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सुप्रीम कोर्ट को यूपी सरकार का सुझाव, ताजमहल और आसपास के इलाके हों प्लास्टिक मुक्त
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 25 Jul 2018 01:29 AM IST
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उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पेश किए दृष्टि पत्र में कहा है कि ताजमहल और उसके आसपास के इलाके को प्लास्टिक मुक्त क्षेत्र घोषित किया जाना चाहिए। साथ ही क्षेत्र में प्रदूषण फैलाने वाली सभी औद्योगिक इकाइयां बंद करने का सुझाव भी दिया। सुप्रीम कोर्ट 31 जुलाई से इस मामले की रोजाना सुनवाई करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने 11 जुलाई को दुनिया के सात अजूबों में शामिल 17वीं शताब्दी के स्मारक की अनदेखी पर यूपी सरकार की फटकार लगाई थी।
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जस्टिस मदन बी. लोकुर और दीपक गुप्ता की पीठ के समक्ष उत्तर प्रदेश सरकार की वकील ऐश्वर्या भाटी ने ताजमहल के संरक्षण से जुड़े दृष्टि पत्र पेश करने की अनुमति मांगी। अनुमति मिलने के बाद मसौदा दाखिल किया गया। यूपी सरकार ने सुझाव दिया है कि ताजमहल परिसर में पानी की बोतलों पर भी प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। साथ ही अधिक से अधिक पर्यटक केंद्रों बनाने का भी सुझाव दिया है। दृष्टि पत्र में कहा गया है कि ताजमहल के आसपास पैदल आवागमन को प्रोत्साहित करने के लिये यातायात प्रबंधन योजना की जरूरत है।
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यमुना के सामने सड़कें बनाने का दिया सुझाव
यातायात नियंत्रण और पैदल आवागमन बढ़ाने के लिए यमुना नदी के सामने सड़कें बनाने का सुझाव दिया है। सरकार के मुताबिक, यमुना नदी के मैदानी क्षेत्र में किसी प्रकार के निर्माण की अनुमति नहीं होनी चाहिए। नदी तट पर स्वाभाविक रूप से पौधों को निकलने और बढ़ने देना चाहिए। शीर्ष अदालत दो दशक से भी अधिक समय से ताजमहल के संरक्षण के लिए इसके आसपास के इलाकों में विकास कार्यों की निगरानी कर रही है।
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31 जुलाई से रोजाना सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट
केंद्र ने शीर्ष अदालत को बताया था कि आईआईटी, कानपुर ताजमहल और ताज ट्राइपेजियम जोन में वायु प्रदूषण का आकलन कर रहा है। संस्थान चार महीने में रिपोर्ट सौंप देगा। ताज ट्राइपेजियम जोन 10,400 वर्ग किमी का है। इसके तहत आगरा, फिरोजाबाद, मथुरा, हाथरस व एटा और राजस्थान का भरतपुर आता है।
ताजमहल को एफिल टावर से सुंदर बताया था
यूनेस्को ने बेगम मुमताज महल की याद में मुगल शहंशाह शाहजहां द्वारा 1643 में संगमरमर से बनवाए गए इस स्मारक को विश्व धरोहर घोषित कर रखा है। शीर्ष अदालत ने हाल में ताजमहल की तुलना पेरिस के एफिल टावर से करते हुए कहा था कि यह स्मारक अधिक खूबसूरत है। हालांकि, इसकी मौजूदा हालत के कारण भारत विदेशी पर्यटक और मुद्रा गंवा रहा है।