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तमिलनाडु: केंद्र सरकार भाषायी अल्पसंख्यकों की करें पहचान, शिक्षण संस्थान चलाने की मिले अनुमति
Mon, 26 Jul 2021 08:55 AM IST
Kuldeep Singh
एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली
Published by: Kuldeep Singh
Updated Mon, 26 Jul 2021 08:55 AM IST
सार
- पंजाब व मिजोरम सहित 10 राज्य में हिंदूओं को अल्पसंख्यक होने के नाते दिए जाएं तय लाभ
- अनुच्छेद-30 धर्म के साथ-साथ भाषाई अल्पसंख्यक के अधिकारों का करता है संरक्षण
- धर्म के साथ भाषायी अल्पसंख्यकों की पहचान भी करता है संविधान
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Supreme Court
- फोटो : ANI
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विस्तार
तमिलनाडु के एक शिक्षा संगठन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके केंद्र सरकार को भाषायी अल्पसंख्यकों की पहचान करने के निर्देश देने की मांग की है। उनकी यह पहचान धार्मिक अल्पसंख्यकों की तरह ही करवाने का निवेदन किया गया है। ताकि उन्हें भी अपने शिक्षण संस्थान चलाने के लिए सरकार से अनुदान व लाभ मिल सके।
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याचिका में कहा- 10 राज्यों में हिंदू अल्पसंख्यक, दिए जाएं लाभ
याची ने कहा, पंजाब व मिजोरम सहित 10 राज्य में हिंदूओं को अल्पसंख्यक होने के नाते तय लाभ दिए जाने चाहिए। मुस्लिम सिख या ईसाई धर्म की तरह उन्हें शिक्षण संस्थान चलाने के लिए सरकारी लाभ नहीं दिए जाते। यह संगठन सिटीजंस एजुकेशन सोसायटी तमिलनाडु और कर्नाटक में अल्पसंख्यक मलयालम भाषी विद्यार्थियों के लिए स्कूल चलाता है। भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय की याचिका पर पिछले वर्ष सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को पक्ष रखने को कहा था।
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धर्म के साथ भाषायी अल्पसंख्यकों की पहचान भी करता है संविधान
याचिका में कहा गया है तमिलनाडु और कर्नाटक में मलयालम अल्पसंख्यक भाषा है। उसे धार्मिक अल्पसंख्यकों की तरह इन राज्य में सरकारी लाभ व अनुदान दिए जाने चाहिए। संविधान का अनुच्छेद-30 धर्म के साथ-साथ भाषाई अल्पसंख्यक के अधिकारों का संरक्षण करता है। इसी अनुच्छेद के तहत अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान अधिनियम 2004 बनाया गया था। केंद्र ने जनवरी 2005 से मुसलमान, ईसाई, सिख, बौद्ध और पारसियों को इस अधिनियम के तहत अल्पसंख्यक माना, पर अब तक भाषाय़ी अल्पसंख्यकों की पहचान नहीं करवाई।
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नदियों, जलाशयों का संरक्षण राज्य का मौलिक कर्तव्य : केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने कहा कि नदियों और दूसरे जल संसाधनों का संरक्षण राज्य के साथ-साथ संबंधित स्थानीय निकायों का मौलिक कर्तव्य जिनके साथ में निहित है। अदालत ने यह टिप्पणी केरल सरकार और कोट्टायम की तीन नगर पालिकाओं को मीनाचिल नदी के पानी की शुद्धता बनाए रखने और नदी किनारे किए गए अतिक्रमण को हटाने का निर्देश दिया। साथी ही मुख्य न्यायाधीश एस मणिकुमार और जस्टिस शाजी पे चेली की पीठ ने राज्य और अन्य निकायों को 3 महीने में एक बार नदियों व जलाशयों का निरीक्षण करने और कोट्टायम के जिलाधिकारी को रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया।