटी वर्ग के लिए आरक्षित है। लेकिन विधानसभा चुनावों में सीपीएम एक भी आरक्षित सीट नहीं जीत पाई, जिसे करारी हार का मुख्य कारण भी माना जा सकता है। वहीं, टिपरा मोथा ने 13 आरक्षित सीटों पर जीत दर्ज की। भाजपा छह सीटों पर जीती तो आईपीएफटी ने एक सीट अपने नाम किया।

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