फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   supreme court direct centre to mediation in sutlej yamuna link canal dispute punjab haryana

Supreme Court: 'सतलुज-यमुना नहर लिंक योजना पर मध्यस्थता करे केंद्र', कोर्ट ने पंजाब सरकार को लगाई फटकार

Wed, 04 Oct 2023 02:52 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नितिन गौतम Updated Wed, 04 Oct 2023 02:52 PM IST
सार

28 जुलाई 2020 को सतलुज यमुना नहर लिंक विवाद पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों को सौहार्दपूर्ण तरीके से विवाद को निपटाने के लिए कहा था। 

विज्ञापन
supreme court direct centre to mediation in sutlej yamuna link canal dispute punjab haryana
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सुनवाई के दौरान निर्देश दिया है कि सतलुज-यमुना नहर लिंक योजना विवाद पर केंद्र सरकार पंजाब और हरियाणा के बीच मध्यस्थता करे। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार को भी फटकार लगाई है। जस्टिस संजय किशन कौल, जस्टिस सीटी रविकुमार और जस्टिस सुधांशु धुलिया की पीठ इस मामले पर सुनवाई कर रही है। 
विज्ञापन


'केंद्र करे विवाद में मध्यस्थता'
सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि केंद्र सरकार पंजाब को आवंटित जमीन का सर्वेक्षण कराए। साथ ही केंद्र को इस विवाद में मध्यस्थता करने का भी निर्देश दिया। कोर्ट अब जनवरी 2024 में इस मामले पर सुनवाई करेगा। कोर्ट ने नहर के निर्माण के लिए कदम नहीं उठाने के लिए पंजाब सरकार को फटकार भी लगाई। कोर्ट ने पंजाब सरकार को मामले में सहयोग करने का निर्देश भी दिया। इससे पहले 28 जुलाई 2020 को सतलुज यमुना नहर लिंक विवाद पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों को सौहार्दपूर्ण तरीके से विवाद को निपटाने के लिए कहा था। 
विज्ञापन


क्या है विवाद
बता दें कि साल 1966 में पंजाब को विभाजित कर हरियाणा राज्य का गठन किया गया था। साल 1981 में दोनों राज्यों के बीच पानी के बंटवारे को लेकर समझौता हुआ था। इस समझौते के तहत सतलुज यमुना नहर लिंक योजना बनाई गई और दोनों राज्यों को अपने-अपने इलाके में नहर का निर्माण करना था। हरियाणा ने जहां अपने क्षेत्र में नहर का निर्माण कर लिया है, वहीं पंजाब ने निर्माण कार्य शुरू करने के बाद इससे अपने कदम पीछे खींच लिए। इतना ही नहीं साल 2004 में पंजाब ने एक कानून बनाकर एकतरफा तरीके से इस समझौते को ही रद्द कर दिया। साल 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब के इस कानून को रद्द कर दिया। बाद में पंजाब ने नहर के निर्माण के लिए अधिग्रहित की गई जमीन ही किसानों को वापस लौटा दी, जिससे यह विवाद और गहरा गया है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed