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Syrup Case: क्या सच में सिरप से हो रही है बच्चों की मौत, पहले गाम्बिया और अब उज्बेकिस्तान में इसमें क्या हुआ?

Sun, 01 Jan 2023 03:16 PM IST
शिवेंद्र तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Sun, 01 Jan 2023 03:16 PM IST
सार

उज्बेकिस्तान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बीते बुधवार को कहा कि समरकंद में कम से कम 18 बच्चों की कथित तौर पर एक भारतीय कंपनी द्वारा निर्मित खांसी की दवा पीने से मौत हो गई। इससे पहले गाम्बिया में ऐसी ही घटना सामने आई थी।

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Syrup Case: know the truth about deaths in Gambia and Uzbekistan
डॉक-1 मैक्स सिरप केस - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

उज्बेकिस्तान में कथित तौर पर सिरप पीने से बच्चों की मौत के मामला सामने आया है। उज्बेकिस्तान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक समरकंद में कम से कम 18 बच्चों की कथित रूप से भारत-निर्मित सिरप पीने से मौत हो गई। इस मामले में भारतीय दवा निर्माता कंपनी ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया है। ये पहली बार नहीं है जब भारतीय सिरप निर्माता कंपनियों पर ऐसे आरोप लगे हैं इससे पहले गाम्बिया में ऐसी ही घटना सामने आई थी। 
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उज्बेकिस्तान में सिरप की वजह से क्या हुआ है, भारत सरकार ने इस मामले में क्या प्रतिक्रिया दी? गाम्बिया का मामला क्या था? इसपर क्या हुआ? अभी राजनीति क्यों हो रही है? आइये जानते हैं...
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Syrup Case: know the truth about deaths in Gambia and Uzbekistan
मैरियन बायोटेक - फोटो : सोशल मीडिया
उज्बेकिस्तान का ताजा मामला क्या है?
उज्बेकिस्तान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बीते बुधवार को कहा कि समरकंद में कम से कम 18 बच्चों की कथित तौर पर एक भारतीय कंपनी द्वारा निर्मित खांसी की दवा पीने से मौत हो गई। उज्बेक स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि इन बच्चों ने नोएडा स्थित मैरियन बायोटेक द्वारा निर्मित खांसी के सिरप ‘डॉक-1 मैक्स’ का सेवन किया था।  

मंत्रालय के अनुसार प्रयोगशाला में की गई प्रारंभिक जांच से पता चला है कि डॉक-1 मैक्स सिरप की इस श्रृंखला में विषैला पदार्थ एथिलीन ग्लाइकोल होता है। यह विषैला पदार्थ रोगी के स्वास्थ्य में गंभीर परिवर्तन कर सकता है, जैसे कि उल्टी, बेहोशी, हृदय संबंधी समस्याएं और किडनी फेल्योर। डॉक-1 मैक्स दवा के टैबलेट और सिरप को निर्धारित तरीके से उज्बेकिस्तान की सभी फार्मेसियों में बिक्री से वापस ले लिया गया है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक क्रिमिनल कोड के अनुच्छेद 186-3 (शक्तिशाली पदार्थों वाली दवाओं की खुदरा बिक्री के आदेश का उल्लंघन) के तहत कुरामैक्स मेडिकल और स्टेट सेंटर फॉर एक्सपर्टिस एंड स्टैंडर्डाइजेशन ऑफ मेडिसिन के अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया गया है। साथ ही सात कर्मचारियों पर लापरवाही बरतने के चलते कार्रवाई की गई है। उनपर समय पर बाल मृत्यु दर का विश्लेषण नहीं करने, आवश्यक उपाय नहीं करने एवं अनुशासनात्मक उपाय लागू नहीं करने का आरोप है।

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Aridam Bagchi - फोटो : ANI
भारत सरकार ने क्या प्रतिक्रिया दी?
इस मामले में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने बयान दिया है। उन्होंने कहा कि हमने  18 बच्चों की मौतों के मामले की रिपोर्ट्स देखी हैं। उज्बेकिस्तान सरकार जांच कर रही है कि इस मामले का भारत में बनी कफ सिरप से कनेक्शन है या नहीं?
बागची ने आगे कहा कि वहां मौजूद कंपनी के प्रतिनिधियों के खिलाफ उज्बेकिस्तान की ओर से न्यायिक जांच शुरू कर दी गई है। भारत की ओर से जरूरी न्यायिक सहायता दी जा रही है। वहीं, भारतीय स्वास्थ्य मंत्रालय भी इस मामले को देख रहा है और नोएडा में कंपनी के प्लांट की जांच की जा रही है। 
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भारतीय दूतावास ने जारी किया बयान
इस मामले को लेकर ताश्कंद स्थित भारतीय दूतावास ने भी बयान जारी किया है। बयान में कहा गया है, भारत उज्बेकिस्तान के साथ अपनी साझेदारी और स्वास्थ्य देखभाल और औषधीय दवाओं के क्षेत्र में सहयोग को महत्व देता है। बयान में आगे कहा गया, दूतावास इस घटना के पीड़ितों के परिजनों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता है। दूतावास ने फार्मास्युटिकल उद्योग के विकास के लिए एजेंसी के साथ संपर्क बनाए रखा है। एजेंसी ने अपनी जांच रिपोर्ट भारतीय पक्ष के साथ साझा करने का अनुरोध किया है ताकि भारत में भी आवश्यक कार्रवाई की जा सके। 

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डब्ल्यूएचओ - फोटो : अमर उजाला
डब्ल्यूएचओ का इस मामले में क्या रुख है?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कहा कि वह उज्बेकिस्तान में कफ सिरप के सेवन से 18 बच्चों की मौत मामले में आगे की जांच में सहायता करने के लिए तैयार है। डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि वह उज्बेकिस्तान में स्वास्थ्य अधिकारियों के संपर्क में है।
 

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दवा फैक्टरी के गेट पर चस्पा नोटिस। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
गाम्बिया का मामला क्या था?
उज्बेकिस्तान मामले से पहले अफ्रीकी देश गाम्बिया में जुलाई में अलर्ट जारी किया गया था। वहां, किडनी की समस्या से बच्चे बीमार होने लगे थे। करीब 70 बच्चों की मौत की खबर आई। इन मौतों में एक जैसा पैटर्न सामने आया। जान गंवाने वाले सभी बच्चों की उम्र पांच साल से कम थी।  

गाम्बिया मामले में जांच में क्या आया?
गाम्बिया मामले में जांच के बाद डीसीजीआई ने हाल ही में साफ किया कि जिन बच्चों की मृत्यु कथित तौर पर 'मेड इन इंडिया' सर्दी-खांसी के सिरप लेने के तीन से पांच दिन बाद ये गंभीर हुई थी, उन्होंने सिरप का सेवन नहीं किया। इस बारे में भारतीय एजेंसी ने डब्ल्यूएचओ को भी चिट्ठी लिखी थी।

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संसद का शीतकालीन सत्र - फोटो : Social Media
संसद में भी सरकार ने दी थी जानकारी 
गाम्बिया में कथित तौर पर भारत में निर्मित कफ सिरप से बच्चों की मौत पर सरकार ने संसद में भी जानकारी दी थी। सरकार ने कहा था कि मेडेन फार्मास्यूटिकल्स की खांसी की दवाई के नमूने मानक गुणवत्ता वाले पाए गए हैं। रसायन और उर्वरक राज्य मंत्री भगवंत खुबा ने 13 दिसंबर को राज्यसभा में एक लिखित जवाब में बताया कि केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने राज्य औषधि नियंत्रक के सहयोग से सोनीपत में मेडेन फार्मास्यूटिकल्स की एक संयुक्त जांच की थी।
 

मेडेन फार्मास्यूटिकल के उत्पादों पर लगाया था बैन 
WHO की रिपोर्ट आने के बाद गाम्बिया ने मेडेन फार्मास्यूटिकल के उत्पादों पर बैन लगा दिया गया था। WHO ने सभी देशों को इन दवाओं को बाजार से हटाने के निर्देश जारी किए थे। खुद भी इन देशों और संबंधित क्षेत्र की आपूर्ति शृंखला पर नजर रखने की बात कही थी। WHO की चेतावनी के बाद केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन ने जांच के आदेश जारी कर दिए थे।

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जयराम रमेश - फोटो : PTI
अभी राजनीति क्यों हो रही है?
गाम्बिया और उज्बेकिस्तान मामले में गुरुवार को कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने मोदी सरकार पर तंज कसा। उन्होंने इस मामले को लेकर ट्वीट किया, ‘‘भारत में निर्मित सिरप खतरनाक दिखाई देते हैं। पहले गाम्बिया में 70 बच्चों की मौत हुई और अब उज्बेकिस्तान में 18 बच्चों की मौत हुई। मोदी सरकार को यह डींग हांकना बंद कर देना चाहिए कि भारत दुनिया के लिए औषधालय है। सरकार को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।’’

जयराम रमेश के इस ट्वीट पर भाजपा ने कहा कि कांग्रेस देश को बदनाम करने का कोई मौका नहीं छोड़ती। भाजपा के आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने कहा, ‘‘गाम्बिया में बच्चों की मौत से भारत में निर्मित सिरप का कोई लेनादेना नहीं है। इस बारे में गाम्बिया के प्रशासन और डीसीजीआई दोनों ने स्पष्टीकरण दिया है। लेकिन मोदी के प्रति नफरत में अंधी हो चुकी कांग्रेस भारत एवं उसकी उद्यमी भावना का मजाक बना रही है।’’
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