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यूपी न्यायिक सेवा के आयुसीमा संबंधी नियम को सुप्रीम कोर्ट ने ठहराया वैध
Thu, 07 Feb 2019 05:36 AM IST
Gaurav Pandey
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Gaurav Pandey
Updated Thu, 07 Feb 2019 05:36 AM IST
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सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश उच्च न्यायिक सेवा के उस नियम को सांविधानिक रूप से वैध करार दिया है, जिसके तहत परीक्षा में बैठने के लिए आयुसीमा तय की गई है। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने नियम के प्रावधान-8 और 12 के खिलाफ दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया। पीठ ने अपने फैसले में कहा कि नियमों की वैधता किसी के व्यक्तिगत मामले पर निर्भर नहीं हो सकती है क्योंकि नियम के सामान्य रूप से लागू करने में किसी न किसी को समस्या होगी।
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न्यायिक सेवा परीक्षा में बैठने के लिए 45 वर्ष (आरक्षित वर्ग के लिए 48 वर्ष) की अधिकतम आयु सीमा तय की गई है और आयु सीमा आवेदन आमंत्रित करने के अगले वर्ष 1 जनवरी से मान्य होगी। हीरेंद्र कुमार सहित अन्य ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर नियम के प्रावधान-8 व 12 को मनमाना और भेदभावपूर्ण बताया था। उनका कहना था कि यह संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है। लेकिन पीठ ने उनकी दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि आयु सीमा की कटऑफ तय करना चयन प्रक्रिया के विनियामक नियंत्रण से जुड़ा मसला है।
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