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निर्दोष लोगों का खून करने वाले परिवार से रिश्तों को भूल जाएं: सुप्रीम कोर्ट

Tue, 21 Feb 2017 08:14 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 21 Feb 2017 08:14 PM IST
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Supreme court dismissed lajpat nagar bomb blast accused plea
- फोटो : SELF

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निर्दोष लोगों की हत्या करने जैसे गंभीर अपराधों का अंजाम देने वाले लोगों के लिए बेहतर है कि वे अपने परिवार से रिश्तों को भूल जाएं। वर्ष 1996 में लाजपत नगर में हुए बम धमाकों में सजायाफ्ता मोहम्मद नौशाद की अंतरिम जमानत की याचिका खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी की है। नौशाद की बेटी की शादी 28 फरवरी को है और इसलिए उसने अंतरिम जमानत मांगी थी। 

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चीफ जस्टिस जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने मोहम्मद नौशाद की उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें उसने बेटी की शादी में शरीक होने केलिए एक महीने के लिए अंतरिम जमानत देने की गुहार की थी। 
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पीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि निर्दोष लोगों की हत्या करने वालों को न तो अंतरिम जमानत दी जाएगी और न ही उन्हें पैरोल दी जाएगी। पीठ ने स्पष्ट कहा कि ऐसे अपराधियों को पारिवारिक जरूरतों के लिए जमानत नहीं दी जा सकती। पीठ ने यह भी कहा कि ऐसे अपराधियों परिवार से अपने रिश्तों को भूल जाएं।

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लाजपत नगर ब्लास्ट में दोषी नौशाद को जमानत देने से किया इनकार

Supreme court dismissed lajpat nagar bomb blast accused plea

नौशाद ने अपनी याचिका में कहा था कि वह 14 जून 1996 से जेल में बंद है। वह 20 वर्ष से अधिक समय जेल में बीता चुका है। उसने याचिका में कहा था कि 28 फरवरी को उसकी बेटी की शादी होनी है, लिहाजा उसे शादी में शामिल होने की इजाजत दी जाए।

याचिका में कहा गया था कि दिल्ली हाईकोर्ट में अपने फैसले में कहा था कि उसकेखिलाफ कोई सीधा साक्ष्य नहीं हैं, बावजूद इसके उसे दोषी करार दिया गया था। जबकि इस मामले में मास्टरमाइंट कहे जाने वाले दो अभियुक्तों को अदालत ने बरी कर दिया है।

इस याचिका पर अदालत ने दिल्ली पुलिस से रिपोर्ट तलब किया था। पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि  यह बात सही है कि 28 फरवरी को नौशाद की बेटी की शादी है। 

मालूम हो कि 21 मई 1996 में हुए इस धमाके के बाद नौशाद को 14 जून 1996 को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया गया था। पुलिस के मुताबिक, उसके पास से विस्फोटक भी बरामद किए थे।

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