फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   supreme court updates cji dy chandrachud inaugurate njma museum ask questions from ai

SC Updates: सीजेआई ने राष्ट्रीय न्यायिक संग्रहालय का किया उद्घाटन, एआई का जवाब सुनकर हुए खुश

Thu, 07 Nov 2024 02:12 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नितिन गौतम Updated Thu, 07 Nov 2024 02:12 PM IST
सार

संग्रहालय के उद्घाटन के अवसर पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि 'इस संग्रहालय को बनाने की योजना में एक साल का समय लगा, जबकि सब कुछ तय हो जाने के बाद इसके निर्माण में छह महीने से कुछ ज्यादा का समय लगा। 

विज्ञापन
supreme court updates cji dy chandrachud inaugurate njma museum ask questions from ai
Supreme Court - फोटो : ANI

विस्तार

देश के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट परिसर में नेशनल ज्यूडिशियल म्यूजियम एंड आर्काइव संग्रहालय का उद्घाटन किया। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न जज भी मौजूद रहे। इस दौरान मुख्य न्यायाधीश ने म्यूजियम में मौजूद एआई से कुछ सवाल भी किए। सीजेआई ने एआई से पूछा कि क्या भारत में मौत की सजा संवैधानिक है। इस पर एआई ने जब देश में मौत की सजा को संवैधानिक बताते हुए विस्तार से जवाब दिया तो सीजेआई भी एआई के जवाब से खुश नजर आए। 
विज्ञापन


संग्रहालय के उद्घाटन के अवसर पर क्या बोले सीजेआई
संग्रहालय के उद्घाटन के अवसर पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि 'इस संग्रहालय को बनाने की योजना में एक साल का समय लगा, जबकि सब कुछ तय हो जाने के बाद इसके निर्माण में छह महीने से कुछ ज्यादा का समय लगा। हम सिर्फ एक संग्रहालय ही नहीं बनाना चाहते थे, बल्कि हम ऐसा संग्रहालय बनाना चाहते थे, जो वैश्विक स्तर का हो। एक ऐसा संग्रहालय, जो हमारे संस्थानों की अहमियत दर्शाए। अपने सहकर्मियों की तरफ से मुझे इस संग्रहालय को देश को समर्पित करते हुए बेहद खुशी हो रही है और हमें उम्मीद है कि यह संग्रहालय युवा पीढ़ी को काफी कुछ सिखाएगा।'
विज्ञापन

 

एससीबीए के पूर्व अध्यक्ष ने आपत्ति जताई

इस बीच सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने प्रधान न्यायाधीश चंद्रचूड़ को पत्र लिखा है। उन्होंने न्यायाधीश पुस्तकालय को सार्वजनिक संग्रहालय में बदलने के फैसले पर आपत्ति जताई है। एससीबीए के पूर्व अध्यक्ष ने बुधवार को लिखे पत्र में बुनियादी ढांचे से संबंधित निर्णयों पर गहरी पीड़ा व्यक्त की। उनक दावा है कि इसमें विधि क्षेत्र से जुड़े लोगों की महत्वपूर्ण आवश्यकताओं की अनदेखी की गई है।

पेड़ों की कटाई: सुप्रीम कोर्ट ने डीडीए से पूछा रिज क्षेत्र की बहाली के लिए क्या किया गया?

सुप्रीम कोर्ट ने डीडीए से दिल्ली रिज क्षेत्र को बहाल करने के लिए किए गए उपायों के बारे में पूछा। इस क्षेत्र में सौ पेड़ों को अवैध रूप से गिराया गया था। शीर्ष अदालत ने यह भी पूछा कि अधिकारियों ने किस सीमा तक वृक्षारोपण किया।

सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा कि लगाए गए पेड़ जीवित हैं या नहीं यह सुनिश्चित करने के लिए कि एक निगरानी प्रणाली शुरू की जाएगी। पीठ ने इस बात पर आश्चर्य भी जताया कि क्या लगाए गए पेड़ों की संख्या का पता लगाने के लिए कोई स्वतंत्र तंत्र मौजूद है भी या नहीं। शीर्ष अदालत ने 8 अक्तूबर को डीडीए के वकील और याचिकाकर्ता से पेड़ों की कटाई की स्थिति, परिणामी कार्रवाई और निगरानी तंत्र के बारे में जानकारी मांगी थी।

कैदियों की जाति संबंधी जानकारी हटाना NCRB डाटा संग्रह में बाधक नहीं- सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जेलों में विचाराधीन कैदियों या दोषियों के रजिस्टर में जाति से संबंधित किसी भी जानकारी या 'जाति' कॉलम को हटाने का उसका निर्देश राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के संग्रह में बाधक नहीं है। मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने यह स्पष्टीकरण दिया।

तीन अक्तूबर को दिए एक ऐतिहासिक फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने शारीरिक श्रम के विभाजन, बैरकों के अलगाव और गैर-अधिसूचित जनजातियों और आदतन अपराधियों के कैदियों के प्रति पक्षपात जैसे जाति आधारित भेदभाव पर प्रतिबंध लगा दिया था। साथ ही ऐसे पक्षपात को बढ़ावा देने वाले 10 राज्यों के जेल मैनुअल नियमों को असांविधानिक करार दिया था। फैसले में दिए गए निर्देशों में से एक में कहा गया था कि जेलों के अंदर विचाराधीन या दोषी कैदियों के रजिस्टर में 'जाति' कॉलम और जाति से संबंधित किसी भी संदर्भ को हटा दिया जाएगा। याचिकाकर्ता के वरिष्ठ वकील एस मुरलीधर ने कहा कि याचिका में आग्रह किया गया था कि रजिस्टरों से जाति संदर्भ हटाने के निर्देश देकर एनसीआरबी डाटा संग्रह के कार्य में बाधा न डाली जाए।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed