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नगा शांति प्रक्रिया की समयसीमा करीब आने से इलाके में बढ़ा तनाव
Thu, 31 Oct 2019 05:45 AM IST
संजीव कुमार झा
रीता तिवारी, अमर उजाला
रीता तिवारी, अमर उजाला
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Thu, 31 Oct 2019 05:45 AM IST
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नागालैंड पुलिस
- फोटो : Twitter
पूर्वोत्तर राज्य नगालैंड में दो दशकों से भी लंबे समय से चल रही शांति प्रक्रिया पर समझौते की समय सीमा 31 अक्तूबर के करीब आने से इलाके में तनाव की स्थिति है। खासकर शांति वार्ता में शामिल नेशनल सोशलिस्ट कौंसिल आफ नगालैंड (एनएससीएन) के इसाक-मुइवा गुट ने असम, अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर के नगाबहुल इलाकों को लेकर ग्रेटर नगालिम के गठन की मांग उठाई है, उससे इलाके में अफवाहों का बाजार गरम हो गया है।
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मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश की सरकारों ने केंद्र से इस बात का ध्यान रखने को कहा है कि नगा शांति समझौते का उन राज्यों की अखंड़ता और संप्रभुता पर कोई असर नहीं हो। मणिपुर के कई संगठनों ने प्रस्तावित शांति समझौते के विरोध में 31 अक्तूबर सुबह चार बजे से आधी रात तक यानी 20 घंटे तक विरोध जताने की अपील की है।
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केंद्र सरकार ने नगा संगठनों के साथ जारी शांति प्रक्रिया 31 अक्तूबर तक पूरा करने की समयसीमा तय की है। नगालैंड के राज्यपाल एन. रवि इस शांति प्रक्रिया में केंद्र सरकार के मध्यस्थ हैं। उन्होंने कहा है कि केंद्र सरकार किसी भी परिस्थिति में 31 अक्तूबर तक इस बातचीत को पूरा कर लेने के प्रति कृतसंकल्प है।
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वैसे, अभी इस शांति समझौते की राह में कई बाधाएं हैं। एनएससीएन (आई-एम) ने हाल में अलग झंडे व संविधान की मांग की थी जिसे केंद्र ने खारिज कर दिया था। इसके अलावा वह शुरू से ही ग्रेटर नगालिम की मांग कर रहा है। ऐसे में केंद्र सरकार उसे छोड़ कर दूसरे नगा गुटों के साथ समझौते पर हस्ताक्षर कर सकती है। वहीं, यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या एनएससीएन के बिना ऐसा कोई समझौता स्थायी और कामयाब होगा? राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि मौजूदा हालात में 31 अक्तूबर तक किसी समझौते पर हस्ताक्षर की उम्मीद कम ही नजर आती है।