सुषमा का दावा- कूटनीति सूझबूझ से सुलझा लिया दोकलम विवाद, कांग्रेस बोली- देश को गुमराह कर रही सरकार
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दोकमल में चीन सेना की ओर से नए सिरे से घुसपैठ को सिरे से खारिज करते हुए विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने दावा किया कि वहां की पुरानी स्थिति में रत्ती भर भी बदलाव नहीं हुआ है।
लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान विदेश मंत्री ने कहा कि इस विवाद को कूटनीतिक सूझबूझ के जरिए सुलझा लिया गया है। इस दौरान सुषमा ने बीते दिनों पीएम नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई अनौपचारिक शिखर वार्ता में छिपा एजेंडा होने के आरोपों को भी खारिज कर दिया।
विदेश मंत्री ने कहा कि दोकलम में विवाद से पहले वाली स्थिति बहाल कर दी गई है। कूटनीतिक सूझबूझ के जरिए इस विवाद का हल निकाल लिया गया है। विवादित जगह की भौगोलिक स्थिति में न तो कोई बदलाव हुआ है और न ही वहां किसी प्रकार का नया निर्माण ही हुआ है। उन्होंने चीनी सेना के विवादित स्थल में फिर से प्रवेश करने और सिलिगुड़ी तक पहुंचने के दावे को निराधार बताया।
सुषमा ने चीन के वुहान शहर में बीते 27-28 अप्रैल को पीएम मोदी और चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग के बीच हुई अनौपचारिक शिखर वार्ता में छिपे एजेंडे पर चर्चा के आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि यह किसी खास एजेंडे से जुड़ा नहीं था। बैठक सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई और बेहद सफल रही। पीएम मोदी ने राष्ट्रपति जिनपिंग को भारत में इसी तरह की अनौपचारिक शिखर वार्ता का निमंत्रण दिया, जिसे जिनपिंग ने स्वीकार कर लिया।
देश को गुमराह कर रही है मोदी सरकार
वहीं सुषमा के बयान को लेकर कांग्रेस ने नरेंद्र मोदी सरकार पर इस मामले में देश को गुमराह करने का आरोप लगाया।
पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने यह भी दावा किया कि दक्षिणी दोकलम क्षेत्र में चीन की ओर से किये जा रहे सैन्य ढांचे और सड़क के निर्माण पर प्रधानमंत्री मोदी और विदेश मंत्री ने चुप्पी साध ली है।
सुरजेवाला ने एक बयान जारी कर कहा, 'दक्षिणी दोकलम क्षेत्र में चीन की ओर से किये जा रहे सैन्य ढांचे और सड़क के निर्माण पर प्रधानमंत्री मोदी और विदेश मंत्री ने चुप्पी साधे रखी। स्वराज ने दोकलम में भारतीय सैन्य चौकी से महज 10 मीटर की दूरी पर चीन के सैन्य परिसर के निर्माण पर कुछ नहीं कहा।'
उन्होंने कहा, 'प्रधानमंत्री मोदी चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग से ब्रिक्स शिखर बैठक से इतर मिले। चार महीने के भीतर दोनों की तीसरी शिखर स्तरीय बैठक थी। निराशाजनक बात यह है कि मोदी सरकार दोकलम गतिरोध के संदर्भ में आई उन खबरों पर तार्किक प्रतिक्रिया भी नहीं दे सकी जिनमें कहा गया है कि भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता हुआ है और सामरिक हितों के लिये खतरा पैदा हुआ है।'
सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देते हुए सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी की और उत्तरी एवं दक्षिणी दोकलम में चीनी सैन्य निर्माण के बारे में कुछ स्पष्ट नहीं किया।