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पांच साल में बन गए कमांडर ये पांच मोस्ट वांटेड आतंकी
amarujala.com- Presented By: पूजा मेहरोत्रा
Updated Sat, 16 Sep 2017 05:57 PM IST
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zakir musa
- फोटो : zakir musa
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उरी और पठानकोट में हुए हमले के बाद भारतीय सेना अब किसी भी कीमत पर कश्मीर और एलओसी पर अमन चैन चाहती है। पिछले एक साल में करीब 147 हार्ड कोर आतंकियों को ढेर कर चुकी सेना अब पांच मोस्ट वांटेड आतंकियों की लिस्ट जारी कर उनकी तलाश तेज कर दी है।
इन मोस्ट वांटेड आतंकियों में जाकिर मूसा, रियाज नायकू, सद्दाम पीडर, जीनत उल इस्लाम के साथ खालिद के नाम शामिल है। आतंकी और सेना दोनों ही डाल-डाल और पात-पात का खेल, खेल रहे हैं। इधर आतंकी कमांडर सेना को मारती है उधर नए आतंकी कमांडर का नाम एनाउंस हो जाता है।
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इन मोस्ट वांटेड आतंकियों में जाकिर मूसा, रियाज नायकू, सद्दाम पीडर, जीनत उल इस्लाम के साथ खालिद के नाम शामिल है। आतंकी और सेना दोनों ही डाल-डाल और पात-पात का खेल, खेल रहे हैं। इधर आतंकी कमांडर सेना को मारती है उधर नए आतंकी कमांडर का नाम एनाउंस हो जाता है।
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जीनत उल इस्लाम को लश्कर की कमान सौंपी जाने की बात सामने आई है
zakir musa
पिछले दिनों अबु इस्माइल को सेना ने मुठभेड़ में ढेर कर दिया तो लश्कर ने पांच नाम जारी कर दिए जिसमें से जीनत उल इस्लाम को लश्कर की कमान सौंपी जाने की बात सामने आई है। इन नामों में जाकिर मूसा, रियाज नायकू, सद्दाम पाडर, जीनत के साथ खालिद के नाम प्रमुख हैं।
जाकिर मूसा
जाकिर सुरक्षा एजेंसियों की सूची में सबसे ऊपर है। धर्म के नाम पर लोगों के बरगलाने में मूसा का नाम सबसे आगे है। मूसा खतरनाक है क्योंकि वह कश्मीर ही नहीं बल्कि पूरे भारत में इस्लामी खलीफा लागू करने के लिए लगातार प्रचार-प्रसास कर रहा है।
आतंकी संगठन हिज्बुल के विभाजन के बाद उसने कश्मीर में अंसार गजवत-उल- हिंद संगठन बनाया। उसके इस संगठन को कई आतंकी संगठनों ने हथियार मुहैया कराने से लेकर नेटवर्क मजबूत करने में भी मदद किया था। मूसा को मदद करने वालों में लश्कर चीफ अबु दुजाना भी शामिल रहा था। अबु दुजाना की मौत के बाद मूसा थोड़ा कमजोर पड़ा लेकिन उसने खुद को फिर मजबूत कर लिया है।
जाकिर मूसा
जाकिर सुरक्षा एजेंसियों की सूची में सबसे ऊपर है। धर्म के नाम पर लोगों के बरगलाने में मूसा का नाम सबसे आगे है। मूसा खतरनाक है क्योंकि वह कश्मीर ही नहीं बल्कि पूरे भारत में इस्लामी खलीफा लागू करने के लिए लगातार प्रचार-प्रसास कर रहा है।
आतंकी संगठन हिज्बुल के विभाजन के बाद उसने कश्मीर में अंसार गजवत-उल- हिंद संगठन बनाया। उसके इस संगठन को कई आतंकी संगठनों ने हथियार मुहैया कराने से लेकर नेटवर्क मजबूत करने में भी मदद किया था। मूसा को मदद करने वालों में लश्कर चीफ अबु दुजाना भी शामिल रहा था। अबु दुजाना की मौत के बाद मूसा थोड़ा कमजोर पड़ा लेकिन उसने खुद को फिर मजबूत कर लिया है।
आतंकी भी बदलते हैं सगंठन
वांटेड आतंकी
रियाज नायकू
रियाज डिस्ट्रिक्ट कमांडर है और उसे ए प्लस प्लस कैटगरी मिली हुई है। अवंतीपोर, टोकुन गांव के रियाज दिसंबर 2012 में हिज्ब में शामिल हुआ और महज पांच सालों में संगठन के प्रमुख बन गया।
इस समय सबसे अनुभवी हिज्बुल कमांडरों में से एक है। यह कश्मीर में हिज्ब के ऑपरेशन देख रहा है। पिछले महीने एक मुठभेड़ में यासीन इट्टू की मौत के बाद से इसने पदभार संभाला है। वह तकनीक में महारत रखता है। हाल ही में वह एक आतंकी के जनाजे में शामिल हुआ और सार्वजनिक रूप से पाकिस्तान को समर्थन देने की बात कही।
सद्दाम पाडर
सद्दाम हिज्ब के पूर्व कमांडर बुरहान वानी का काफी करीबी था और सोशल मीडिया पर वायरल हुए हिज्ब के 12 आतंकियों के उस फोटो का हिस्सा भी था। पाडर के साथ फोटो में तारिक पंडित भी थे लेकिन वो अब समर्पण कर चुका है। सद्दाम लगभग 4-5 साल से हिज्ब में सक्रिय है। पहले वह लश्कर का हिस्सा था, लेकिन वर्ष 2015 में वह हिज्बुल में शामिल हुआ।
