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राजनाथ बोलेः देश की युद्ध तैयारी के लिए तेजी से और पारदर्शी निर्णय लेने की जरूरत, देरी से समय और धन का नुकसान
Mon, 14 Nov 2022 08:07 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Mon, 14 Nov 2022 08:07 PM IST
सार
राजनाथ ने कहा कि किसी देश की युद्ध की तैयारी के लिए न केवल अधिकतम संसाधनों की उपलब्धता की आवश्यकता होती है, बल्कि तेज और पारदर्शी निर्णय भी लेने होते हैं।
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Defence Ministe Rajnath Singh (file photo)
- फोटो : ANI
विस्तार
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने देश की युद्ध तैयारी के लिए तेजी से और पारदर्शी निर्णय लेने और अधिकतम संसाधनों की उपलब्धता पर जोर दिया। राजनाथ सिंह ने यहां रक्षा लेखा विभाग (डीएडी) द्वारा आयोजित नियंत्रक सम्मेलन 2022 में अपने संबोधन में यह भी कहा कि निर्णय लेने में देरी से समय और धन दोनों का नुकसान होता है और युद्ध की तैयारी प्रभावित होती है। दुनिया भर में संसाधन सीमित हैं। रक्षा मंत्री ने कहा और उनका उपयोग करने में वित्तीय विवेक का प्रयोग करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि संसाधनों का सही जगह पर इस्तेमाल होना चाहिए और बर्बादी नहीं होनी चाहिए।
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बचाया गया एक पैसा कमाया हुआ एक पैसा है...
राजनाथ सिंह ने कहा कि बचाया गया एक पैसा कमाया हुआ एक पैसा है, और यह पूरी तरह से संसाधनों पर भी लागू होता है। आप जानते हैं कि किसी देश की युद्ध की तैयारी के लिए न केवल अधिकतम संसाधनों की उपलब्धता की आवश्यकता होती है, बल्कि तेज और पारदर्शी निर्णय भी लेने होते हैं। रक्षा मंत्री ने कहा कि अगर निर्णय लेने में देरी होती है तो युद्ध की तैयारी में कुछ कमी हो सकती है। डीएडी रक्षा मंत्रालय को आवंटित बजट को संभालता है, जो कर्मियों के वेतन और भत्ते, पेंशनभोगियों को भुगतान, विभिन्न खरीद के लिए वित्तीय सलाह मामलों के प्रसंस्करण और आंतरिक सहित अन्य सहायक गतिविधियों के अलावा प्रथम और तीसरे पक्ष के दावे देखता है।
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केंद्रीय बजट 2022-23 में रक्षा के लिए 5.25 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। सिंह ने कहा कि डीएडी अधिकारियों को यह भी बताना चाहिए कि क्या किसी चीज के लिए अधिक खर्च की आवश्यकता है। मंत्रालय ने बाद में एक बयान में कहा कि बजटीय आवंटन में पेंशन के लिए 1.19 लाख करोड़ रुपये शामिल हैं। बयान में कहा गया है कि सिंह ने डीएडी को सशस्त्र बलों की युद्ध तैयारी को मजबूत करने की कुंजी बताते हुए त्वरित और पारदर्शी निर्णय लेने के माध्यम से वित्तीय संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग सुनिश्चित करने का आह्वान किया।
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ऑडिटर का काम प्रहरी के रूप में कार्य करने का
दो दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन करने के बाद उन्होंने डीएडी के अधिकारियों को रक्षा वित्त व्यवस्था का प्रहरी बताया जो वित्तीय विवेक के साथ आवंटित धन का प्रबंधन कर राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि मुझे विश्वास है कि विभाग वित्तीय विवेक के सिद्धांतों को अपनाकर रक्षा सेवाओं के प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा। हल्के-फुल्के अंदाज में सिंह ने यह भी कहा कि वित्त प्रणाली में एक ऑडिटर का काम प्रहरी के रूप में कार्य करने का होता है, लेकिन कुछ ऑडिटर खूनी शिकारी की तरह व्यवहार करना शुरू कर देते हैं।
उन्होंने जोर देकर कहा कि समय पर वित्तीय सलाह प्रदान करने के लिए डोमेन विशेषज्ञता के साथ क्लाइंट की जरूरतों की संवेदनशील समझ आवश्यक है। सिंह ने उनसे ग्राहकों के साथ बातचीत करते समय खुद को स्थिर रखने के लिए कहा, और इस बात का हवाला दिया कि पानी में रहने के बावजूद कमल कैसे इसे छूता नहीं है। उन्होंने हल्के अंदाज में कहा, अब मैं कमल का नाम ले रहा हूं, किसी को इस पर आपत्ति हो सकती है। रक्षा मंत्री सिंह ने रविवार को कहा था कि कमल सिर्फ एक पार्टी का प्रतीक नहीं है बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा है, साथ ही उन्होंने जी 20 लोगो पर कमल की छवि पर विवाद पैदा करने वालों को फटकार लगाई थी।