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व्यापारियों को मंजूर नहीं वालमार्ट-फ्लिपकार्ट डील, कैट का ऐलान, 28 सितंबर को करेंगे भारत बंद 

Fri, 07 Sep 2018 03:53 AM IST
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली Updated Fri, 07 Sep 2018 03:53 AM IST
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Traders bharat bandh against Flipkart Walmart deal 
देश के व्यापारियों को वालमार्ट-फ्लिपकार्ट डील मंजूर नहीं है। कॉन्फेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने साफ तौर पर कह दिया है कि इस डील के मौजूदा प्रावधानों से व्यापारियों का अहित होगा।
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स्थानीय दुकानदारों का धंधा चैपट हो जाएगा। इस डील के विरोध में कैट ने 28 सितंबर को भारत बंद का ऐलान कर दिया है। यह विरोध यहीं तक नहीं थमेगा, इसके आगे भी व्यापारियों ने नियमित तौर पर आंदोलन को आगे बढ़ाने की रूपरेखा तैयार कर ली है। 16 दिसंबर को रामलीला मैदान में व्यापारियों की विशाल रैली होगी। तब तक व्यापारियों के धरने-प्रदर्शन लगातार चलते रहेंगे।
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28 सितंबर को भारत बंद होगा, 1 करोड़ व्यापारी भाग लेंगे

कैट के महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल का कहना है कि व्यापारियों ने हमेशा सरकार का सहयोग किया है, लेकिन वालमार्ट-फ्लिपकार्ट डील के मुद्दे पर सरकार व्यापारियों की नहीं सुन रही है। 28 सितंबर को भारत बंद का ऐलान कर दिया गया है। इसमें एक करोड़ व्यापारी भाग लेंगे। साथ ही व्यापारिक संस्थानों में काम कर रहा स्टाफ भी इस बंद में हिस्सा लेगा।
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15 सितंबर से 15 दिसंबर तक 7 करोड व्यापारी सड़कों पर होंगे, बाजारों में निकलेंगी रथ यात्राएं

केंद्र सरकार अगर अपनी जिद पर अड़ी रहती है तो व्यापारी विरोध प्रदर्शन के दूसरे चरण में 15 दिसंबर तक सड़कों पर उतरेंगे। इसके तहत हर बाजार में रथ यात्रा निकाली जाएगी। इसमें देशभर के सात करोड़ से अधिक व्यापारी हिस्सा लेंगे। रथ यात्रा के लिए हर राज्य में 11-11 व्यापारियों की एक टीम गठित कर दी गई है। इसके बाद भी सरकार ने वालमार्ट-फ्लिपकार्ट डील को नहीं रोका तो 16 दिसंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में महारैली आयोजित होगी।

यह है सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति

देश में सात करोड़ से ज्यादा व्यापारी हैं। इनके साथ ट्रांपोर्टर और हॉकर भी जुड़े हैं। सब मिलाकर व्यापारी जगत में लगे लोगों को संख्या 12 करोड़ से उपर पहुंच जाती है। यह संख्या वह है जो किसी न किसी छोटे बड़े कारोबार में लगी है। इनके परिवार और रिश्तेदारों की औसत संख्या देखें तो वह 20-25 करोड़ से उपर चली जाती है।

आगामी लोकसभा चुनाव में यह आंकड़ा किसी भी दल के लिए बड़ी अहमियत रखता है। मौजूदा स्थिति में कोई भी पार्टी इतने बड़े वोट बैंक को नाराज करने की स्थिति में नहीं है। प्रवीण खंडेलवाल कहते हैं कि हमें पूरी उम्मीद है कि चुनाव से पहले सरकार व्यापारियों के पक्ष में फैसला ले लेगी।

किसी भी कीमत पर वालमार्ट फ्लिपकार्ट डील को देश में नहीं आने देंगे
 
कैट के पदाधिकारियों का कहना है कि इस डील में कानूनी रास्तों को तोड़ा मरोड़ा गया है। डील के अस्तित्व में आते ही एफडीआइ पॉलिसी का उल्लंघन होगा तो वहीं एक असंतुलित प्रतिस्पर्धा का वातावरण भी बन जाएगा। वास्तव में इस डील के माध्यम से वॉल्मार्ट रीटेल ट्रेड पर कब्जा करने के अपने छिपे एजेंडे को पूरा करेगा।

कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया ने बताया कि यह एक सच्चाई है कि वॉल्मार्ट कोई ई-कामर्स कंपनी नहीं है। इस क्षेत्र में उसकी कोई विशेषता भी नहीं है फिर भी वॉल्मार्ट ने अपने असीमित संसाधनों के बल पर फ्लिपकार्ट से यह डील कर ली है। इसके जरिए ये कंपनी भारत के रीटेल बाजार में विदेशी उत्पादों का विशाल जाल बिछाएगी। हमारी मांग है कि सरकार को इस डील के सभी पहलुओं का बारीकी से अध्ययन करना चाहिए। यह कोई दो कंपनियों के बीच डील नहीं है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव भारत के रीटेल बाजार और अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।   

अगर यह एक प्रथा बन गई तो रीटेल बाजार पर विदेशी कम्पनियों का कब्जा होने में देर नहीं लगेगी
     
व्यापारियों का कहना है कि इस प्रकार की डील के लिए एक पॉलिसी बनाना बहुत जरूरी है। अगर ऐसा नहीं हुआ तो पैसों की आड़ में इस तरह की अन्य डील भी होंगी। धीरे धीरे यह एक प्रथा बन जाएगी और रीटेल बाजार पर विदेशी कंपनियों का कब्जा होने में देर नहीं लगेगी। इस डील के साथ अनेक महत्वपूर्ण विषय जुड़े हैं, जिनमें खास तौर पर एफडीआइ पॉलिसी, डाटा सुरक्षा, प्रतिस्पर्धा और अनुचित बिक्री आदि शामिल हैं। 

कैट के मुताबिक, इस डील में  जो पोर्टल का स्वामी होगा, डांटा और डिजिटल दक्षता पर उसका नियंत्रण रहेगा। इस दृष्टि से सारा मार्केट डाटा वॉल्मार्ट के नियंत्रण में  होगा। इस नीति का दुरुपयोग कभी भी हो सकता है। इसके अलावा पोर्टल का स्वामी अपनी शर्तें किसी पर भी थोप सकता है। ऐसे में सरकार के लिए विदेशी कंपनी के स्वामित्व वाली कंपनी पर नजर रखना, खास तौर पर ई कामर्स जिसमें कोई सीमा नहीं है, मुश्किल होगा। इस मामले में खरीद से लेकर बिक्री तक सब फैसले वॉल्मार्ट के नियंत्रण में होंगे। इससे कंपनी को मनमानी करने और कानूनी प्रक्रिया को धता बताने की छूट मिल जाएगी।
 
कैट की हैं ये मांगे.......व्यापारी क्या चाहते हैं

कैट ने सरकार से मांग की है कि ई-कामर्स के लिए तुरंत एक पॉलिसी बनाई जाए। साथ ही एक नियामक आयोग का गठन किया जाए। जब तक ऐसा न हो तब तक इस डील पर रोक लगाई जाए।

ई कॉमर्स पॉलिसी बनाने में व्यापारियों को भी विश्वास में लिया जाए।

ई-कामर्स कम्पनियाँ कर रही हैं नियमों का उल्लंघन

ई कॉमर्स कंपनियां खुले रूप से 29 मार्च 2016 को जारी सरकार के प्रेस नोट न 3 का उल्लंघन कर रही है।उक्त प्रेस नोट में ई कॉमर्स कंपनियों पर यह स्पष्ट पाबंदी है कि वे किसी भी प्रकार से कीमतों को प्रभावित नहीं करेंगी एवं बाजार में प्रतिस्पर्धा बनाये रखेंगी।

खंडेलवाल के मुताबिक, इस बाबत अनेक शिकायतें सामने आने के बावजूद इन कंपनियों के खिलाफ अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। भारत को खुला मैदान मानते हुए ये कम्पनियां अपने खुद के बनाए नियम एवं कायदों से व्यापार कर रही हैं। सरकार मूक दर्शक बनी हुई है।

गत चार वर्षों में वाणिज्य मंत्रालय ने एक बार भी घरेलू व्यापार को मजबूत करने हेतु एक भी मीटिंग नहीं बुलाई है। इससे जाहिर होता है की रिटेल ट्रेड एक अनाथ बच्चे की तरह है जिसका कोई वाली वारिस नहीं है।
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