रियाज डिस्ट्रिक्ट कमांडर है और उसे ए प्लस प्लस कैटगरी मिली हुई है। अवंतीपोर, टोकुन गांव के रियाज दिसंबर 2012 में हिज्ब में शामिल हुआ और महज पांच सालों में संगठन के प्रमुख बन गया।
इस समय सबसे अनुभवी हिज्बुल कमांडरों में से एक है। यह कश्मीर में हिज्ब के ऑपरेशन देख रहा है। पिछले महीने एक मुठभेड़ में यासीन इट्टू की मौत के बाद से इसने पदभार संभाला है। वह तकनीक में महारत रखता है। हाल ही में वह एक आतंकी के जनाजे में शामिल हुआ और सार्वजनिक रूप से पाकिस्तान को समर्थन देने की बात कही।
सद्दाम पाडर
सद्दाम हिज्ब के पूर्व कमांडर बुरहान वानी का काफी करीबी था और सोशल मीडिया पर वायरल हुए हिज्ब के 12 आतंकियों के उस फोटो का हिस्सा भी था। पाडर के साथ फोटो में तारिक पंडित भी थे लेकिन वो अब समर्पण कर चुका है। सद्दाम लगभग 4-5 साल से हिज्ब में सक्रिय है। पहले वह लश्कर का हिस्सा था, लेकिन वर्ष 2015 में वह हिज्बुल में शामिल हुआ।
बशीर लश्करी तथा जुनैद अहमद मट्टू को सुरक्षा बलों ने मार गिराया था
terrorist
- फोटो : Demo Photo
जीनत-उल-इस्लाम
अबू इस्माइल के मारे जाने के बाद जीनत-उल-इस्लाम लश्कर की कमान संभालने का सबसे सबसे प्रबल दावेदार है। जीनत शोपियां जिले के सुगन जेनापोरा का निवासी है और वर्ष 2015 में आतंकी बना था। फरवरी में शोपियां में हुए हमले का मुख्य आरोपी है उस हमले में तीन सैनिक शहीद हुए थे।
जीनत, आईईडी विशेषज्ञ है और लश्कर से पहले वह आतंकी संगठन अल-बदर का सदस्य था। वर्ष 2008 में उसे गिरफ्तार किया गया था जब उसने कबूला था कि वह ओजीडब्ल्यू के रूप काम कर रहा था, लेकिन उसे चार साल बाद रिहा कर दिया गया था।
खालिद
जैश-ए-मोहम्मद का कमांडर है। उसका कोड नाम खालिद है। वह पाकिस्तान से प्रशिक्षित है और घुसपैठ करने के बाद से सोपोर क्षेत्र में सक्रिय है।
यह भी माना जाता है कि एक महीने पहले दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले में पुलिस लाइन पर आत्मघाती हमले के पीछे उसका हाथ है जिसमें चार सीआरपीएफ और चार पुलिसकर्मी शहीद हुए थे। उनका नाम अक्टूबर 2016 में पहली बार सामने आया था जब सेना ने बारामुला में जेएम मॉड्यूल का पर्दाफाश किया था।
कश्मीर में आतंक का पर्याय बने इन दहशतगर्दों को सुरक्षा बल अब किसी भी कीमत पर छोड़ना नहीं चाहते हैं। सेना की ओर से पहले 12 दहशतगर्दों की सूची जारी की थी। सूची जारी करने के एक महीने के भीतर सूची में शामिल बशीर लश्करी तथा जुनैद अहमद मट्टू को सुरक्षा बलों ने मार गिराया था।
अबू इस्माइल के मारे जाने के बाद जीनत-उल-इस्लाम लश्कर की कमान संभालने का सबसे सबसे प्रबल दावेदार है। जीनत शोपियां जिले के सुगन जेनापोरा का निवासी है और वर्ष 2015 में आतंकी बना था। फरवरी में शोपियां में हुए हमले का मुख्य आरोपी है उस हमले में तीन सैनिक शहीद हुए थे।
जीनत, आईईडी विशेषज्ञ है और लश्कर से पहले वह आतंकी संगठन अल-बदर का सदस्य था। वर्ष 2008 में उसे गिरफ्तार किया गया था जब उसने कबूला था कि वह ओजीडब्ल्यू के रूप काम कर रहा था, लेकिन उसे चार साल बाद रिहा कर दिया गया था।
खालिद
जैश-ए-मोहम्मद का कमांडर है। उसका कोड नाम खालिद है। वह पाकिस्तान से प्रशिक्षित है और घुसपैठ करने के बाद से सोपोर क्षेत्र में सक्रिय है।
यह भी माना जाता है कि एक महीने पहले दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले में पुलिस लाइन पर आत्मघाती हमले के पीछे उसका हाथ है जिसमें चार सीआरपीएफ और चार पुलिसकर्मी शहीद हुए थे। उनका नाम अक्टूबर 2016 में पहली बार सामने आया था जब सेना ने बारामुला में जेएम मॉड्यूल का पर्दाफाश किया था।
कश्मीर में आतंक का पर्याय बने इन दहशतगर्दों को सुरक्षा बल अब किसी भी कीमत पर छोड़ना नहीं चाहते हैं। सेना की ओर से पहले 12 दहशतगर्दों की सूची जारी की थी। सूची जारी करने के एक महीने के भीतर सूची में शामिल बशीर लश्करी तथा जुनैद अहमद मट्टू को सुरक्षा बलों ने मार गिराया था।