Election: पंजाब में भाजपा-अकाली दल गठबंधन में फंसा पेंच, तीन नहीं छह सीटें चाहती है बीजेपी
कृषि कानून के विरोध में राजग से नाता तोड़ने के बाद नई सियासी परिस्थितियों में भाजपा और अकाली दल के बीच फिर से साथ आने पर कई दौर की बातचीत हुई। भाजपा ने इस दौरान राज्य की 13 सीटों में से छह सीटों पर अपना दावा जताया।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पंजाब में भाजपा और अकाली दल के बीच चुनाव पूर्व गठबंधन की संभावना क्षीण हो गई है। अकाली दल न तो बसपा से गठबंधन खत्म करना चाहता है और न ही भाजपा को लोकसभा की छह सीट देने के लिए तैयार है। राज्य इकाई के गठबंधन के विरोध का सामना कर रहे भाजपा नेतृत्व ने इस बार अपने दम पर चुनाव मैदान में उतरने का मन बना लिया है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि राज्य की सभी सीटों पर चतुष्कोणीय मुकाबले से भाजपा राज्य में पुराना प्रदर्शन दुहरा सकती है।
दरअसल, कृषि कानून के विरोध में राजग से नाता तोड़ने के बाद नई सियासी परिस्थितियों में भाजपा और अकाली दल के बीच फिर से साथ आने पर कई दौर की बातचीत हुई। भाजपा ने इस दौरान राज्य की 13 सीटों में से छह सीटों पर अपना दावा जताया। जबकि अकाली दल का कहना था कि भाजपा पहले की तरह बस तीन सीटों पर चुनाव लड़े। इसके अलावा बातचीत में अकाली दल ने मोदी सरकार पर सिख बंदियों की रिहाई का भी दबाव बनाया। ब्यूरो
इसलिए फंसा पेच
अकाली दल ने पिछला विधानसभा चुनाव बसपा के साथ लड़ा था। पार्टी लोकसभा चुनाव में भी बसपा से गठबंधन बरकरार रखना चाहती है। दूसरी ओर भाजपा की राज्य इकाई अकाली दल से गठबंधन का लगातार विरोध कर रही थी। इसी बीच जब आप ने विपक्षी गठबंधन इंडी के इतर अपने दम पर चुनाव लड़ने की घोषणा की, तब भाजपा नेतृत्व ने भी अपने दम पर चुनाव लड़ने का मन बनाया। नेतृत्व को लगता है कि कांग्रेस-आप के अलग-अलग चुनाव लड़ने से राज्य में अपना पुराना प्रदर्शन दोहराने में कामयाब रहेगी।