{"_id":"57d92c664f1c1b2d46d48e17","slug":"timeline-how-conflict-arises-between-akhilesh-and-shivpal-yadav","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"समय-दर-समय अखिलेश और शिवपाल में कैसे बढ़ी तकरार","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
समय-दर-समय अखिलेश और शिवपाल में कैसे बढ़ी तकरार
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 14 Sep 2016 04:35 PM IST
विज्ञापन
अखिलेश और शिवपाल
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
साल 2017 विधानसभा की तैयारी में जुटी अखिलेश सरकार इस समय चर्चा में है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और उनके चाचा के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गया है। स्थिति यह है कि अखिलेश यादव से सपा प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी लेकर शिवपाल यादव को दे दी गई है और अखिलेश ने शिवपाल से कई महत्वपूर्ण मंत्रालय वापस ले लिए हैं। हालांकि, मुलायम सिंह यादव एक बार फिर निर्णायक की भूमिका में हैं। अखिलेश और शिवपाल दोनों का कहना है कि पार्टी और संगठन का काम कैसे होगा इस पर अंतिम निर्णय नेताजी (मुलायम सिंह यादव) ही लेंगे।
यहां गौर करने वाली बात यह है कि चाचा-भतीजे के बीच यह लड़ाई कब शुरू हुई। कैसे धीरे-धीरे बात यहां तक पहुंच गई कि सरकार और यादव परिवार का मतभेद खुलकर सामने आ गया।
> जून 2016 की शुरुआत से ही पूर्वांचल के बाहुबली अफजाल अंसारी की पार्टी कौमी एकता दल के सपा में विलय की बात सामने आने लगी थी। 21 जून 2016 को शिवपाल यादव ने अफजाल अंसारी के साथ प्रेस कान्फ्रेंस करके इस विलय की घोषणा कर दी। इसी दिन अखिलेश यादव ने आजमगढ़ में बयान दिया कि कार्यकर्ता मेहनत से काम करेंगे तो किसी पार्टी से गठबंधन या विलय करने की जरूरत नहीं पडे़गी।
विज्ञापन
> इस विलय के एक दिन बाद 22 जून 2016 को अखिलेश यादव ने माध्यमिक शिक्षा मंत्री बलराम यादव को बर्खास्त कर दिया। बताया जा रहा था कि कौमी एकता दल के सपा में विलय के पीछे उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसी दिन सफाई देते हुए शिवपाल यादव ने कहा था कि विलय कौमी एकता दल का हुआ है न कि मुख्तार अंसारी का।
विज्ञापन
यहां गौर करने वाली बात यह है कि चाचा-भतीजे के बीच यह लड़ाई कब शुरू हुई। कैसे धीरे-धीरे बात यहां तक पहुंच गई कि सरकार और यादव परिवार का मतभेद खुलकर सामने आ गया।
विज्ञापन
> जून 2016 की शुरुआत से ही पूर्वांचल के बाहुबली अफजाल अंसारी की पार्टी कौमी एकता दल के सपा में विलय की बात सामने आने लगी थी। 21 जून 2016 को शिवपाल यादव ने अफजाल अंसारी के साथ प्रेस कान्फ्रेंस करके इस विलय की घोषणा कर दी। इसी दिन अखिलेश यादव ने आजमगढ़ में बयान दिया कि कार्यकर्ता मेहनत से काम करेंगे तो किसी पार्टी से गठबंधन या विलय करने की जरूरत नहीं पडे़गी।
विज्ञापन
> इस विलय के एक दिन बाद 22 जून 2016 को अखिलेश यादव ने माध्यमिक शिक्षा मंत्री बलराम यादव को बर्खास्त कर दिया। बताया जा रहा था कि कौमी एकता दल के सपा में विलय के पीछे उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसी दिन सफाई देते हुए शिवपाल यादव ने कहा था कि विलय कौमी एकता दल का हुआ है न कि मुख्तार अंसारी का।
कौमी एकता दल पर अखिलेश ने लिया था अंतिम फैसला
अखिलेश यादव
- फोटो : amar ujala
> 25 जून 2016 को यह फैसला आया कि कौमी एकता दल का सपा में विलय नहीं होगा। उसी दिन अखिलेश का बयान आया कि मुख्यमंत्री और सपा प्रदेश अध्यक्ष की हैसियत से वह मुख्तार को पार्टी में नहीं आने देंगे।
> 28 जून 2016 को अफजाल अंसारी ने अखिलेश को 'घमंडी मुख्यमंत्री', शिवपाल को 'हनुमान' और मुलायम को 'राम' बताया।
> 28 जून 2016 को अफजाल अंसारी ने अखिलेश को 'घमंडी मुख्यमंत्री', शिवपाल को 'हनुमान' और मुलायम को 'राम' बताया।
अफजाल अंसारी ने कहा था घमंडी सीएम
टाउन हाल में आयोजित कौएद के जिला कार्यकर्ता सम्मेलन में मंचासीन अफजाल अंसारी तथा अन्य पार्टी कार्यकर्ता।
