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विधवा आश्रमों पर सरकार के रुख से सुप्रीम कोर्ट असंतुष्ट

Sun, 13 Mar 2016 01:49 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 13 Mar 2016 01:49 AM IST
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supreme court is not happy with government on Widow ashram
विधवा आश्रम - फोटो : अमर उजाला

उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि वृंदावन में विधवाओं की स्थिति में सुधार करने के प्रयास जारी है। सरकार ने बताया कि वहां 500 बिस्तरों का एक होस्टल का निर्माण चल रहा है। हालांकि सरकार ने शीर्ष अदालत के समक्ष बजट की कमी का रोना रोया।

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न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष यूपी सरकार की ओर से पेश एडिशनल एडवोकेट जनरल गौरव भाटिया ने कहा कि वृंदावन में विधावओं की सुविधाएं देने की हरसंभव कोशिश की जा रही है। 500 बेड का हॉस्टर का निर्माण भी चल रहा है।
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साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि विधावओं को कूपन भी दिए जा रहे हैं। हालांकि उन्होंने कहा कि बजट को लेकर समस्या आ रही है। बजट करीब 19 लाख रुपये का है। केंद्र से भी योगदान भी मिला है।
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राज्य सरकार ने इस मद पैसे खर्च रही है, लेकिन अब भी करीब 13 करोड़ रुपये की कमी है। वहीं राष्ट्रीय महिला आयोग ने बताया कि वृंदावन में कामकाजी महिलाओं के लिए होस्टल बनाने की बात हो रही है।

इसके लिए एक एनजीओ भी मदद करने को तैयार है लेकिन यूपी सरकार मदद नहीं लेना चाह रही है। इस पर पीठ ने राज्य सरकार से कहा कि एक तरफ आम बजट की कमी का रोना रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आप मदद भी लेने को तैयार नहीं है।

पीठ ने राज्य सरकार को राष्ट्रीय महिला आयोग से संपर्क में रहने के लिए कहा है। पीठ ने राज्य सरकार को स्टेट्स रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा है।

समय पर रिपोर्ट दाखिल करने की सलाह

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अदालत

वहीं महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय द्वारा रिपोर्ट दाखिल करने में देरी पर नाराजगी जताते हुए पीठ ने एडिशन सॉलिसिटर जनरल(एएसजी) ने पीएस पटवालिया से कहा कि वह अपने अधिकारियों को भविष्य में समय पर रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहें।

वास्तव में मंत्रालय को रिपोर्ट पहले ही दाखिल करना था लेकिन शुक्रवार को सुनवाई तक वह रिपोर्ट दाखिल करने में नाकाम रहा था। हालांकि पटवालिया ने कहा कि रिपोर्ट तैयार है और शुक्रवार को ही रिपोर्ट दाखिल कर दी जाएगी।

मालूम हो कि वृंदावन में रह रही विधवाओं की स्थिति पर राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण(नालसा), दिल्ली विधिक सेवा आयोग (डीएलएसए) और राष्ट्रीय महिला आयोग की रिपोर्ट में कहा गया था कि वृंदावन केजिस इलाके या घर में विधवाएं रह रही हैं, वहां की स्थिति बेहद खराब है।

सभी गरीबी और लाचारी में जी रही हैं। उनका शोषण हो रहा है। जहां विधवाएं रह रही है, वहां उन्हें मूलभूत सुविधाएं भी नहीं मिल रही है। साथ ही बंदरों का आतंक है।

वृंदावन में देश के अलग-अलग जगहों से आई हजारों की तादाद में विधवाएं रह रही हैं। अदालत पर्यावरण एवं उपभोक्ता संरक्षण फाउंडेशन द्वारा दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है।

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