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Ratan Tata: अदिति ने बताई रतन टाटा से मिलने की कहानी, रातोंरात बदल गई स्टार्टअप की किस्मत
Mon, 08 Aug 2022 09:55 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Mon, 08 Aug 2022 09:55 PM IST
सार
हाथ से लिखे पत्र भेजने से लेकर अलग-अलग लोगों से जुड़ने से लेकर रतन टाटा के घर के बाहर लगभग 12 घंटे तक इंतजार करने तक, इस जोड़े ने असंभव को संभव करने के लिए सब कुछ किया।
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Ratan Tata and Aditi Bhosle
- फोटो : LinkedIn
विस्तार
रिपोज (Repos) की सह-संस्थापक अदिति भोसले वलुंज ने लिंक्डइन साझा करके बताया है कि कैसे टाटा संस के मानद चेयरमैन रतन टाटा के एक फोन कॉल ने रातों-रात उनके स्टार्टअप की किस्मत बदल दी। अपने पोस्ट में अदिति ने बताया गया कि उन्हें कैसे फोन आया, अपने पति और रिपोज के सह-संस्थापक चेतन वलुंज के साथ रतन टाटा से मुलाकात की और अपने स्टार्टअप के लिए धन हासिल किया। लिंक्डइन पर कई तस्वीरों के साथ साझा किए गए लंबे पोस्ट में अदिति ने लिखा, रतन टाटा सर के साथ हमारी मुलाकात सामान्य नहीं है। यह एक हौसला जुनून की कहानी है।
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रतन टाटा के अलावा किसी और का ख्याल नहीं आया
चूंकि इस दंपती के पास कोई औपचारिक व्यावसायिक शिक्षा नहीं थी, इसलिए उन्हें एक संरक्षक की जरूरत का एहसास हुआ। ऐसे में वे रतन टाटा के अलावा किसी और के बारे में नहीं सोच सकते थे। अदिति कहती हैं- और मैंने लापरवाही से चेतन से कहा, चलो मिलते हैं। चेतन का जवाब था- अदिति, वे मेरे पड़ोसी नहीं हैं जो आप कह रही हो कि चलो मिलते हैं। कई लोगों ने इस दंपती को बताया कि रतन टाटा से मिलना एक असंभव काम है, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और मुंबई के लिए रवाना हो गए। उन्होंने एक थ्रीडी प्रस्तुति भी दी कि वे ऊर्जा वितरण प्रणाली में कैसे बदलाव लाना चाहते हैं और हर किसी तक ऊर्जा या ईंधन पहुंचाने के लिए एक प्रौद्योगिकी वाली विधि का पता लगा।
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हाथ से लिखे पत्र भेजने से लेकर अलग-अलग लोगों से जुड़ने से लेकर रतन टाटा के घर के बाहर लगभग 12 घंटे तक इंतजार करने तक, इस जोड़े ने असंभव को संभव करने के लिए सब कुछ किया। और उनकी कोशिशें बेकार नहीं गई क्योंकि उन्हें रात 10 बजे खुद रतन टाटा का फोन आया।
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रतन टाटा का फोन आते ही खड़े हो गए रोंगटे
अदिति लिखती हैं- मैं जवाब नहीं देना चाहती थी, लेकिन जब मैंने जवाब दिया तो दूसरी तरफ से आवाज आई, हाय! क्या मैं अदिति से बात कर सकता हूं? मैंने कहा- हां, क्या मैं जान सकती हूं कि कौन बोल रहे हैं? (हालांकि लेकिन मेरा दिल यह जानता था)। उन्होंने कहा, मैं रतन टाटा हूं। मुझे आपका पत्र मिला। क्या हम मिल सकते हैं? मैं: स्तब्ध, रोंगटे खड़े हो गए, आंसू गिरने लगे, चेहरे पर मु्स्कान। अगले दिन हम सुबह 10.45 बजे उनके घर पहुंचे और अपनी प्रेजेंटेशन के साथ लिविंग रूम में उनका इंतजार कर रहे थे। और ठीक 11 बजे अदिति ने रतन टाटा के साथ अपनी पहली मुलाकात के बारे में बताते हुए लिखा, नीली कमीज पहने एक लंबा, गोरा व्यक्ति हमारी ओर आया।
तीन घंटे तक चली बैठक ने युवा उद्यमियों के लिए सब कुछ बदल दिया। रतन टाटा सर ने पूछा, 'आप मुझसे क्या चाहते हैं?' हमने कहा- सर, लोगों की सेवा करने और हमारे देश को वैश्विक बनाने में हमारी मदद करें। हमारा मार्गदर्शन करें। उन्होंने कहा- ठीक है। हम उसके घर से बाहर निकल गए जैसे हम मंदिर से बाहर निकल रहे हों, अदिति ने अपने विस्तृत लिंक्डइन पोस्ट के अंत में लिखा। पोस्ट को दो दिन पहले शेयर किया गया था। इसे लिंक्डइन पर 7,300 से अधिक प्रतिक्रियाएं, दो सौ से अधिक टिप्पणियां और कई शेयर मिले हैं।