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कृषि: 'लागत से 50 फीसदी अधिक MSP अर्थव्यवस्था के लिए घातक'; स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश पर बोली थी UPA सरकार
Thu, 15 Feb 2024 06:37 AM IST
ज्योति भास्कर
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Thu, 15 Feb 2024 06:37 AM IST
सार
स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने संबंधी एक सवाल पर 14 साल पहले यूपीए सरकार ने संसद में जवाब दिया था। तत्कालीन मंत्री ने भाजपा के प्रकाश जावड़ेकर के सवाल पर बताया था कि लागत से 50 फीसदी अधिक न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) देश की अर्थव्यवस्था के लिए खतरनाक है।
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जावड़ेकर, स्वामीनाथन और केवी थॉमस (फाइल)
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
किसान आंदोलन शुरू होने के कारण फसलों के उचित दाम को लेकर सरकार और किसानों के बीच जारी संघर्ष एक बार फिर सुर्खियों में है। कांग्रेस भले ही अब न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर कानूनी गारंटी का समर्थन कर रही है, मगर सत्ता में रहते पार्टी की अगुवाई वाली सरकार ने फसल की लागत से 50 फीसदी अधिक एमएसपी की स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को अर्थव्यवस्था और बाजार के लिए खतरनाक बताया था। तब कृषि राज्यमंत्री केवी थॉमस ने कहा था कि सरकार ने एमएसपी पर आयोग की रिपोर्ट को स्वीकार नहीं किया है।
दरअसल यूपीए-2 के कार्यकाल में तत्कालीन भाजपा सांसद प्रकाश जावड़ेकर ने राज्यसभा में 16 अप्रैल 2010 सरकार से आयोग और उसकी सिफारिशों की स्थिति पर सवाल पूछे थे। उन्होंने जानना चाहा था कि क्या सरकार आयोग की सिफारिशों के अनुरूप किसानों को उसकी फसल लागत से 50 प्रतिशत अधिक राशि एमएसपी के रूप में भुगतान करेगी? इसका जवाब देते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह की सरकार में कृषि राज्यमंत्री थॉमस ने कहा था कि सरकार ने आयोग की एमएसपी से संबंधित रिपोर्ट को स्वीकार नहीं किया है।
बाजार संतुलन बिगड़ने का दिया था तर्क
जावड़ेकर के सवाल के जवाब में थॉमस ने कहा था कि आयोग ने सिफारिश की है कि किसानों के लिए एमएसपी फसल उत्पादन की लागत औसत से कम से कम 50 फीसदी अधिक हो। इसको सरकार ने स्वीकार नहीं किया है। एमएसपी की सिफारिश कृषि लागत और मूल्य आयोग (सीएसीपी) द्वारा वस्तुनिष्ठ व तार्किक मानदंडों पर प्रासंगिक सभी कारकों को ध्यान में रख कर किया जाता है। लागत से 50 फीसदी अधिक कीमत निर्धारित करने से अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ने के साथ ही बाजार विकृत हो सकता है। इससे कई दूसरी परेशानियां भी खड़ी हो सकती हैं।
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अब एमएसपी गारंटी का समर्थन अपने कार्यकाल में फसल की लागत से 50 फीसदी अधिक एमएसपी को अस्वीकार करने के बाद अब कांग्रेस आंदोलनरत किसानों के समर्थन में है। पार्टी के नेता लगातार एमएसपी पर कानूनी गारंटी संबंधी किसानों के मांगों को तार्किक बताते हुए इसका समर्थन कर रहे हैं।
भाजपा के आरोपों को कांग्रेस ने किया खारिज
कांग्रेस ने यूपीए सरकार में स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को खारिज करने के भाजपा के आरोपों को सिरे खारिज कर दिया। कांग्रेस ने कहा, 201 सिफारिशों में 175 को लागू किया था, भाजपा को केवल 26 मांगों को लागू करना था, वह 10 साल में नहीं हुआ। कांग्रेस ने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) मुद्दे पर किसानों को ठगा गया। इसके समर्थन में कांग्रेस ने आंकड़े भी पेश किए।
भारतीय किसान संघ ने कहा, किसानों के नाम पर राजनीतिक तिकड़म बंद हो
नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (आरएसएस) से संबंधित भारतीय किसान संघ (बीकेएस) ने कहा कि वह किसानों के ‘दिल्ली चलो’ मार्च का समर्थन नहीं करता क्योंकि यह ‘राजनीतिक’ है और इसका किसानों के हितों से कोई लेना-देना नहीं है।
