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सुनवाई: सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों को फटकारा, कहा- मदद मांगने वालों पर कार्रवाई की तो मानेंगे अवमानना

Fri, 30 Apr 2021 03:29 PM IST
Tanuja Yadav राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली
राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Tanuja Yadav Updated Fri, 30 Apr 2021 03:29 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट में कोरोना संकट से संबंधित कई याचिकाओं पर आज सुनवाई हो रही है। ऑक्सीजन सप्लाई, दवा सप्लाई और अन्य मुद्दों पर  जिरह के दौरान कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की। 

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Supreme Court begins hearing in the case where it took suo moto cognizance on corona pandemic
कोरोना संकट से संबंधित कई याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कोरोना संकट को लेकर सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को सुनवाई शुरू हो गई है। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ ने की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय विशेष पीठ ने कहा कि केवल राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों की ही सुनवाई होगी।

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सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया कि केंद्र सरकार 100 फीसदी टीकों की खरीद क्यों नहीं करती?  इसे राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के मॉडल पर राज्यों को वितरित क्यों नहीं करती, ताकि वैक्सीन की दामों में अंतर न रहे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आखिरकार यह देश के नागरिकों के लिए है।
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अनपढ़ या इंटरनेट एक्सेस ना वाले लोग वैक्सीन कैसे लगवाएंगे - कोर्ट
न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि हमारे सामने कुछ ऐसी भी याचिकाएं दायर की गई हैं, जो गंभीर रूप से स्थानीय मुद्दो को उठाती हैं। उन्होंने आगे कहा कि ऐसे मुद्दों को उच्च न्यायालय में उठाया जाना चाहिए। वही पीठ ने सवाल किया कि अनपढ़ या जिनके पास इंटरनेट एक्सेस नहीं है, वे कैसे वैक्सीन लगवाएंगे?



वैक्सीन कंपनियों पर कितना निवेश किया- कोर्ट
कोर्ट ने आगे कहा कि पिछले एक साल में केंद्र सरकार ने वैक्सीन कंपनियों पर कितना निवेश किया और कितनी अग्रिम राशि दी?



केंद्र से कोरोना मरीजों की राष्ट्रीय नीति को लेकर किया सवाल
यही नहीं, केंद्र को फटकारते हुए कोर्ट ने कहा कि क्या केंद्र मरीजों के लिए अस्पतालों में दाखिले पर कोई राष्ट्रीय नीति बना रहा है? क्या मूल्य निर्धारण को विनियमित किया जा रहा है?


 

सोशल मीडिया पर अपील करने वाले लोगों के खिलाफ कोई राज्य नहीं कर सकता कार्रवाई - SC

कोर्ट ने आगे कहा कि उन डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों को इलाज देने के लिए क्या किया जा रहा है जो कोविड-19 के संपर्क में है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि सोशल मीडिया पर इस संकट के समय लोगों द्वारा अपील करने पर कोई भी राज्य उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं कर सकती या कोई कार्रवाई नहीं कर सकती।



कार्रवाई की तो मानेंगे अवमानना - कोर्ट
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि राज्य द्वारा ऐसा करने पर हम उसे अवमानना मानेंगे। हमें अपने नागरिकों की आवाज सुननी चाहिए और न कि उनकी आवाज को दबाना चाहिए।

क्या देश में ऑक्सीजन की उपलब्धता पर्याप्त है- कोर्ट
इतना ही नहीं सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि क्या भारत में ऑक्सीजन की उपलब्धता पर्याप्त है जबकि प्रति दिन 8500 मीट्रिक टन की औसत मांग है। इसके जवाब में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि 10,000 मीट्रिक टन ऑक्सीजन दैनिक आधार पर उपलब्ध है। ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है। लेकिन कुछ राज्यों द्वारा कम ऑक्सीजन लेने के कारण कुछ क्षेत्रों में उपलब्धता कम हो जाती है।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा- आपको जान बचानी होगी

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि दिल्ली, राष्ट्र का प्रतिनिधित्व करती है और शायद ही कोई पूरी तरह से दिल्लीवासी है। भूल जाइए कि कोई ऑक्सीजन नहीं उठा पा रहा है। आपको जान बचानी होगी। केंद्र के रूप में आपके पास एक विशेष जिम्मेदारी है।

राजनीति अलग रखें, केंद्र से बात करे दिल्ली सरकार
इसके अलावा न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने दिल्ली सरकार की ओर से पेश वकील राहुल मेहरा से कहा कि हम चाहते हैं कि आप सर्वोच्च अथॉरिटी को संदेश दें कि इस मानवीय संकट में केंद्र सरकार के साथ सहयोग की भावना होनी चाहिए। न्यायालय ने दिल्ली सरकार से कहा कि कोई राजनीतिक झमेला नहीं होना चाहिए, उसे कोविड-19 की स्थिति से उबरने के लिए केंद्र के साथ सहयोग करना चाहिए। जीवन बचाना प्राथमिकता है। राजनीति चुनाव के लिए है, मानवीय संकट के इस समय में हर जिंदगी पर ध्यान दिये जाने की जरूरत है। न्यायालय ने दिल्ली सरकार से यह भी कहा कि कृपया हमारा संदेश शीर्ष स्तर पर पहुंचा दीजिए कि राजनीति एक तरफ रखें, केंद्र से बात करें।

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