{"_id":"637f24fcb88a3f3b831cdffe","slug":"supreme-court-reserves-judgment-on-independent-selection-panel-for-appointments-of-cec-and-ec","type":"story","status":"publish","title_hn":"EC Appointments: चुनाव आयुक्त की नियुक्ति के लिए बनेगा स्वतंत्र पैनल? सुप्रीम कोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
EC Appointments: चुनाव आयुक्त की नियुक्ति के लिए बनेगा स्वतंत्र पैनल? सुप्रीम कोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित
Thu, 24 Nov 2022 09:35 PM IST
प्रांजुल श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: प्रांजुल श्रीवास्तव
Updated Thu, 24 Nov 2022 09:35 PM IST
सार
निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी, जिसकी सुनवाई के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : Social media
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
देश में मुख्य चुनाव आयुक्त व चुनाव आयुक्तों की नियुक्त के लिए एक स्वतंत्र पैनल बनेगा या नहीं? इस पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। दरअसल, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी, जिसकी सुनवाई के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। सुनवाई के दौरान इलेक्शन कमिश्नर के रूप में अरुण गोयल की नियुक्ति पर एक बार फिर सवाल खड़े हुए।
विज्ञापन
विज्ञापन
सरकार ने अदालत को सौंपी नियुक्ति से जुड़ी फाइल
गुरुवार को जब मामले में दोबारा सुनवाई हुई तो केंद्र सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल ने चुनाव आयुक्त अरुण गोयल की नियुक्ति से जुड़ी फाइल संविधान पीठ को सौंप दी। उन्होंने पीठ के समक्ष प्रस्तुत किया कि मूल फाइल की प्रतियां पांचो जजों को सौंप दी गई हैं। जिसके बाद जस्टिस अजय रस्तोगी ने नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल खड़े करते हुए सवाल किया कि ऐसी कौन सी प्रक्रिया अपनाई गई जिससे 24 घंटे के अंदर सारी जांच पड़ताल पूरी हो गई? साथ ही उन्होंने सुनवाई के बीच में नियुक्ति पर भी सवाल किए। गौरतलब है कि मामले की सुनवाई जस्टिस केएम जोसेफ की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय बेंच कर रही है। इसमें जस्टिस अजय रस्तोगी, अनिरुद्ध बोस, हृषिकेश रॉय और सीटी रविकुमार शामिल हैं।
विज्ञापन
बिजली की रफ्तार से फाइल पर हुआ काम
अरुण गोयल की नियुक्ति वाली फाइल देखने के बाद पीठ ने अटॉर्नी जनरल से सवाल किया कि जब चुनाव आयुक्त का पद बीती 15 मई से खाली पड़ा था तो सरकार ने अचानक इस पर नियुक्ति में इतनी जल्दबाजी क्यों की? अदालत ने कहा कि 24 घंटे से भी कम समय में नाम भेजने से लेकर मंजूरी देने की प्रक्रिया पूरी कर दी गई। 15 मई से 18 नवंबर के बीच क्या हुआ?' इस पर अटॉर्नी जनरल ने कहा कि मैं सारे सवालों के जवाब दूंगा, लेकिन मुझे बोलने का मौका तो दिया जाए।
VRS के तुरंत बाद नियुक्ति पर संदेह
इसके अलावा, संवैधानिक बेंच ने अरुण गोयल द्वारा वीआरएस लेने के तुरंत बाद चुनाव आयुक्त के पद पर नियुक्ति दिए जाने पर भी संदेह जताया। पीठ ने सवाल किया कि 'कानून मंत्री ने जो चार नाम भेजे, उन नामों में से ही और सबसे जूनियर अधिकारी को ही क्यों और कैसे चुनाव आयुक्त बना दिया गया। साथ ही इस पद पर नियुक्त होने से ठीक अगले माह में रिटायर होने वाले अधिकारी ने वीआरएस भी ले लिया।
अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने दिया जवाब
पीठ के सवालों पर अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि चुनाव आयुक्त की नियुक्ति के लिए कोई भी गलत प्रक्रिया नहीं अपनाई गई है। इससे पहले भी एक दिन के भीतर नियुक्ति की गई है। इस दौरान कानून मंत्री द्वारा भेजे गए चार नामों पर जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि भेजे गए सभी चारों नाम नाम DoPT के डेटाबेस से लिए गए थे। ये सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि विधि और न्याय मंत्रालय ही संभावित उम्मीदवारों की सूची बनाता है। नामों का चुनाव करते समय वरिष्ठता, रिटायरमेंट, उम्र आदि का भी ध्यान रखा जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि इसमें वरिष्ठता का पैमाने में आयु नहीं बल्कि बैच को आधार माना जाता है।
फैसला रखा सुरक्षित
फिलहाल, चुनाव आयुक्त चुनने के लिए CJI, प्रधानमंत्री और नेता विपक्ष की कमेटी बनाने की मांग वाली याचिका पर पीठ ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। पीठ का कहना था कि हाल ही में हुई इस नियुक्ति से चुनाव आयुक्त के लिए अपनाई जाने वाली वर्तमान प्रक्रिया की पारदर्शिता को आसानी से और बेहतर समझा जा सकता है।