कीड़ों के हमले से हरे हो रहे ताजमहल पर आई एक और मुसीबत
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यमुना की गंदगी से पनपे कीड़े ने पहले तो ताज की दीवारों को हरे रंग में रंग दिया और अब प्रदूषण की वजह से यह ब्राउन दिखने लगा है। ताजमहल की मीनारों के ऊपरी हिस्से में धूल, कार्बन और बायोमास की मोटी परतें चढ़ चुकी हैं। उत्तर पूर्वी मीनार मडपैक के बाद जहां दूधिया सफेद दिखने लगी है, वहीं बाकी मीनारों पर कालिख जमा है और यह ताज को ब्राउन एंड व्हाइट दिखा रही है।
एएसआई ने कई मिमी मोटी हुई गंदगी की परत के सैंपल लेकर जांच के लिए भेज दिए हैं, वहीं उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की हाल में जारी रिपोर्ट में पूरे सूबे में सबसे ज्यादा वायु प्रदूषण आगरा में पाया गया है। यह गाजियाबाद, साहिबाबाद, नोएडा, कानपुर जैसे औद्योगिक क्षेत्रों से कहीं ज्यादा है।
ताजमहल पर कार्बन कणों की मौजूदगी की आईआईटी और एटलांटा यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट के बाद संसदीय कमेटी की सिफारिश पर एएसआई ने ताजमहल पर मडपैक शुरू किया।
उत्तर पूर्व की मीनार पर मडपैक खत्म होने के बाद इसकी खूबसूरती जहां निखर कर सामने आई है, वहीं यह ब्राउन एंड व्हाइट दिखने लगा है। बाकी तीनों मीनारों और मुख्य गुंबद पर प्रदूषण का असर साफ नजर आने लगा है। ताज आने वाले पर्यटक सफेद और पीली मीनारों के साथ फोटो खिंचवाकर इसे सोशल मीडिया पर अपलोड कर रहे हैं।
मीनार के ऊपरी हिस्से पर कालिख ज्यादा
ताज की मीनारों के छज्जों पर धूल, मिट्टी, कार्बन कणों और बायोमास की मोटी परत जमा हो चुकी है। कई मिमी मोटी परत के कई सैंपल लेकर एएसआई केमिकल ब्रांच इसकी जांच करा रही है। आईआईटी कानपुर के साथ मिलकर एएसआई की केमिकल ब्रांच ताज पर प्रदूषणकारी तत्वों का ब्योरा जुटाएगी। दिशा और निश्चित ऊंचाई पर किस तरह के प्रदूषण का असर ताज पर हो रहा है, यह पड़ताल की जाएगी।
पूरे यूपी में सबसे ज्यादा प्रदूषण आगरा में
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने मार्च में प्रदूषण का इंडेक्स जारी किया है। इसमें आवासीय, व्यावसायिक और संवेदनशील क्षेत्रों में आगरा पूरे प्रदेश में सबसे ज्यादा प्रदूषित शहर है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दो केंद्रों बोदला और नुनिहाई में प्रदूषण की जांच की गई। इसमें बोदला में पीएम-10 की मात्रा 221.2 माइक्रोग्राम प्रति घटमीटर निकली, वहीं नुनिहाई में यह सबसे ज्यादा 308.9 माइक्रोग्राम रही।
हैरतअंगेज पहलू ये है कि औद्योगिक क्षेत्रों के मुकाबले आगरा में ज्यादा प्रदूषण निकला। हापुड़ में जिंदल पाइप के पास एसपीएम की मात्रा 275 है। इसी तरह कानपुर के पनकी साइट में 249, गजरौला में 207, गाजियाबाद के साहिबाबाद में 283, बनारस में बीएचयू में 305, नोएडा में 196, फीरोजाबाद में 251, इलाहाबाद में अलोपीबाग में 300 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर की मात्रा दर्ज की गई। ताजमहल के शहर में पूरे प्रदेश के मुकाबले ज्यादा प्रदूषण है, जबकि आगरा में प्रदूषण रोकने के लिए ही सुप्रीम कोर्ट ने कई आदेश कर रखे हैं, लेकिन आगरा के अफसर इनका अनुपालन ही नहीं कर रहे।