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आतंकवाद और हिंदू-मुस्लिम मुद्दे पर वोटों के ध्रुवीकरण की कोशिश हो रही: जमीयत उलेमा-ए-हिंद

Tue, 16 Apr 2019 08:00 PM IST
अमर शर्मा अमित शर्मा, नई दिल्ली
अमित शर्मा, नई दिल्ली Published by: अमर शर्मा Updated Tue, 16 Apr 2019 08:00 PM IST
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Terrorism and Hindu-Muslim issues Trying to polarize votes: Jamiat Ulema-e-Hind
मौलाना सैयद अरशद मदनी
लोकसभा चुनाव 2019 में मुस्लिम धार्मिक नेता बहुत शांत हैं। चुनाव में किसी एक राजनीतिक दल को समर्थन देने वाले मुस्लिम धर्मगुरु भी इस बार किसी का समर्थन करने से कतरा रहे हैं। ऐसा क्यों है और इस चुप्पी का अर्थ क्या है? मुस्लिम समाज में इस समय चल रही हलचल को समझने के लिए विशेष संवाददाता अमित शर्मा ने मुस्लिमों के शीर्ष संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना सैयद अरशद मदनी से मुलाकात की और विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। पेश है बातचीत के प्रमुख अंश।
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सवाल : मौलाना साहब, लोकसभा चुनाव चल रहा है, लेकिन पहले की तरह इस बार मुस्लिम धर्मगुरुओं ने किसी पार्टी विशेष के लिए वोट करने की बात अब तक नहीं की है? आप क्या अपील करेंगे?
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जवाब : माफ कीजियेगा, मैं चुनाव पर कोई टिप्पणी नहीं करूंगा।

सवाल : इस चुप्पी का क्या कारण है? कहीं इससे दूसरे वर्ग के भी ध्रुवीकरण होने की आशंका तो नहीं है?

जवाब : चुनाव के दौरान की गई बातों का अक्सर गलत अर्थों में इस्तेमाल कर लिया जाता है। ऐसा मेरे साथ हुआ है, इसीलिए मैंने आपसे कह दिया कि मैं चुनाव पर कोई टिप्पणी नहीं करूंगा। 
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सवाल : मायावती जी ने एक धर्म विशेष के लोगों से यह अपील की है कि वो अपने वोट बंटने न दें। आप क्या कहेंगे?

जवाब : ये तो वही जाने जिसने अपील की है। किसी दूसरे की अपील पर मैं क्या टिप्पणी करूं। 

सवाल : आप मुस्लिम जमात के बड़े नेता हैं। आपके करोड़ों मानने वाले हैं। उस जमात से आप कोई अपील नहीं करेंगे? 

जवाब : मैं सिर्फ मुस्लिम जमात से ही नहीं, पूरे हिन्दुस्तान से यह अपील करना चाहता हूं कि वे अपने मताधिकार का प्रयोग करें। यह उनका अधिकार है जो देश बदलने की क्षमता रखता है। वे जिस भी उम्मीदवार को बेहतर समझें, उसे वोट दें जिससे यह देश सुंदर बन सके। मैं इतना ही अपील करूंगा कि वो वोट जरूर करें। 

चुनाव के पहले ‘हिन्दू आतंकवाद’ जैसे शब्दों पर खूब राजनीति हुई...

Terrorism and Hindu-Muslim issues Trying to polarize votes: Jamiat Ulema-e-Hind
मौलाना सैय्यद अरशद मदनी - फोटो : अमर उजाला
सवाल : चुनाव के पहले ‘हिन्दू आतंकवाद’ जैसे शब्दों पर खूब राजनीति हुई। आप क्या कहेंगे?

जवाब : इस पर एक सियासी दल के नेता ने कहा है कि हिन्दू कभी आतंकी नहीं हो सकते। इसका क्या मतलब है? क्या कुछ ऐसे लोगों के घरों से बम-पिस्तौल बरामद नहीं हुए जो कि हिन्दू थे? आतंक के नाम पर किसी एक कौम को बदनाम करने की कोशिश क्यों की जाती है?

दूसरी ज्यादा अहम बात, इसी जमीन पर हिन्दू-मुस्लिम एक साथ हजारों सालों से प्यार-मोहब्बत से साथ रहते आये हैं। कभी कोई धार्मिक उन्माद नहीं हुआ। फिर ये पिछले सौ सालों से ही हिन्दू-मुस्लिम के बीच उन्माद पैदा करने की कोशिश क्यों हुई? 

सवाल : आप कहना चाहते हैं कि सियासी फायदे के लिए हिन्दू-मुस्लिम की राजनीति शुरू की गई?

जवाब : मैं कुछ नहीं कहना चाहता। दुनिया जानती है कि सच क्या है? हां, मैं अपनी तरफ से इतना ही कहूंगा कि हिन्दू-मुस्लिम एक साथ पास पड़ोस में रहते आये हैं। एक दूसरे के दुःख-तकलीफ में एक दूसरे का साथ देते आये हैं। हिन्दुओं और मुस्लिमों के बीच कभी कोई भेद नहीं रहा है। 

सवाल : लेकिन इस बात से तो इनकार नहीं किया जा सकता है कि आतंकवाद पूरी दुनिया के सामने बड़ा खतरा बनकर उभरा है। इस पर आपका क्या कहना है?

जवाब : पूरी दुनिया में आतंकवाद जैसी कहीं कोई चीज नहीं है। यह सिर्फ इस्लाम को बदनाम करने की साजिश है। चूंकि अमेरिका-यूरोप सहित पूरी दुनिया में इस्लाम फैल रहा है और वे किसी और तरीके से हमें रोक नहीं पा रहे हैं, इसलिए उनके सामने केवल एक ही रास्ता बचा है कि वे इस्लाम को पूरी दुनिया के सामने बदनाम कर दें। वे इसी कोशिश में लगे हैं। 

सवाल : ईराक और सीरिया....

जवाब : (बीच में ही रोकते हुए) कहीं कोई आतंक नहीं है। यह उनके हक की लड़ाई थी। आपके घर पर कोई हमला करेगा तो क्या आप अपने बचाव में हमला नहीं करेंगे।

सवाल : पाकिस्तान का मुद्दा इस चुनाव में खूब उभरा है। उस पर आप क्या कहेंगे?

जवाब : यह पूरी तरह जमीनी मसला है। इसका सियासी लाभ किसी को देने की कोई जरूरत नहीं है। जब तक कश्मीर की बात सुलझ नहीं जाती, भारत-पाकिस्तान के संबंध कभी सुधर नहीं सकते। मेरा सिर्फ इतना ही कहना है कि हमें कश्मीर के साथ कश्मीरियों को अपनाना होगा। उनका दिल जीतना होगा। इसका समाधान गोली से नहीं, प्यार से निकलेगा। इसी की कोशिश की जानी चाहिए।
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