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अयोध्या की चौरासी कोसी परिक्रमा पर जनजागृति के लिए दिल्ली में बड़ा कार्यक्रम 4 जनवरी से 

Wed, 02 Jan 2019 09:19 PM IST
आसिम खान अमित शर्मा, नई दिल्ली
अमित शर्मा, नई दिल्ली Published by: आसिम खान Updated Wed, 02 Jan 2019 09:19 PM IST
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To give information to people about Ayodhya a program will start in Delhi from January 4

अयोध्या का मुद्दा इस समय पूरे देश की चर्चा के केंद्र में है। लेकिन जब अयोध्या के मुद्दे पर चर्चा होती है तो इसे सिर्फ भगवान राम के जन्म स्थल से ही जोड़कर देखा जाता है। जबकि अयोध्या एक अर्थ में बहुत वृहद मायने रखता है। इसका सिर्फ धार्मिक ही नहीं, ऐतिहासिक महत्त्व भी है। वाल्मीकि रामायण में कहा गया है कि सम्राट दशरथ के राज्य में अयोध्या की सीमा 84 कोस लंबी और 12 कोस चौड़ी थी। इसे प्रचलित रुप में चौरासी कोसी परिक्रमा कहा जाता है जो 84 कोस यानी 275 किलोमीटर तक फैली हुई है। 

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आज भी धर्मपरायण हिंदू इस चौरासी कोसी परिक्रमा की यात्रा करते हैं। यह धार्मिक यात्रा चैत्र मास की पूर्णिमा तिथि को मख भूमि नामक स्थान से शुरू होकर वैशाख के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को पूर्ण होती है। लेकिन इस चौरासी कोसी परिक्रमा के बारे में अभी भी जनता के बीच बहुत कम जानकारी है। लोगों को इसके बारे में जानकारी देने के लिए दिल्ली में एक बड़ा कार्यक्रम हो रहा है जो चार जनवरी से शुरु होकर छ जनवरी तक इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में आयोजित किया जाएगा। लोगों को अवधी गीत, भोजपुरी नृत्य, तुलसी रामायण के पाठ और नाटकों के मंचन जैसे विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिये लोगों को अयोध्या के बारे में जानकारी दी जाएगी। कार्यक्रम में प्रवेश नि:शुल्क रखा गया है। 
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प्रज्ञा संस्थान की अगुवाई में हो रहे इस कार्यक्रम के बारे में बताते हुए अयोध्या के सांसद लल्लू सिंह ने अमर उजाला से कहा कि इस कार्यक्रम के जरिए हम लोगों को अयोध्या की सांस्कृतिक सीमा के बारे में बताना चाहते हैं। इसकी सीमा में श्रृंगी रिषि, आस्तीक, गौतम रिषि, सुमेधा, यमदग्नि, च्यवन रिषि, रमणक, वामदेव, अष्टावक्र और पाराशर जैसे महान रिषि आते हैं। रामचरित मानस के रचयिता तुलसी दास जी का पैतृक निवास भी इसकी सीमा में आता है।
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उन्होंने कहा कि समय के दौरान किन्हीं कारणों से लोगों को इसके बारे में जानकारी नहीं रह गई है। अब उनका उद्देश्य है कि लोग इसके बारे में जानें और इसका दर्शन करें। लल्लूसिंह के मुताबिक भारत को समझने के लिए अयोध्या को समझना बहुत जरुरी है। इस कार्यक्रम में महंत नृत्यगोपाल दास, गोविंदाचार्य और नितिन गडकरी जैसे अनेक गणमान्य लोगों के शामिल होने की संभावना है। 

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