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पूर्वोत्तर में भगवा उदय से फिर तेज हुई तीसरे मोर्चे की आहट
हिमांशू मिश्र, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Mon, 05 Mar 2018 03:06 AM IST
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पूर्वोत्तर भारत में भाजपा की बड़ी जीत से घबराए विपक्ष ने एक बार फिर तीसरे मोर्चे की कवायद तेज कर दी है। नतीजे आते ही तेलंगाना के सीएम के चंद्रशेखर राव ने तीसर मोर्चे की वकालत की, वहीं उत्तर प्रदेश में बसपा ने लोकसभा उपचुनाव में सपा को समर्थन देने की घोषणा कर दी। इस मुहिम में तृणमूल अध्यक्ष और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी शामिल हुई हैं, जिन्हें बीजेडी के मुखिया नवीन पटनायक का मौन समर्थन मिला है। हालांकि इस दिशा में टीएमसी और वाम दलों के रिश्ते बाधक बन रहे हैं।
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तेलंगाना सीएम ने खुलकर की वकालत तो उपचुनाव में साथ आए सपा-बसपा
भाजपा से नाराज शिवसेना-टीडीपी को साधने में जुटी टीएमसी
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तीसरे मोर्चे के गठन की कोशिश पहले भी हो चुकी है। ममता बनर्जी भाजपा से नाराज चल रही शिवसेना को साधने की कोशिश कर चुकी हैं। इस क्रम में उन्होंने आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल से भी बात की है। लेकिन त्रिपुरा के नतीजे आने के तत्काल बाद तेलंगाना के सीएम राव ने तीसरे मोर्चे के गठन की जरूरत पर जोर दिया है। उन्होंने इस पर बातचीत की प्रगति का भी दावा किया और कहा कि वह इसमें कोई भी भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं।
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टीएमसी-वाम रिश्ता बड़ा पेंच
तीसरे मोर्चे की जमीन तैयार करने में टीएमसी और वाम दलों के रिश्ते बाधक बन रहे हैं। ममता की कोशिश तीसरे मोर्चे से वाम दलों को दूर रखने की है। इसी कोशिश में वह शिवसेना, आप, बीजेडी, सपा जैसे दलों के संपर्क में हैं। सूत्रों का कहना है कि बीते दिनों उन्होंने भाजपा से नाराज चल रहे टीडीपी के मुखिया चंद्रबाबू नायडू से भी संपर्क साधा था। दूसरी ओर माकपा खुद तीसरे मोर्चे की जमीन तैयार करने में जुटी है। माकपा नेतृत्व तेलंगाना के सीएम और तमिलनाडु में सियासी पारी शुरू करने वाले अभिनेता कमल हासन के संपर्क में हैं। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि माकपा और टीएमसी के बीच होड़ का क्या नतीजा निकलता है?
मुश्किल में है कांग्रेस
पूर्वोत्तर के नतीजे ने राजग विरोधी गठबंधन तैयार करने की कांग्रेस की मुहिम को बड़ा झटका दिया है। टीएमसी सहित कई दल नहीं चाहते कि भाजपा विरोधी मुहिम की अगुवाई कांग्रेस करे। इसके अलावा कई राज्यों में कांग्रेस गैर भाजपाई अन्य दलों की प्रतिद्वंद्वी है। हालांकि पार्टी के रणनीतिकारों को लगता है कि कर्नाटक में सत्ता बरकरार रखने और इसी साल होने वाले मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में अगर कांग्रेस ने बेहतर परिणाम दिखाया तो वह गैर राजग विरोधी रेस का नेतृत्व करने की स्थिति में आ सकती है।