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शांति रखने के लिए पुलिस के कामकाज पर सरकार का विश्वास जरूरी : सुप्रीम कोर्ट
Fri, 30 Oct 2020 01:29 AM IST
Kuldeep Singh
एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली
Published by: Kuldeep Singh
Updated Fri, 30 Oct 2020 01:29 AM IST
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supreme court
- फोटो : पीटीआई
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सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को कहा कि पुलिस में तैनात होने वालों के आचरण पर शासन का विश्वास कानून-व्यवस्था बनाए रखने के कर्तव्य में समाहित है। इसके साथ शीर्ष अदालत ने हत्या के आरोप में मुकदमे का सामना करने वाले और बाद में बरी होने वाले कांस्टेबल को बहाल करने का राजस्थान हाईकोर्ट का आदेश खारिज कर दिया।
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हत्या का आरोप झेल चुके पुलिसकर्मी की बहाली का आदेश खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, आपराधिक मुकदमे में बरी होने से कांस्टेबल के खिलाफ कदाचार के गंभीर आरोप की अनुशासनात्मक कार्रवाई समाप्त नहीं होती। इसमें उसे सेवा से बर्खास्त किया गया है। राजस्थान सरकार की तरफ से हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ दाखिल याचिका पर निर्णय सुनाते हुए जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस इंदिरा बनर्जी की पीठ ने कहा, अनुशासनात्मक जांच उचित संदेह के परे के सबूतों या आपराधिक मुकदमे को संचालित करने वाले साक्ष्य के नियमों के तहत नियंत्रित नहीं होती।
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अनुशासनात्मक कार्यवाही का रिकॉर्ड राज्य के इस तर्क को वैध बनाती है कि ऐसे कर्मचारी को बहाल करने से पुलिस की छवि और जनता के मन में विश्वसनीयता खत्म होगी। शीर्ष कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत मिले विशेष अधिकार का प्रयोग कर फैसला सुनाया। साथ ही हाईकोर्ट का यह निर्देश बरकरार रखा कि कांस्टेबल पिछले भत्तों को पाने के लिए योग्य नहीं माना जाएगा।
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दरअसल, कांस्टेबल हेम सिंह को अगस्त 2002 में हत्या के मामले में आरोपी बनाया गया। आपराधिक ट्रायल के दौरान उसके खिलाफ राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण और अपील) नियमावली 1958 के नियम-16 के के तहत अनुशासनात्मक जांच शुरू हुई। सत्र न्यायालय ने उसे और सह-अभियुक्त को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। अनुशासनात्मक जांच में उसके खिलाफ आरोप सही पाया गया और उसे पुलिस सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। लेकिन पिछले साल अप्रैल में राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने उसे बहाल करने का आदेश जारी कर दिया था।