केंद्र सरकार को राहत: सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिब्यूनलों में नियुक्ति करने के लिए दिया दो सप्ताह का और समय
Tribunal Reforms Act 2021: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को राहत देते हुए न्यायाधिकरणों में नियुक्ति करने के लिए और दो सप्ताह का और समय दिया है।
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ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स एक्ट 2021 की संवैधानिक वैधता और रिक्तियों से संबंधित मामले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में एक बार फिर से सुनवाई हुई। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को राहत देते हुए विभिन्न न्यायाधिकरणों में नियुक्ति करने के लिए और दो सप्ताह का और समय दिया है।
वहीं नियुक्ति में हो रही देरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को एक बार फिर से फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि जब समितियों द्वारा कैंडिडेट के नामों को सुझाया गया है, तब अबतक इन पदों पर नियुक्ति क्यों नहीं की गई है। चीफ जस्टिस एनवी. रमन्ना ने सुनवाई के दौरान कहा अगर पहले ही चिन्हित लोगों की लिस्ट तैयार की गई है, तब वेट लिस्ट से क्यों चुना गया है। चीफ जस्टिस ने कहा कि समिति द्वारा 41 लोगों का नाम सुझाया गया लेकिन 18 की ही नियुक्ति हुई है। हमें ये भी नहीं पता कि किस आधार पर लोगों को चुना गया।
सरकार को ही सबकुछ करना है तो चयन समिति की जरूरत क्या: सुप्रीम कोर्ट
सरकार द्वारा चुने गए नामों पर आपत्ति जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर सरकार अपने अनुसार ही उम्मीदवार को चुनेगी तो फिर चयन समिति की क्या जरूरत है। चीफ जस्टिस ने आपत्ति जताते हुए कहा कि जिस तरह से लोगों का चयन हुआ है, हम इससे खुश नहीं है। हमने 500 लोगों लोगों का साक्षात्कार किया, जिसमें से अब तक केवल 11 लोगों को शॉर्टलिस्ट किया गया लेकिन उनमें से सिर्फ चार लोगों का चयन हुआ और सरकार ने बाकी वेटिंग लिस्ट से चुन लिए।
प्रधान न्यायाधीश एन वी रमण, न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव की पीठ ने कहा कि न्यायाधिकरणों में रिक्तियों के कारण स्थिति बेहद दयनीय है और वादियों को अधर में नहीं छोड़ा जा सकता। पीठ ने अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल से कहा कि जारी किए गए नियुक्ति पत्र से यह पता चलता है कि उन्होंने चयन सूची से अपनी पसंद से तीन लोगों और प्रतीक्षा सूची से अन्य लोगों को चुना तथा चयन सूची में अन्य नामों को नजरअंदाज किया। सेवा कानून में आप चयन सूची को नजरअंदाज करके प्रतीक्षा सूची से नियुक्ति नहीं कर सकते। यह किस प्रकार का चयन एवं नियुक्ति है?
न्यायाधिकरणों में 250 पद रिक्त
बता दें कि विभिन्न प्रमुख न्यायाधिकरणों और अपीली न्यायाधिकरणों में लगभग 250 पद रिक्त हैं। शीर्ष अदालत न्यायाधिकरणों में रिक्तियों संबंधी याचिकाओं और अर्ध न्यायिक निकायों को नियंत्रित करने वाले नए कानून संबंधी मामले से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।
Supreme Court grants Centre two more weeks to make appointments to various Tribunals.
— ANI (@ANI) September 15, 2021
छह न्यायाधिकरणों में 84 नियुक्तियां की, कोई भी सिफारिश लंबित नहीं : केंद्र
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उसने आईटीएटी और एनसीएलटी समेत छह न्यायाधिकरणों में 84 नियुक्तियां की हैं और मौजूदा समय में खोज कम चयन समिति (एससीएससी) की कोई भी सिफारिश लंबित नहीं है। यह दावा केंद्र ने 14 सितंबर को दाखिल अपने हलफनामे में किया।
राजस्व निदेशक अरविंद शरण द्वारा दायर हलफनामे में कहा गया है कि केंद्र सरकार ने एससीएससी द्वारा की गई सभी सिफारिशों पर कार्रवाई की है और नियुक्ति आदेश जारी किए गए हैं। सरकार ने आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (आईटीएटी), राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी), टेलीकॉम विवाद एवं निपटान अपीलीय न्यायाधिकरण (टीडीएसएटी), राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी), विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण (एपीटीईएल) और सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (एएफटी) में की गई नियुक्तियों के संदर्भ में एक चार्ट भी पेश किया। हलफनामे में कहा गया है कि वर्ष 2020 और 2021 के दौरान विभिन्न न्यायाधिकरणों में कुल 84 नियुक्तियां की गईं।
हलफनामे में सबसे पहले एनसीएलटी के लिए सिफारिशों और नियुक्तियां का जिक्र किया गया। इसमें कहा गया है कि एससीएससी ने 11 न्यायिक और 10 तकनीकी सदस्यों की सिफारिश की गई। सरकार ने 8 न्यायिक और 10 तकनीकी सदस्यों की नियुक्ति की। टीडीएसएटी के लिए एससीएससी ने दो सिफारिश की और सरकार ने एक सदस्य को नियुक्त किया। आईटीएटी में चयन समिति ने 16 न्यायिक और 12 अकाउंट सदस्यों की सिफारिश की।
सरकार ने छह न्यायिक और सात अकाउंट सदस्यों को नियुक्त किया। एनसीडीआरसी के लिए एससीएससी ने चार न्यायिक और दो तकनीकी सदस्यों की सिफारिश की तो सरकार ने दो न्यायिक और दो तकनीकी सदस्यों को नियुक्त किया। इसी तरह से एपीटीईएल में एक तकनीकी सदस्य की सिफारिश की गई जिसे सरकार ने नियुक्त किया। एएफटी में केंद्र सरकार ने छह न्यायिक और पांच प्रशासनिक सदस्यों की नियुक्ति की। शेष खाली पदों को लेकर हलफनामे में कहा गया है कि एससीएससी इसे लेकर नई सिफारिशें करेगा।