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मोबाइल उपभोक्ताओं की सही संख्या पता लगाने में जुटा ट्राई
Mon, 17 Jun 2019 02:21 AM IST
Avdhesh Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Mon, 17 Jun 2019 02:21 AM IST
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भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) देश में व्यक्तिगत मोबाइल उपभोक्ताओं की संख्या का पता लगाने के लिए एक तंत्र विकसित करने पर काम कर रहा है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ट्राई के नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक, 31 मार्च, 2019 तक भारत में मोबाइल उपभोक्ताओं की कुल संख्या 116.18 करोड़ थी, जबकि वायरलेस फोन घनत्व 88.46 फीसदी था।
अधिकारी के मुताबिक, उपभोक्ताओं की संख्या से हालांकि सक्रिय और निष्क्रिय कनेक्शनों की सही तस्वीर का पता नहीं चलता क्योंकि इसमें एक व्यक्ति के एक से ज्यादा सिम और फोन कनेक्शन शामिल कर लिए जाते हैं। इस पूरी कवायद का मकसद ऐसे लोगों की संख्या का पता लगाना है जिनके पास कोई फोन कनेक्शन नहीं है। उसने कहा कि प्रक्रिया में उन अलग अलग उपभोक्ताओं या ऐसे उपभोक्ताओं की संख्या का पता चल सकेगा जो फोन कनेक्शन से जुड़े हैं।
राष्ट्रीय डिजिटल संचार नीति दस्तावेज में भी 2020 तक विशिष्ट मोबाइल उपभोक्ता घनत्व को 55 प्रतिशत और 2022 तक 65 प्रतिशत करने का लक्ष्य है। अधिकारी ने कहा कि फिलहाल उपभोक्ताओं की संख्या का आकलन सिम की संख्या के आधार पर किया जाता है। एक उपभोक्ता के पास कई सिम हो सकते है। हम वास्तविक संख्या का पता लगाने के तरीके पर काम कर रहे हैं। यह एक जटिल मुद्दा है।
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अधिकारी के मुताबिक, उपभोक्ताओं की संख्या से हालांकि सक्रिय और निष्क्रिय कनेक्शनों की सही तस्वीर का पता नहीं चलता क्योंकि इसमें एक व्यक्ति के एक से ज्यादा सिम और फोन कनेक्शन शामिल कर लिए जाते हैं। इस पूरी कवायद का मकसद ऐसे लोगों की संख्या का पता लगाना है जिनके पास कोई फोन कनेक्शन नहीं है। उसने कहा कि प्रक्रिया में उन अलग अलग उपभोक्ताओं या ऐसे उपभोक्ताओं की संख्या का पता चल सकेगा जो फोन कनेक्शन से जुड़े हैं।
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राष्ट्रीय डिजिटल संचार नीति दस्तावेज में भी 2020 तक विशिष्ट मोबाइल उपभोक्ता घनत्व को 55 प्रतिशत और 2022 तक 65 प्रतिशत करने का लक्ष्य है। अधिकारी ने कहा कि फिलहाल उपभोक्ताओं की संख्या का आकलन सिम की संख्या के आधार पर किया जाता है। एक उपभोक्ता के पास कई सिम हो सकते है। हम वास्तविक संख्या का पता लगाने के तरीके पर काम कर रहे हैं। यह एक जटिल मुद्दा है।
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