नई शिक्षा नीति पर बोले सीएम पलानीस्वामी, तमिलनाडु में लागू नहीं होंने देंगे 3-भाषा फॉर्मूला
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केंद्र की नई शिक्षा नीति को लेकर तमिलना़डु के मुख्यमंत्री के पलानीस्वामी ने कड़ा फैसला किया है। मुख्यमंत्री पलानीस्वामी ने अपने राज्य में तीन भाषा फॉर्मूले को लागू नहीं करने का एलान किया है। पलानीस्वामी ने दिवंगत मुख्यमंत्रियों अन्ना दुराई, एमजीआर और जयललिता की ओर से हिंदी के विरोध को सूचीबद्ध किया है।
We are saddened by the 3 language policy introduced by the central government in National Education Policy (NEP) 2020. Our state is already following 2 language policy since decades & there will be no changes in it: Tamil Nadu Chief Minister Edappadi K Palaniswami (file pic) pic.twitter.com/jZ5RBG2NYJ
मुख्यमंत्री पलानीस्वामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है कि वो इस योजना पर दोबारा विचार करें। पलानीस्वामी ने एक बयान में कहा कि तीन भाषा फॉर्मूला दर्दनाक और दुखद है। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में पहले दो भाषा का प्रावधान है और इसमें कोई बदलाव नहीं होगा। मैं प्रधानमंत्री मोदी से अपील करता हूं कि इस फैसले पर दोबारा विचार किया जाए। राज्यों को उनकी नीति के अनुसार इसे लागू करने की स्वतंत्रता मिले।
मुख्यमंत्री ने साल 1965 में तमिलनाडु के छात्रों की ओर से किए गए हिंदी विरोधी आंदोलन का भी संदर्भ रखा। उस समय कांग्रेस ने हिंदी को देश की आधिकारिक भाषा बनाने का प्रस्ताव रखा था। हालांकि तीन भाषायी योजना में राज्य के ऊपर निर्भर करता है कि वो किन भाषाओं को इसमें शामिल करेगा लेकिन तमिलनाडु इसे केंद्र की ओर से हिंदी थोपने के तीखे प्रयास के तौर पर देख रहा है।
शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियालय निशंक ने एक ट्वीट में इस बात की सफाई दी थी कि केंद्र की ओर से किसी भी राज्य पर किसी भी भाषा को नहीं थोपा जाएगा। शिक्षा मंत्री निशंक ने कहा कि वो तमिलनाडु में नई शिक्षा नीति को लागू करने के लिए पूर्व केंद्रीय मंत्री के मार्गदर्शन का इंतजार कर रहे हैं।
इससे पहले एमके के नेतृत्व वाली डीएमके पार्टी और कई विपक्षी पार्टी नई शिक्षा नीति का विरोध कर चुकी हैं और इसके प्रस्ताव पर एक बार और विचार करने के लिए कह रही हैं। शनिवार को डीएमके प्रमुख ने कहा कि इस नीति के जरिए गैर हिंदी राज्यों में गैर-कानूनी तौर पर हिंदी और संस्कृत भाषा को थोपने का काम किया जा रहा है।
डीएमके नेता ने कहा कि यह नए बदलाव किसी नई शिक्षा नीति के लिए नहीं बल्कि, पुरानी दमनकारी मनुस्मृति पर चमकदार कोट है।