{"_id":"5727eb5e4f1c1b8f6d5cd373","slug":"the-petition-to-promote-constitution-s-preamble-dismissed","type":"story","status":"publish","title_hn":"संविधान की ‘प्रस्तावना’ का प्रचार-प्रसार करने संबंधी याचिका खारिज","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
संविधान की ‘प्रस्तावना’ का प्रचार-प्रसार करने संबंधी याचिका खारिज
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 03 May 2016 05:35 AM IST
विज्ञापन
इंडिया कहो या भारत, नाम में क्या रखा है: सुप्रीम कोर्ट्र
- फोटो : Reuters
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नवयुवकों की रगों में भारतीय संविधान की ‘प्रस्तावना‘ के सिद्धांत भरने की गुहार संबंधी जनहित याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है। याचिका में कहा गया था कि देश में वैमनस्यता या शत्रुता खत्म करने और समाज में आपसी भाईचारे के बढ़ावे के लिए सभी स्कूल, कॉलेजों और दफ्तरों को यह निर्देश दिया जाना चाहिए कि वे प्रस्तावना के मंत्र को डिस्प्ले करें।
विज्ञापन
चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि प्रस्तावना का सम्मान किया जाना चाहिए, इसके लिए डिस्प्ले की क्या जरूरत है। पीठ ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील से कहा कि क्या आपने सुप्रीम कोर्ट परिसर में प्रस्तावना का डिस्प्ले कहीं देखा है? जबकि सुप्रीम कोर्ट संवैधानिक काम करता है। जनहित याचिका विधि छात्र अनुज चौहान द्वारा दायर की गई थी।
विज्ञापन
याचिका में कहा गया था कि भारतीय संविधान की ‘प्रस्तावना’ के मंत्रों को पूरी तरह धरातल पर उतारने में राज्य नाकाम रहे हैं। हमारा संविधान पंथ-निरपेक्षता की बात करता है। लेकिन कुछ चुनिंदा लोग अल्पसंख्यक पर दबाव बनाने की कोशिश करते हैं जिससे समाज में वैमनस्यता की भावना फैलती है। ऐसा भी देखा जाता है कि राजनीतिक वर्ग इसके प्रति गंभीरता नहीं दिखाता है। कई बार तो राजनीतिक वर्ग की भी इनमें भूमिका होती है। इससे देश की अखंडता को खतरा है।
विज्ञापन