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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: आंध्र प्रदेश के आईपीएस अधिकारी वेंकटेश्वर का निलंबन लिया वापस, इस आरोप में हुई थी कार्रवाई
Sat, 23 Apr 2022 01:03 PM IST
संजीव कुमार झा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हैदराबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हैदराबाद
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Sat, 23 Apr 2022 01:03 PM IST
सार
वेंकटेश्वर राव तेलुगु देशम पार्टी के शासन के दौरान खुफिया प्रमुख थे, और उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू का करीबी माना जाता है।
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सर्वोच्च न्यायालय
- फोटो : PTI
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को आंध्र प्रदेश के आईपीएस अधिकारी एबी वेंकटेश्वर राव का निलंबन रद्द कर दिया। फरवरी 2020 में आंध्र प्रदेश की जगनमोहन सरकार ने आईपीएस अधिकारी एबी वेंकटेश्वर राव को राज्य के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के पद पर रहते हुए सुरक्षा उपकरणों की खरीद में भ्रष्टाचार करने के आरोप में निलंबित कर दिया था। डीजीपी रैंक के एक अधिकारी, राव तेलुगु देशम पार्टी के शासन के दौरान खुफिया प्रमुख थे, और उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू का करीबी माना जाता है।
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वेंकेटेश्वर ने हाईकोर्ट का रुख किया था
आंध्र सरकार द्वारा निलंबन के बाद वेंकेटेश्वर ने हाईकोर्ट का रुख किया था। हाईकोर्ट ने इसकी सुनवाई करते हुए निलंबन पर छह महीने की रोक लगा दी थी और आदेश देते हुए कहा था कि वे जांच को किसी भी कीमत पर प्रभावित न करें।
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आंध्र प्रदेश विधानसभा ने लाया था प्रस्ताव
इसके बाद आंध्र प्रदेश विधानसभा ने इस बात की जांच करने के लिए एक प्रस्ताव पारित किया कि क्या पिछली टीडीपी शासन ने इस्राइली स्पाइवेयर पेगासस खरीदा था। यह प्रस्ताव तब आया जब सत्तारूढ़ वाईएसआरसीपी ने सदन को बताया कि उसने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की टिप्पणियों पर ध्यान दिया था कि उनकी सरकार ने 4-5 साल पहले पेगासस को खरीदने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था, सॉफ्टवेयर आंध्र प्रदेश द्वारा अधिग्रहित किया गया था जब टीडीपी प्रमुख एन चंद्रबाबू सीएम थे।
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प्रस्ताव के बाद वेंकेटेश्वर ने की थी प्रेस वार्ता
इस प्रस्ताव के पारित होने के तुरंत बाद, राव ने एक मीडिया सम्मेलन आयोजित किया जिसमें उन्होंने कहा कि हालांकि एनएसओ समूह ने पेगासस को बेचने के लिए राज्य सरकार से संपर्क किया था, लेकिन इसे अस्वीकार कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि चूंकि वह उस समय खुफिया प्रमुख थे, इसलिए आरोपों का जवाब देना और सफाई देना उनकी जिम्मेदारी थी।
प्रेस वार्ता को सरकार ने माना था उल्लंघन और दिया था निलंबन का आदेश
प्रेस वार्ता का संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार ने 5 अप्रैल को राव को कारण बताओ नोटिस जारी किया जिसमें कहा गया था कि उन्होंने एआईएस नियमों के नियम 6 का उल्लंघन किया क्योंकि उन्होंने राज्य सरकार से मीडिया सम्मेलन को संबोधित करने की अनुमति नहीं ली थी।