हाईकोर्ट की इस बड़ी गलती से बरी हो गई थीं जयललिता और शशिकला
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सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत जयललिता और उनकी सहेली शशिकला सहित अन्य दो रिश्तेदारों की आय से अधिक संपति के मामले में सजा को बरकरार रखते हुए उन्हें दस करोड़ जुर्माना और चार साल कैद की सजा सुनाई है।
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के उस निर्णय को पलट दिया है जिसमें चारों आरोपियों को बरी कर दिया गया था। खास बात ये है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस दौरान मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि हाईकोर्ट के जज ने मामले में फैसला देते समय बड़ी गलती कर दी थी जिसका सीधा फायदा जयललिता सहित अन्य आरोपियों को मिला और वो कोर्ट से राहत पाने में सफल रहे।
सुप्रीम कोर्ट ने उस गलती को दुरुस्त करते हुए आरोपियों की वही सजा बरकरार रखी जो कर्नाटक की स्पेशल कोर्ट ने उन्हें सुनाई थी।
इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार स्पेशल कोर्ट द्वारा दी गई 100 करोड़ जुर्माने और चार साल कैद की सजा के खिलाफ तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता ने कर्नाटक हाईकोर्ट में अपील की थी।
हाइकोर्ट की गलती से जयललिता को मिल गया था लाभ
जिस पर हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद उन्हें बरी कर दिया था। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के जज की एक बड़ी गलती का लाभ सभी आरोपियों को मिला था। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को दिए अपने नए फैसले में इसकी ओर ध्यान दिलाया।
कोर्ट ने 570 पेज के अपने कल के फैसले में पाया कि फैसला सुनाने वाले जज ने आरोपियों की आय की गणना को लेकर बड़ी गलती कर दी थी। कोर्ट के अनुसार हाईकोर्ट जज सीआर कुमार स्वामी ने अपने फैसले में आरोपियों के कुल 10 कर्जों की गणना करते हुए कर्ज की कुल राशि 24.17 करोड़ पाई थी। जबकि वास्तव में यह राशि मात्र 10.67 करोड़ ही थी।
लोन के इस 13.50 करोड़ के इस अंतर का सीधा फायदा आरोपियों को मिल गया। दरअसल, हाईकोर्ट जज ने इन कर्जों को गलती से आरोपियों की मूल संपति का हिस्सा मान लिया।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पकड़ी गई गलती
इसका असर ये हुआ कि कोर्ट ने अपने फैसले में जयललिता की आय से अधिक संपति मात्र 2.82 करोड़ रुपये ही बताई जबकि वास्तव में यह 16.34 करोड़ रुपये थी। ऐसे में कुल आय के दस फीसदी से कम आय से अधिक संपति होने के आधार पर कोर्ट ने जयललिता को बरी कर दिया।
इसके अलावा कोर्ट ने जयललिता द्वारा अपने जन्मदिन पर स्वीकार किए गए 2.15 करोड़ रुपये मूल्य की नकदी और तोहफों को भी कानूनी आय नहीं माना, जिसकी दलील जयललिता शुरू से ही देती रही थीं।
कोर्ट ने जन्मदिन पर तोहफे के रूप में ही विदेश से ली गई 77.52 लाख रुपये की रकम को भी कानूनी आय मानने की दलील को खारिज कर दिया। कोर्ट ने अपने फैसले में विशेष अदालत के फैसले को पूरी तरह सही मानते हुए जयललिता की याचिका को खारिज कर दिया। इसके चलते जयललिता के साथ आरोपी बनाई गई शशिकला को भी 4 साल कैद और 10 करोड़ जुर्माने की सजा सुनाई गई।