Air Pollution: NGT का निर्दश- AQI में सुधार के लिए तत्काल उपाय करें राज्य, कार्रवाई रिपोर्ट पेश करें
Air Pollution: एनजीटी ने कहा कि राज्य प्राधिकारियों और संबंधित मुख्य सचिवों को अपने दृष्टिकोण की समीक्षा करने और पर्याप्त उपायों के साथ आने की आवश्यकता है ताकि शहरों में वायु गुणवत्ता में सुधार हो सके।
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राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने पाया है कि जिन राज्यों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) खराब हुआ है, उन्होंने तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई करने के उसके पहले के निर्देश का पूरी तरह पालन नहीं किया। इन राज्यों में प्रदूषण की स्थिति में कोई महत्वपूर्ण सुधार न दिखने पर असंतोष व्यक्त करते हुए अधिकरण ने संबंधित अधिकारियों को अपने दृष्टिकोण की समीक्षा करने, वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए पर्याप्त उपाय करने और आगे की कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
अधिकरण ने इससे पहले केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के ऑनलाइन वायु गुणवत्ता बुलेटिन पर संज्ञान लेते हुए दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, बिहार और झारखंड सहित कई राज्यों के मुख्य सचिवों को नोटिस जारी किया था। अधिकरण ने कहा था कि इन राज्यों के कुछ शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 'गंभीर', 'बहुत खराब' और 'खराब' दर्ज किया गया।
वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) में शून्य से 50 अंक तक हवा की गुणवत्ता को 'अच्छा', 51 से 100 तक 'संतोषजनक', 101 से 200 तक 'मध्यम', 201 से 300 के स्तर को 'खराब', 301 से 400 के स्तर को 'बहुत खराब', 401 से 450 के स्तर को 'गंभीर' और 450 से अधिक के स्तर को 'गंभीर प्लस' श्रेणी में रखा जाता है। एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव की पीठ ने तीन से नौ नवंबर के दौरान एक्यूआई का जिक्र किया और कहा, 'संबंधित अधिकारी कहीं न कहीं वांछित प्रयास करने में नाकाम रहे हैं जिससे वायु गुणवत्ता में सुधार हो सके।'
पीठ ने विभिन्न राज्य प्राधिकरणों द्वारा दायर रिपोर्टों पर गौर करते हुए कहा, हमने पाया कि इन रिपोर्ट में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए ज्यादातर दीर्घकालिक कार्य योजनाओं का जिक्र किया गया है, लेकिन तत्काल उपचारात्मक कार्रवाई करने के लिए अधिकरण के निर्देश का पूरी तरह से पालन नहीं किया गया है।' पीठ में न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और विशेषज्ञ सदस्य ए सेंथिल वेल भी शामिल थे।
एनजीटी ने कहा कि राज्य प्राधिकारियों और संबंधित मुख्य सचिवों को अपने दृष्टिकोण की समीक्षा करने और पर्याप्त उपायों के साथ आने की आवश्यकता है ताकि शहरों में वायु गुणवत्ता में सुधार हो सके। पीठ ने कहा कि इसके लिए वायु गुणवत्ता में गिरावट लाने वाले प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों की पहचान करने और इसे नियंत्रित करने के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत हो सकती है। अधिकरण ने हाल के एक आदेश में कहा था कि संबंधित अधिकारियों को इस मुद्दे पर पूरी गंभीरता से विचार करने की जरूरत है क्योंकि वायु गुणवत्ता में गिरावट से लोगों, खासकर शिशुओं और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
एनजीटी ने कहा, 'इसलिए हम उन सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को निर्देश देते हैं जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में गिरावट आई है या यह लगातार गंभीर बना हुआ है, बहुत खराब और खराब है, वे सभी संभव तत्काल सुधारात्मक उपाय करें और यह सुनिश्चित करें कि उन शहरों में वायु गुणवत्ता में सुधार हो।' आगे की कार्रवाई रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश देते हुए अधिकरण ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 23 नवंबर की तारीख तय की।