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Supreme Court: न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ बोले-अदालतों द्वारा अपनाएं जाएं अत्याधुनिक साधन, जानें और क्या कहा
Tue, 06 Sep 2022 11:40 PM IST
शिव शरण शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Tue, 06 Sep 2022 11:40 PM IST
सार
न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा कि दशहरे की छुट्टियों के दौरान वह सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष से अधिवक्ताओं के लिए प्रौद्योगिकी के उपयोग और निर्णयों और संकलन की सॉफ्ट कॉपी को संभालने के लिए एक प्रशिक्षण सत्र की व्यवस्था करने के लिए कहेंगे।
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जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ (फाइल फोटो)
- फोटो : PTI
विस्तार
उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ ने मंगलवार को अदालतों को अत्याधुनिक साधन अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अदालतों को मानसिकता बदलनी चाहिए। साथ ही न्यायाधीशों को पारंपरिक दृष्टिकोण अपनाने के बजाय आज के समय का दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। इस दौरान उन्होंने एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि मैने कल अदालत की कार्यवाही के दौरान किसी को सेल फोन पर रिकॉर्डिंग करते हुए देखा। उस समय मेरे मन में विचार आया कि वह ऐसा कैसे कर सकता हैं, हालांकि बाद में मैने विचार किया कि ये कोई बड़ी बात नहीं है क्योंकि खुली अदालत में सुनवाई में कुछ भी गोपनीय नहीं होता। जस्टिस चंद्रचूड़ ने हालांकि जजों की चर्चा को रिकॉर्ड करने से बचना चाहिए।
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न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ बिजली की दरों और बंद औद्योगिक इकाइयों को खरीदने वाले नीलामी खरीदारों के अधिकारों से संबंधित एक मामले की सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान पीठ ने वकीलों को भारी किताबों के बजाय अपने संकलन की स्कैन की गई सॉफ्ट कॉपी का उल्लेख करने के लिए कहा।
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इस पर मामले में एक पक्ष की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विजय हंसरिया ने कहा कि उच्च न्यायालय के कई न्यायाधीश और निचली अदालत के न्यायाधीश अदालत कक्ष के अंदर मोबाइल फोन के इस्तेमाल की अनुमति नहीं देते हैं।
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इस पर न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा कि दशहरे की छुट्टियों के दौरान वह सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष से अधिवक्ताओं के लिए प्रौद्योगिकी के उपयोग और निर्णयों और संकलन की सॉफ्ट कॉपी को संभालने के लिए एक प्रशिक्षण सत्र की व्यवस्था करने के लिए कहेंगे।
गौरतलब है कि न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ सर्वोच्च न्यायालय के ई-समिति प्रमुख भी हैं। 31 जुलाई को न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने विज्ञान भवन में आयोजित पहली अखिल भारतीय जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण बैठक के समापन समारोह में बोलते हुए कहा था कि न्यायिक संस्थानों को जनता तक पहुंचने के लिए संचार के आधुनिक साधनों को अपनाने के लिए प्रतिरोध छोड़ना चाहिए। उन्होंने ये भी कहा था कि न्यायाधीशों और न्यायपालिका को ट्विटर और टेलीग्राम जैसे प्लेटफार्मों का उपयोग करने या कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग के बारे में अपना डर छोड़ना होगा।