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मुजफ्फरपुर आश्रयगृह मामला: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- तीन महीने में जांच पूरी करे सीबीआई
Mon, 03 Jun 2019 02:02 PM IST
Prachi Priyam
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Prachi Priyam
Updated Mon, 03 Jun 2019 02:02 PM IST
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supreme court
- फोटो : ANI
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उच्चतम न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) ने बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के बहुचर्चित आश्रय गृह कांड में हत्या के पहलू सहित सारी जांच तीन महीने के भीतर पूरी करने का केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सोमवार को निर्देश दिया।
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जस्टिस इन्दु मल्होत्रा और जस्टिस एम आर शाह की अवकाश पीठ ने सीबीआई को इस आश्रय गृह में अप्राकृतिक यौनाचार के आरोपों की भारतीय दंड संहिता की धारा 377 के तहत और लड़कियों से हिंसा के वीडियो की रिकार्डिंग की भी जांच करने का निर्देश दिया है।
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पीठ ने इन घटनाओं में बाहरी व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच का निर्देश दिया है जो इसमे संलिप्त थे और जिन्होंने इसमें रहने वाली संवासिनों को नशीला पदार्थ देने के बाद उनसे यौन हिंसा में सहयोग किया।
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शीर्ष अदालत ने जांच एजेन्सी से कहा कि वह तीन महीने में जांच पूरी करके अपनी रिपोर्ट उसके समक्ष पेश करे।
टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज की एक रिपोर्ट के बाद मुजफ्फरपुर में एक गैर सरकारी संस्था द्वारा संचालित एक आश्रय गृह में अनेक लड़कियों के कथित यौन शोषण और उनसे बलात्कार करने की घटनायें सामने आयी थीं।
न्यायालय ने इससे पहले सीबीआई को इस आश्रय गृह में 11 लड़कियों की कथित हत्या के मामले की जांच तीन जून तक पूरी करने और स्थिति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था।
जांच एजेन्सी ने न्यायालय से कहा था कि हत्या के पहलू की जांच पूरी करने के लिये उसे दिया गया दो सप्ताह का समय पर्याप्त नहीं है। जांच ब्यूरो ने कहा कि 11 लड़कियों की हत्या की गयी थी और उसके हलफनामे के अनुसार 35 लड़कियों के नाम एक समान थे जो किसी न किसी समय आश्रय गृह में रहीं थी।
जांच ब्यूरो ने अपने हलफनामे में दावा किया था कि मुख्य आरोपी बृजेश ठाकुर और उसके साथियों ने 11 लड़कियों की कथित रूप से हत्या की थी। जांच एजेन्सी ने यह भी कहा था कि मुजफ्फरपुर में एक श्मशान भूमि से उसने ‘हड्डियों की पोटली’ बरामद की है।
मुजफ्फरपुर आश्रय गृह कांड की जांच उच्चतम न्यायालय ने केन्द्रीय जांच ब्यूरो को सौंपी थी । जांच ब्यूरो ने इस मामले में बृजेश ठाकुर सहित 21 व्यक्तियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया है।
शीर्ष अदालत ने इस साल फरवरी में इस मामले को बिहार की अदालत से दिल्ली के साकेत जिला अदालत में यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण कानून के तहत सुनवाई करने वाली अदालत में स्थानांतरित कर दिया था।