बेहतरी के लिए संघर्ष कर रहे किसान भुगतते हैं खामियाजा
बीकेएस महासचिव मोहिनी मोहन मिश्रा ने एक बयान में कहा कि किसानों को लागत के आधार पर उनकी उपज का लाभकारी मूल्य मिलना चाहिए, लेकिन चुनावों को ध्यान में रखते हुए किसानों के नाम पर ‘राजनीतिक तिकड़म’ बंद की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब चुनावों के दौरान ‘राजनीतिक मंशा’ के साथ किसानों के नाम पर आंदोलन किए जाते हैं तो हिंसा, अराजकता और राष्ट्रीय संपत्ति का नुकसान होता है। मिश्रा ने कहा कि इस तरह के आंदोलन किसानों के प्रति ‘नकारात्मक भावनाओं’ को जन्म देते हैं और अपनी बेहतरी के लिए संघर्ष कर रहे किसानों को इसका परिणाम भुगतना पड़ता है।
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दरअसल यूपीए-2 के कार्यकाल में तत्कालीन भाजपा सांसद प्रकाश जावड़ेकर ने राज्यसभा में 16 अप्रैल 2010 सरकार से आयोग और उसकी सिफारिशों की स्थिति पर सवाल पूछे थे। उन्होंने जानना चाहा था कि क्या सरकार आयोग की सिफारिशों के अनुरूप किसानों को उसकी फसल लागत से 50 प्रतिशत अधिक राशि एमएसपी के रूप में भुगतान करेगी? इसका जवाब देते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह की सरकार में कृषि राज्यमंत्री थॉमस ने कहा था कि सरकार ने आयोग की एमएसपी से संबंधित रिपोर्ट को स्वीकार नहीं किया है।
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बाजार संतुलन बिगड़ने का दिया था तर्क
जावड़ेकर के सवाल के जवाब में थॉमस ने कहा था कि आयोग ने सिफारिश की है कि किसानों के लिए एमएसपी फसल उत्पादन की लागत औसत से कम से कम 50 फीसदी अधिक हो। इसको सरकार ने स्वीकार नहीं किया है। एमएसपी की सिफारिश कृषि लागत और मूल्य आयोग (सीएसीपी) द्वारा वस्तुनिष्ठ व तार्किक मानदंडों पर प्रासंगिक सभी कारकों को ध्यान में रख कर किया जाता है। लागत से 50 फीसदी अधिक कीमत निर्धारित करने से अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ने के साथ ही बाजार विकृत हो सकता है। इससे कई दूसरी परेशानियां भी खड़ी हो सकती हैं।
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अब एमएसपी गारंटी का समर्थन अपने कार्यकाल में फसल की लागत से 50 फीसदी अधिक एमएसपी को अस्वीकार करने के बाद अब कांग्रेस आंदोलनरत किसानों के समर्थन में है। पार्टी के नेता लगातार एमएसपी पर कानूनी गारंटी संबंधी किसानों के मांगों को तार्किक बताते हुए इसका समर्थन कर रहे हैं।
भाजपा के आरोपों को कांग्रेस ने किया खारिज
कांग्रेस ने यूपीए सरकार में स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को खारिज करने के भाजपा के आरोपों को सिरे खारिज कर दिया। कांग्रेस ने कहा, 201 सिफारिशों में 175 को लागू किया था, भाजपा को केवल 26 मांगों को लागू करना था, वह 10 साल में नहीं हुआ। कांग्रेस ने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) मुद्दे पर किसानों को ठगा गया। इसके समर्थन में कांग्रेस ने आंकड़े भी पेश किए।
भारतीय किसान संघ ने कहा, किसानों के नाम पर राजनीतिक तिकड़म बंद हो
नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (आरएसएस) से संबंधित भारतीय किसान संघ (बीकेएस) ने कहा कि वह किसानों के ‘दिल्ली चलो’ मार्च का समर्थन नहीं करता क्योंकि यह ‘राजनीतिक’ है और इसका किसानों के हितों से कोई लेना-देना नहीं है।
बेहतरी के लिए संघर्ष कर रहे किसान भुगतते हैं खामियाजा
बीकेएस महासचिव मोहिनी मोहन मिश्रा ने एक बयान में कहा कि किसानों को लागत के आधार पर उनकी उपज का लाभकारी मूल्य मिलना चाहिए, लेकिन चुनावों को ध्यान में रखते हुए किसानों के नाम पर ‘राजनीतिक तिकड़म’ बंद की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब चुनावों के दौरान ‘राजनीतिक मंशा’ के साथ किसानों के नाम पर आंदोलन किए जाते हैं तो हिंसा, अराजकता और राष्ट्रीय संपत्ति का नुकसान होता है। मिश्रा ने कहा कि इस तरह के आंदोलन किसानों के प्रति ‘नकारात्मक भावनाओं’ को जन्म देते हैं और अपनी बेहतरी के लिए संघर्ष कर रहे किसानों को इसका परिणाम भुगतना पड़ता है।