ओबीसी जातियों की अलग-अलग अनुमानित जनसंख्या जानने के लिए होगा सर्वे
देश भर में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) में शामिल जातियों की अलग-अलग अनुमानित जनसंख्या जानने के लिए व्यापक सर्वे किया जाएगा। केंद्र की सूची में शामिल ओबीसी जातियों के वर्गीकरण के लिए जांच कर रहे सेवानिवृत्त न्यायाधीश जी. रोहिणी की अध्यक्षता वाले पांच सदस्यों के आयोग ने यह निर्णय किया है और इसके लिए सरकार से 200 करोड़ रुपए से अधिक का अलग से बजट मांगा है। इसके लिए केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत को पत्र लिखा गया है।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार जस्टिस रोहिणी ने अपने पत्र में कहा है कि केंद्रीय ओबीसी सूची में करीब 2600 जातियां शामिल हैं। इनमें से कुछ की आबादी काफी कम है लेकिन यह भौगोलिक रूप से काफी फैली हुई है। इसलिए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सभी जिले शामिल करते सर्वे करवाया जाना जरूरी है।
ओबीसी जातियों के वर्गीकरण के लिए उनकी अनुमानित जनसंख्या के साथ प्रत्येक जाति के लोगों के शैक्षणिक स्तर और रोजगार की स्थिति का भी पता लगाया जाएगा। यह सारी जानकारी जुटाने के लिए करीब दस लाख घरों का सर्वे किया जाएगा। गौरतलब है कि इस आयोग का गठन अक्टूबर, 2017 में किया गया था। आयोग को दस सप्ताह में रिपोर्ट देनी थी लेकिन कार्यकाल चार बार बढ़ाकर अब 31 मई 2019 किया जा चुका है
आयोग को यह करना है
- ओबीसी में शामिल जातियों के लिए आरक्षण में असमानता की जांच।
- इस वर्ग की जातियों, उप जातियों और समुदायों की पहचान करना।
- ओबीसी में वर्गीकरण लिए मानदंड तय कर उसका मैकेनिज्म तैयार करना।
अब तक क्या काम किया
- राज्य सरकारों, राज्यों के पिछड़ा वर्ग आयोगों, जातीय संगठनों और आमजन के साथ बैठकें। वर्गीकरण को अंतिम रूप देने से पहले भी राज्य सरकारों और पिछड़ा वर्ग आयोगों से चर्चा होगी।
- उच्च शैक्षणिक संस्थानों, केंद्रीय मंत्रालयों, सार्वजनिक प्रतिष्ठानों और सरकारी बैंकों व वित्तीय संस्थानों से वहां पढ़ रहे, काम कर रहे ओबीसी के लोगों का डाटा जुटाया गया है।