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अनुच्छेद 370 पर जल्द सुनवाई की मांग, सुप्रीम कोर्ट ने कहा करेंगे विचार
Tue, 30 Jul 2019 08:57 PM IST
Trainee Trainee
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Published by: Trainee Trainee
Updated Tue, 30 Jul 2019 08:57 PM IST
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धारा 370
- फोटो : अमर उजाला
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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि वह संविधान केअनुच्छेद-370 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली जनहित याचिकाओं पर जल्द सुनवाई की मांग पर गौर करेगा। मालूम हो कि अनुच्छेद-370 के तहत जम्मू एवं कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा मिला हुआ है।
याचिकाकर्ता भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय ने मंगलवार को जस्टिस डीवी चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष इस मामले का उल्लेख करते हुए जल्द सुनवाई की मांग की। पीठ ने फिलहाल सुनवाई की कोई तारीख तो नहीं दी लेकिन यह जरूर कहा कि वह इस पर विचार करेगी।
इससे पहले गत फरवरी और 10 जुलाई को भी उपाध्याय ने याचिका पर जल्द सुनवाई की गुहार लगाई थी और सुप्रीम कोर्ट ने उस वक्त भी यही बात कही थी। मालूम हो कि अनुच्छेद-370 की वैधता को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दायर की गई हैं। याचिकाओं में कहा गया कि अनुच्छेद-370 अस्थायी प्रावधान था, जो वर्ष 1957 में राज्य की संविधान सभा केभंग होने केसाथ ही समाप्त हो गया।
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सवाल यह है कि 26 जनवरी, 1957 के संविधान सभा केभंग होने के साथ ही अस्थायी प्रावधान खुद व खुद खत्म होना चाहिए या नहीं? याचिकाओं में सवाल उठाया गया है कि अनुच्छेद-370 के अस्थायी प्रावधान को बिना राष्ट्रपति या संसद या केंद्र सरकार की मंजूरी केआगे कैसे जारी रखा जा सकता है? यह संविधान के मूल ढांचे केसाथ धोखा है। साथ ही यह देश की संप्रभूता, अखंडता, एकता के खिलाफ है।
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याचिकाकर्ता भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय ने मंगलवार को जस्टिस डीवी चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष इस मामले का उल्लेख करते हुए जल्द सुनवाई की मांग की। पीठ ने फिलहाल सुनवाई की कोई तारीख तो नहीं दी लेकिन यह जरूर कहा कि वह इस पर विचार करेगी।
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इससे पहले गत फरवरी और 10 जुलाई को भी उपाध्याय ने याचिका पर जल्द सुनवाई की गुहार लगाई थी और सुप्रीम कोर्ट ने उस वक्त भी यही बात कही थी। मालूम हो कि अनुच्छेद-370 की वैधता को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दायर की गई हैं। याचिकाओं में कहा गया कि अनुच्छेद-370 अस्थायी प्रावधान था, जो वर्ष 1957 में राज्य की संविधान सभा केभंग होने केसाथ ही समाप्त हो गया।
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सवाल यह है कि 26 जनवरी, 1957 के संविधान सभा केभंग होने के साथ ही अस्थायी प्रावधान खुद व खुद खत्म होना चाहिए या नहीं? याचिकाओं में सवाल उठाया गया है कि अनुच्छेद-370 के अस्थायी प्रावधान को बिना राष्ट्रपति या संसद या केंद्र सरकार की मंजूरी केआगे कैसे जारी रखा जा सकता है? यह संविधान के मूल ढांचे केसाथ धोखा है। साथ ही यह देश की संप्रभूता, अखंडता, एकता के खिलाफ है।