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भाजपा के  लिए परेशानी का कारण बनी पासवान-नीतीश-दुष्यंत की तिकड़ी  

Sun, 12 Jan 2020 07:58 PM IST
Mohit Mudgal अमित शर्मा, नई दिल्ली  
अमित शर्मा, नई दिल्ली   Published by: Mohit Mudgal Updated Sun, 12 Jan 2020 07:58 PM IST
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The trio of Paswan Nitish Dushyant became a source of trouble for the BJP

झारखंड में सहयोगी दलों के साथ तालमेल न बिठा पाने का बड़ा नुकसान उठा चुकी भाजपा की राह में उसके तीन सहयोगियों ने नई मुसीबत खड़ी कर दी है। उसके तीन सहयोगी दलों जनता दल (यू), लोकजन शक्ति पार्टी और जजपा ने उससे दिल्ली विधानसभा चुनाव में सीटों की मांग कर दी है। सीटों के न मिलने की स्थिति में तीनों ही दल चुनाव में ताल ठोंकने को तैयार हैं। अगर ये दल चुनाव में उतरते हैं तो इससे भाजपा को नुकसान हो सकता है। इस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ही तीन सहयोगी नीतीश कुमार, रामविलास पासवान और दुष्यंत चौटाला उनकी दिल्ली की जीत की राह में रोड़ा बन सकते हैं।

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हरियाणा में भाजपा सरकार जजपा की बैशाखी पर टिकी हुई है। हरियाणा के आस-पास सटे दिल्ली के इलाकों में जाट वोट काफी अधिक संख्या में हैं। इन वोटरों का भावनात्मक लगाव हरियाणा के प्रभावशाली नेता रहे ओम प्रकाश चौटाला और उनके परिवार से अभी भी बना हुआ है। हालांकि बीजेपी में प्रवेश वर्मा जैसे जाट नेता भी असरदार हैं, लेकिन अगर इस चुनाव में भाजपा और जजपा में सीटों के मामले पर कोई सहमति नहीं बनती है तो जजपा अकेले चुनाव में उतरने की तैयारी कर सकती है। अगर जजपा अकेले मैदान में उतरेगी तो इसका सीधा नुकसान भाजपा को होगा क्योंकि जाट वोटर दिल्ली में अभी तक उसी को वोट करता रहा है।
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वहीं, लोकजनशक्ति पार्टी के प्रवक्ता अजय पांडेय ने अमर उजाला से कहा कि हम बिहार के बाहर पार्टी का आधार बढ़ाने की हर संभव कोशिश कर रहे हैं। इसी अभियान के तहत हम दिल्ली में भी अपनी किस्मत आजमाने को तैयार हैं। अब यह भाजपा को तय करना चाहिए कि वह अपने सहयोगियों को साथ लेकर चुनावी मैदान में उतरना चाहती है या वह अकेले चुनाव लड़ेगी।  बीजेपी से सीटों के बारे में किसी तरह की बातचीत से इनकार करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी दिल्ली की सभी 70 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी।
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वहीं, बीजेपी के एक अन्य सहयोगी जनता दल (यूनाइटेड) ने रविवार को दिल्ली स्थित कार्यालय में एक बैठक कर प्रदेश में अपने विकास की संभावनाओं की तलाश की। पार्टी के शीर्ष नेता दयानंद राय ने कहा कि वे पूर्वांचलियों के मुद्दे को लेकर चुनाव में उतरेंगे और अपनी अलग पहचान बनाएंगे। भाजपा से सीटों की तालमेल की किसी संभावना से उन्होंने इनकार नहीं किया लेकिन कहा कि अगर बीजेपी से उनकी पार्टी का तालमेल नहीं होता तो वे अकेले दम पर ही दिल्ली के सियासी मैदान में उतरेंगे। यहां यह ध्यान देने योग्य बात है कि आम आदमी पार्टी का दामन थाम चुके शोएब इकबाल जेडीयू के टिकट पर विधाय़क रह चुके हैं। अन्य चुनावों में भी पार्टी ठीक-ठाक प्रदर्शन करती रही है।

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