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अब सीबीआई करेगी बुलंदशहर रेप कांड की जांच

Sat, 13 Aug 2016 03:36 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, इलाहाबाद
ब्यूरो/ अमर उजाला, इलाहाबाद Updated Sat, 13 Aug 2016 03:36 AM IST
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The CBI will now probe the rape Bulandshahr
बुलंदशहर गैंगरेप - फोटो : अमर उजाला

बुलंदशहर रेप कांड की जांच में पुलिस की लीपापोती से क्षुब्ध हाईकोर्ट ने जांच सीबीआई को सौंप दी है। एनएच-91 पर हुई अन्य चार घटनाओं की कोर्ट मॉनिटरिंग करती रहेगी। इसके लिए 17 अगस्त की तिथि नियत की गई है।

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इस दिन अन्य घटनाओं से संबंधित दस्तावेज, रिकार्ड और जांच की प्रगति उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। प्रदेश सरकार की ओर से अदालत को प्रगति की जानकारी देने और समय की मांग को नकारते हुए मुख्य न्यायमूर्ति दिलीप बी भोसले और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की पीठ ने साफ किया कि वह पहले ही सरकार को काफी समय दे चुके हैं।
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रेप जैसे गंभीर और संवेदनशील मामले की जांच में और ज्यादा देर नहीं की जा सकती है। घटना पर स्वत: संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने आठ अगस्त से इस मामले की सुनवाई प्रारंभ की।
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लगातार चार दिनों तक सुनवाई के बाद बुलंदशहर पुलिस इस मामले से जुड़े अहम दस्तावेज पीड़ितों का बयान, मेडिकल रिपोर्ट, प्राथमिकी आदि उपलब्ध नहीं करा सकी।

इससे नाराज पीठ ने कहा कि हमें इस मामले को लेकर सरकार की नीयत पर संदेह है। चार तारीखों पर सरकार की ओर से एक भी स्टेटमेंट या रिकार्ड नहीं दिया जा सका है और जो रिकार्ड दिए गए हैं उनमें कुछ भी नहीं है।

कोर्ट ने सुनवाई के दौरान एनएच 91 पर सात मई, 12 मई, 10 जुलाई, 30 जुलाई और नौ अगस्त की घटनाओं का संज्ञान लिया। पूछा कि क्या इन घटनाओं की प्राथमिकी तत्काल दर्ज कर ली गई थी। जांच की प्रगति क्या है। कितने लोगों को गिरफ्तार किया गया।

लूट की घटना चोरी में हुई दर्ज
अपर महाधिवक्ता इमरान उल्लाह ने कोर्ट को बताया कि सात मई को लूट की वारदात हुई थी जबकि प्राथमिकी से पता चला कि घटना चोरी की धाराओं में दर्ज की गई है।

इसी प्रकार से नौ जुलाई को चलती वैन से खींचकर रेप करने की घटना में प्राथमिकी मारपीट की धाराओें में दर्ज हुई। कोर्ट को यह भी बताया कि 10 जुलाई की घटना में प्राथमिकी एक दिन पूर्व 11 अगस्त को दर्ज कर ली गई है।

सात मई, 10 जुलाई और 30 जुलाई की घटनाओं में ‘मोडस ऑपरेंडी’ (अपराध करने का तरीका) एक जैसा रहा है हालांकि रेप सिर्फ 30 जुलाई की घटना में हुआ था।

पहली घटना पर गंभीर होते तो नहीं होता रेपकांड

The CBI will now probe the rape Bulandshahr
बुलंदशहर गैंगरेप - फोटो : अमर उजाला

पहली घटना पर गंभीर होते तो नहीं होता रेपकांड
कोर्ट ने विवेचना की स्थिति पर तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर पुलिस सात मई की घटना पर गंभीर हुई होती तो 30 जुलाई को मां-बेटी से हुई दुराचार की घटना को रोका जा सकता था।

आप समझ सकते हैं कि यह कितनी गंभीर बात है, पीड़ित मासूम बच्ची है जो पूरी उम्र इस हादसे से उबर नहीं पाएगी। पुलिस गंभीर घटनाओं को हल्की धाराओं में दर्ज करके खानापूरी कर रही है।

क्या इस तरह आप कानून-व्यवस्था पर नियंत्रण कर सकेंगे। जब पुलिस को घटनाओं की जानकारी थी तो आपने दोषी पुलिस वालों पर क्या कार्रवाई की।

अपरमहाधिवक्ता ने बताया कि हम इस मामले में दोषी पुलिसवालों पर सख्त कार्रवाई करेंगे। कोर्ट ने कहा कि सवाल इसका नहीं है अब आप क्या करेंगे, यदि सरकार इतनी ही गंभीर है तो पिछले चार दिनों में कार्रवाई क्यों नहीं कर दी।

जांच के तरीके पर गंभीर सवाल
कोर्ट ने विवेचना करने के यूपी पुलिस के तरीके पर गंभीर सवाल उठाया है। पूछा कि क्या गिरफ्तार अभियुक्तों का मेडिकल परीक्षण कराया गया है। बताया गया कि अब तक मेडिकल नहीं कराया गया है।

पुलिस जल्दी ही अभियुक्तों की कस्टडी मांगेगी। इस पर कोर्ट ने सवाल उठाते हुए कहा कि यूपी में यह कैसी व्यवस्था है। अभियुक्त को गिरफ्तारी के बाद तत्काल न्यायिक अभिरक्षा में क्यों जेल भेज दिया जाता है।

पुलिस अदालत से अभियुक्त की अभिरक्षा क्यों नहीं मांगती है। वह न्यायिक अभिरक्षा का विरोध क्यों नहीं करती है। क्या आप को नहीं पता है कि ऐसा करने की आवश्यकता नहीं है।

घटना के 13 दिन बाद भी अभियुक्तों का मेडिकल नहीं कराया गया जबकि रेप के मामले में अभियुक्त का मेडिकल टेस्ट उतना ही जरूरी है जितना पीड़िता का।

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