> 25 जून 2016 को यह फैसला आया कि कौमी एकता दल का सपा में विलय नहीं होगा। उसी दिन अखिलेश का बयान आया कि मुख्यमंत्री और सपा प्रदेश अध्यक्ष की हैसियत से वह मुख्तार को पार्टी में नहीं आने देंगे।
> 28 जून 2016 को अफजाल अंसारी ने अखिलेश को 'घमंडी मुख्यमंत्री', शिवपाल को 'हनुमान' और मुलायम को 'राम' बताया।
> 28 जून 2016 को अफजाल अंसारी ने अखिलेश को 'घमंडी मुख्यमंत्री', शिवपाल को 'हनुमान' और मुलायम को 'राम' बताया।
मुलायम की भूमिका फिर आई सामने
मुलायम सिंह यादव
- फोटो : amar ujala
> जुलाई महीने में कई बार यह बात सुर्खियों में आई कि कौमी एकता दल का सपा में विलय हो सकता है और इस बार यह विलय मुलायम सिंह यादव की मौजूदगी में होगा।
> 14 अगस्त को मैनपुरी में एक कार्यक्रम के दौरान शिवपाल अपनी सरकार, पार्टी के नेता और प्रदेश के अफसरों पर जमकर बरसे। इस दौरान उन्होंने इस्तीफे की भी धमकी दे दी।
> 14 अगस्त को मैनपुरी में एक कार्यक्रम के दौरान शिवपाल अपनी सरकार, पार्टी के नेता और प्रदेश के अफसरों पर जमकर बरसे। इस दौरान उन्होंने इस्तीफे की भी धमकी दे दी।
मुलायम ने लिया था शिवपाल का पक्ष
मंत्री शिवपाल यादव
- फोटो : amar ujala
> 15 अगस्त को मुलायम सिंह यादव ने शिवपाल का समर्थन करते हुए कहा था कि अगर वह इस्तीफा देंगे तो पार्टी टूट जाएगी।
> 16 अगस्त को शिवपाल यादव ने एक बार फिर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि सभी मंत्री गड़बड़ कर रहे हैं। अच्छे कार्यकर्ताओं की उपेक्षा हो रही है। सपा में खुशामद का दौर है।
> 19 अगस्त को शिवपाल ने अखिलेश यादव से मुलाकात की। इसके बाद उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अच्छा काम कर रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने मनमुटाव की किसी भी बात से साफ इनकार कर दिया।
> 16 अगस्त को शिवपाल यादव ने एक बार फिर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि सभी मंत्री गड़बड़ कर रहे हैं। अच्छे कार्यकर्ताओं की उपेक्षा हो रही है। सपा में खुशामद का दौर है।
> 19 अगस्त को शिवपाल ने अखिलेश यादव से मुलाकात की। इसके बाद उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अच्छा काम कर रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने मनमुटाव की किसी भी बात से साफ इनकार कर दिया।
अखिलेश ने दो मंत्रियों को किया बर्खास्त
सीएम अखिलेश यादव
> 12 सितंबर काफी महत्वपूर्ण दिन रहा। इस दिन अखिलेश यादव ने भ्रष्टाचार के आरोप में पहले मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति को बर्खास्त किया और इसके आधे घंटे बाद मंत्री राजकिशोर के ऊपर भी कार्रवाई की। दोनों मंत्रियों को शिवपाल यादव का करीबी बताया जाता है।
महत्वपूर्ण रहा 13 सितंबर का दिन
akhilesh yadav
> 13 सितंबर को सुबह अखिलेश यादव ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्य सचिव दीपक सिंघल को हटा दिया। सिंघल भी शिवपाल के करीबी माने जाते रहे हैं।
> 13 सितंबर की शाम को मुलायम सिंह यादव ने बड़ा कदम उठाते हुए सपा प्रदेश अध्यक्ष पद से अखिलेश यादव को हटाते हुए यह जिम्मेदारी शिवपाल यादव को दे दी।
> 13 सितंबर की देर शाम अखिलेश यादव ने भी बड़ा कदम उठाते हुए चाचा अखिलेश यादव से तीन मंत्रालय वापस ले लिए।
> 13 सितंबर की शाम को मुलायम सिंह यादव ने बड़ा कदम उठाते हुए सपा प्रदेश अध्यक्ष पद से अखिलेश यादव को हटाते हुए यह जिम्मेदारी शिवपाल यादव को दे दी।
> 13 सितंबर की देर शाम अखिलेश यादव ने भी बड़ा कदम उठाते हुए चाचा अखिलेश यादव से तीन मंत्रालय वापस ले लिए।
14 सितंबर पर सबकी निगाहें
कैबिनेट मंत्री शिवपाल यादव
- फोटो : amar ujala
> 14 सितंबर की सुबह शिवपाल यादव ने प्रेस कान्फ्रेंस करके बताया कि वह सरकार में रहेंगे या नहीं इसका अंतिम निर्णय मुलायम सिंह यादव (नेताजी) ही करेंगे।
> 14 सितंबर की दोपहर शिवपाल यादव चार्टर्ड प्लेन से मुलायम सिंह से मिलने के लिए दिल्ली रवाना हो गए।