आम आदमी की सेवा को न्यायपालिका में सुधार नहीं क्रांति चाहिए: जस्टिस गोगोई

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 13 Jul 2018 07:18 AM IST
There is a need to revolutionize the judiciary to maintain it for the common man's service
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न्यायपालिका को आम आदमी की सेवा के लायक बनाए रखने के लिए इसमें सुधार नहीं क्रांति लाने की जरूरत है। ये टिप्पणी बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ जज जस्टिस रंजन गोगोई ने की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि न्यायपालिका को और अधिक सक्रिय तथा आगे बढ़कर भूमिका निभानी चाहिए। यहां तीसरे रामनाथ गोयनका स्मृति व्याख्यान में बृहस्पतिवार को जस्टिस गोगोई ‘न्यायिक दृष्टि’ विषय पर बोल रहे थे।
उन्होंने कहा, न्यायपालिका ‘आशा का आखिरी किला’ था और महान संवैधानिक दृष्टिकोण का अभिभावक रहा है। ये संस्था बड़े सामाजिक विश्वास से संपन्न रही है। उन्होंने ये भी कहा कि स्वतंत्र पत्रकार और कई बार मुखर न्यायधीश लोकतंत्र की प्राथमिक रक्षा पंक्ति साबित हुए हैं। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के पहले 50 सालों में अदालतों ने बेहद मजबूत न्यायशास्त्र निर्मित किया, जिसका अब हम लाभ पा रहे हैं।

चीफ जस्टिस बनने के दावेदार हैं जस्टिस गोगोई
बता दें कि वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट के दूसरे सबसे वरिष्ठ जज जस्टिस गोगोई वर्तमान चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की आगामी 2 अक्तूबर को सेवानिवृत्ति के बाद वरिष्ठता के हिसाब से उनके संभावित उत्तराधिकारी माने जा रहे हैं। जस्टिस गोगोई ने ही 12 जनवरी को जस्टिस जे. चेलमेश्वर, एमबी लोकुर और कूरियन जोसेफ के साथ मिलकर विवादित प्रेस कांफ्रेंस की थी, जिसमें चीफ जस्टिस मिश्रा पर गंभीर आरोप लगाए गए थे।

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