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बाल संरक्षण पर पॉलिसी तैयार करने पर विचार करे सरकार : सुप्रीम कोर्ट

Wed, 15 Aug 2018 04:05 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 15 Aug 2018 04:05 AM IST
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Supreme court Says to Central Government should Consider framing a child protection policy

देश के शेल्टर होम में कथित यौन शोषण के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताते हुए केंद्र सरकार से पूछा है कि अब तक शेल्टर होम में यौन शोषण के जो 1575 मामले सामने आए हैं, उन पर क्या कार्रवाई हुई। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को बाल संरक्षण को लेकर पॉलिसी तैयार करने पर विचार करने के लिए कहा है।      

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न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष केंद्र सरकार की ओर पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल पिंकी आनंद ने बताया पिछले वर्ष देश के शेल्टर होम में 1575 बच्चों के साथ यौन या शारीरिक शोषण केमामले सामने आए हैं। इनमें में 286 लड़के हैं। साथ ही इनमें से 189 मामले पोर्नोग्राफी से संबंधित हैं। 
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उन्होंने यह भी बताया कि देश में 9589 शेल्टर होम हैं। इनमें से 8744 शेल्टर होम गैर सरकारी संगठनों(एनजीओ) द्वारा चलाए जाते हैं जबकि बाकी शेल्टर होम राज्य सरकारों के द्वारा चलाई जाती हैं। इस पर पीठ ने पिंकी आनंद से कहा कि हमें इससे इससे कोई लेना देना नहीं है कि कितने शेल्टर होम पंजीकृत हैं।

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शेल्टर होम में 1575 लड़के व लड़कियों के साथ यौन शोषण के मामले सामने आए

पीठ ने सवाल किया कि 'शेल्टर होम में 1575 लड़के व लड़कियों के साथ यौन व शारीरिक शोषण के मामले सामने आए हैं। आपने इस पर अब तक क्या किया? ये कौन शेल्टर होम में जहां इन बच्चों के साथ शोषण किया गया। आखिर यह सब कब तक चलता रहेगा। हम अखबारों में खबरें देखकर आंखें नहीं मूंद सकते।’ 

इस पर आनंद ने कहा कि वह इस संबंध में निर्देश लाएंगी। साथ ही उन्होंने बताया कि सोशल ऑडिट का काम अक्टूबर तक पूरा कर लिया जाएगा। साथ ही पीठ ने बिहार सरकार को टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज(टीआईएसएस) द्वारा तैयार की गई शेल्टर होम की सोशल ऑडिट रिपोर्ट को सार्वजनिक करने के लिए कहा है। 

पीठ ने कहा कि आखिर इस रिपोर्ट में ऐसा क्या है जिस कारण रिपोर्ट को अब तक सार्वजनिक नहीं किया गया। बिहार सरकार की ओर से पेश रंजीत कुमार ने पीठ को बताया कि एम्स, दिल्ली सहित तीन संस्था मुजफ्फरपुर के शेल्टर होम में यौन शोषण का शिकार हुई लड़कियों के मानसिक व सामाजिक पहुलओं पर विचार कर रही है। अगली सुनवाई सिंतबर में होगी। 

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