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सुप्रीम कोर्ट ने विशेषाधिकार का इस्तेमाल कर दंपति को किया अलग

Mon, 02 May 2016 05:37 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 02 May 2016 05:37 AM IST
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Supreme court used their privilege to apart couple
supreme court of india

 सुप्रीम कोर्ट ने अपने संवैधानिक विशेषाधिकार का इस्तेमाल करते हुए एक दंपति को तत्काल तलाक की इजाजत दे दी। एक विरले फैसले में शीर्ष अदालत ने दंपति को समझौते की संभावना के लिए दी जाने वाली छह महीने की अवधि (वेटिंग पीरियड) संबंधी वैधानिक प्रावधानों को खत्म कर दिया। पति-पत्नी शिक्षित थे और आपसी समझौते से तलाक चाहते थे।

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न्यायमूर्ति कुरियन जोसफ और न्यायमूर्ति रोहिंगटन फली नरीमन की पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल करते हुए इस प्रावधान के तहत दिए जाने वाले वेटिंग पीरियड को खत्म कर दिया। पीठ ने पाया कि ऐसा करना पति-पत्नी, दोनों के लिए उचित रहेगा क्योंकि शादी के पहले ही दिन से दोनों में नहीं बन पा रही थी। अदालत ने यह भी देखा कि चूंकि दोनों पढ़े-लिखे हैं और बिना किसी दबाव के अलग होने का फैसला लिया है, इसलिए वे अपने निर्णय के परिणाम के बारे में जानते होंगे।
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इस मामले में पत्नी ने अदालत को बताया था कि वैवाहिक जीवन के खराब अनुभवों से उबरने के लिए वह न्यूयॉर्क जाना चाहती है और वहां अपने जीवन की नई शुरुआत के साथ नौकरी की संभावना तलाशेगी। महिला के अनुसार उसके लिए छह महीने के भीतर या निकट भविष्य में भारत लौटना संभव नहीं है। इस स्थिति को देखते हुए अदालत ने अपने विशेषाधिकार का इस्तेमाल किया और तलाक की स्वीकृति दे दी।

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यह था मामला

Supreme court used their privilege to apart couple
supreme court

एक निजी कंपनी में बतौर सीनियर मैनेजर काम करने वाले रोहित की शादी सात फरवरी 2011 को शिल्पा (दोनों नाम परिवर्तित) के साथ हिंदू रीति-रिवाज से हुई थी। शादी के पहले ही दिन से उनकी आपस में नहीं बनी। संबंध इस कदर बिगड़ गए थे कि शादी के पांच वर्षों में दोनों अधिकांश समय अलग-अलग ही रहे।

आखिरकार उन्होंने अलग होने का फैसला किया। बीती 29 मार्च को उन्होंने दिल्ली की तीसहजारी जिला अदालत में आपसी सहमति से तलाक की अर्जी दाखिल की। चूंकि पत्नी न्यूयॉर्क जाना चाहती थी और उसके निकट भविष्य में स्वदेश लौटने की संभावना कम थी, इसलिए रोहित ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर वेटिंग पीरियड के वैधानिक प्रावधान को खत्म करने की गुहार लगाई थी।

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