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सुप्रीम कोर्ट ने विशेषाधिकार का प्रयोग कर तलाक को दी मंजूरी
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 10 Oct 2017 09:29 PM IST
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supreme court
सुप्रीम कोर्ट ने अपने विशेषाधिकार का प्रयोग करते हुए 17 साल से अलग रह रहे पश्चिम बंगाल के दो जिला जजों के तलाक को मंजूरी दे दी। जस्टिस कए बोबडे और एल. नागेश्वरा राव की पीठ ने यह देखते हुए कि पत्नी अपने पति के साथ रहने की इच्छुक नहीं है और उसने कभी भी अदालत की कार्यवाही में हिस्सा नहीं लिया, तलाक की याचिका मंजूर कर ली।
अदालत ने कहा कि तलाक की प्रक्रिया में शामिल होने से इनकार करना और लगभग मृतप्राय शादी में जबरदस्ती याची (पति) को बांधे रखना मानसिक क्रूरता है।
इस संबंध में शीर्ष न्यायालय ने संविधान के अनुच्छेद 142 में दिए गए अधिकार का प्रयोग कर तलाक को मंजूरी दी। इससे पहले कलकत्ता हाईकोर्ट ने साल 2012 में तलाक की याचिका को खारिज कर दिया था।
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अदालत ने कहा कि तलाक की प्रक्रिया में शामिल होने से इनकार करना और लगभग मृतप्राय शादी में जबरदस्ती याची (पति) को बांधे रखना मानसिक क्रूरता है।
इस संबंध में शीर्ष न्यायालय ने संविधान के अनुच्छेद 142 में दिए गए अधिकार का प्रयोग कर तलाक को मंजूरी दी। इससे पहले कलकत्ता हाईकोर्ट ने साल 2012 में तलाक की याचिका को खारिज कर दिया था।
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