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कैंपा फंड का इस्तेमाल न होने से सुप्रीम कोर्ट निराश, कहा- हमें मूर्ख बना रही कार्यपालिका

Wed, 11 Apr 2018 01:04 AM IST
एजेंसी , नई दिल्ली
एजेंसी , नई दिल्ली Updated Wed, 11 Apr 2018 01:04 AM IST
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Supreme Court disappointed with not using Campa Fund
सुप्रीम कोर्ट

कैंपा फंड को दूसरे मद में खर्च करने का पता तब चला जब ओडिशा के प्रमुख सचिव की ओर से सुप्रीम कोर्ट में एक शपथपत्र दायर किया गया। इसमें बताया गया कि ये पैसा सड़कों के निर्माण, बस स्टैंड की मरम्मत और कॉलेजों में विज्ञान प्रयोगशालाओं के लिए खर्च हुआ है। इस पर शीर्ष अदालत ने नाराजगी जताई। कैंपा फंड खदानों और औद्योगिक इकाइयों पर वन एवं पर्यावरण के लिए लगने वाला उपकर है।

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दूसरे उद्देश्यों के लिए कैंपा फंड खर्च करने पर कोर्ट ने ओडिशा के प्रतिनिधि को कहा, यह पैसा लोगों के कल्याण के लिए है। इसे उसी के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है, न कि आपकी सरकार के कार्यों के लिए। एक राज्य के तौर पर सड़कें बनाना और स्ट्रीट लाइटें लगाना आपका काम है। लोगों के लिए जमा होने वाला पैसा इसमें नहीं लगाया जा सकता। सामाजिक कार्यों के लिए आपका कुल व्यय पांच प्रतिशत भी नहीं है।
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ओडिशा से कहा, पैसा लोगों के फायदे के लिए है, आपके लिए नहीं
पीठ ने कहा, हम आपको इसकी इजाजत नहीं दे सकते। यह पैसा लोगों के फायदे के लिए है। सरकार के फायदे के लिए नहीं। इस मामले में न्याय मित्र के तौर पर अदालत की मदद कर रहे वकील ने कहा, इस फंड के तहत जमा हुए पैसे को ओडिशा में आदिवासियों के कल्याण में खर्च किया जा सकता है। इसके बाद कोर्ट ने ओडिशा के वकील का आगे का ब्यौरा देने के लिए तीन सप्ताह का समय दिए जाने का अनुरोध स्वीकार कर लिया। राज्य के मुख्य सचिव से अगली सुनवाई में पेश होने का कहा गया है।
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मेघालय को हलफनामे पर लगाई फटकार
पीठ ने इस मामले में मेघालय के हलफनामे का भी अवलोकन किया। पीठ ने लोगों के कल्याण के लिए जमा की गई रकम को बैंक में ही रखने पर राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई। पीठ इस तथ्य से भी नाराज दिखी कि मेघालय के हलफनामे में यह साफ नहीं था कि इस मद में जमा हुआ कितना फंड बैंक में पड़ा है। पीठ ने अपनी टिप्पणी में कहा, बहुत हो गया। यह मजाक बन गया है। पीठ ने मेघालय के हलफनामे को बहुत बुरी तरह बना बताया। मेघालय को हलफनामा दुरुस्त करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया गया है। राज्य के प्रमुख सचिव को अगली सुनवाई में पेश होने को कहा गया है।

दिल्ली में पर्यावरण मुआवजा शुल्क से 1,301 करोड़ जमा

Supreme Court disappointed with not using Campa Fund
ट्रांसपोर्ट टैक्स - फोटो : FILE PHOTO
अदालत को बताया गया कि दिल्ली में लगे पर्यावरण मुआवजा शुल्क (ईसीसी) के तहत 1,301 करोड़ रुपये जमा हुए हैं। शीर्ष अदालत ने दिल्ली में प्रवेश करने वाले वाहनों पर यह शुल्क लगाया था। यह टोल टैक्स के अतिरिक्त है। इसके अलावा 2,000 सीसी से ज्यादा क्षमता के इंजन वाली गाडियों पर लगाने वाले कर से 70.5 करोड़ रुपये अलग से जमा हुए हैं। पीठ ने दिल्ली सरकार और पर्यावरण एवं वन मंत्रालय को यह बताने को कहा है कि इस रकम को कैसे इस्तेमाल किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट 1985 में दायर की गई पर्यावरणविद एमसी मेहता की जनहित याचिका की सुनवाई कर रहा है। 
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