{"_id":"5cfc31bebdec22072c3336df","slug":"third-municipal-corporation-darjeeling-is-also-in-the-include-of-bjp-in-west-bengal","type":"story","status":"publish","title_hn":"पश्चिम बंगाल: 30 में से 17 पार्षद भाजपा में शामिल, टीएमसी ने दार्जिलिंग नगर निगम भी गंवाया","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
पश्चिम बंगाल: 30 में से 17 पार्षद भाजपा में शामिल, टीएमसी ने दार्जिलिंग नगर निगम भी गंवाया
Sun, 09 Jun 2019 04:56 AM IST
Avdhesh Kumar
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Sun, 09 Jun 2019 04:56 AM IST
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दार्जिलिंग नगर निगम के 30 में से 17 पार्षदों के शनिवार को भाजपा में शामिल होने के बाद इस पर अब भाजपा का कब्जा हो गया है। लोकसभा चुनाव के बाद से पश्चिम बंगाल की है तीसरी नगर निगम है जो अब भाजपा द्वारा शासित होगी।
इससे पहले भाटपारा और नईहाटी नगर निगम पहले ही भाजपा के कब्जे में आ चुके हैं। लेकिन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने यहां भाजपा के निर्वाचित मेयर को नियुक्त करने के बजाय प्रशासक बैठा दिया है। राज्य सरकार ने दलील दी है कि चूंकि जल्द ही स्थानीय निकायों के चुनाव होने हैं, इसलिए इन दोनों नगर निगमों में महापौर की नियुक्ति अनावश्यक है।
कभी ममता बनर्जी के दाहिने हाथ रहे राज्यसभा सांसद मुकुल राय की उपस्थिति में इन पार्षदों ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। लेकिन इनमें से एक भी तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल नहीं हुआ। यह सभी भाजपा के सहयोगी दल गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के सदस्य थे। लेकिन चूंकि मोर्चा के विमल गुरुंग और रोशन गिरी जैसे वरिष्ठ नेता हत्या के एक मामले में वांछित हैं और वे गोरखालैंड में प्रवेश नहीं कर सकते, इसलिए इन पार्षदों को भाजपा के राजनीतिक संरक्षण की जरूरत थी।
विज्ञापन
फिलहाल दार्जिलिंग नगर निगम के महापौर तृणमूल समर्थक विनय तमांग हैं। देखना होगा कि ममता बनर्जी यहां किसी अन्य को महापौर बनने देंगी या फिर दार्जिलिंग में भी प्रशासक की नियुक्ति करेंगी।
विज्ञापन
इससे पहले भाटपारा और नईहाटी नगर निगम पहले ही भाजपा के कब्जे में आ चुके हैं। लेकिन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने यहां भाजपा के निर्वाचित मेयर को नियुक्त करने के बजाय प्रशासक बैठा दिया है। राज्य सरकार ने दलील दी है कि चूंकि जल्द ही स्थानीय निकायों के चुनाव होने हैं, इसलिए इन दोनों नगर निगमों में महापौर की नियुक्ति अनावश्यक है।
विज्ञापन
कभी ममता बनर्जी के दाहिने हाथ रहे राज्यसभा सांसद मुकुल राय की उपस्थिति में इन पार्षदों ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। लेकिन इनमें से एक भी तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल नहीं हुआ। यह सभी भाजपा के सहयोगी दल गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के सदस्य थे। लेकिन चूंकि मोर्चा के विमल गुरुंग और रोशन गिरी जैसे वरिष्ठ नेता हत्या के एक मामले में वांछित हैं और वे गोरखालैंड में प्रवेश नहीं कर सकते, इसलिए इन पार्षदों को भाजपा के राजनीतिक संरक्षण की जरूरत थी।
विज्ञापन
फिलहाल दार्जिलिंग नगर निगम के महापौर तृणमूल समर्थक विनय तमांग हैं। देखना होगा कि ममता बनर्जी यहां किसी अन्य को महापौर बनने देंगी या फिर दार्जिलिंग में भी प्रशासक की नियुक्ति करेंगी।