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क्या केंद्र सरकार न्याय-व्यवस्था पर ताले जड़ना चाहती है: सुप्रीम कोर्ट

Sat, 29 Oct 2016 03:42 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 29 Oct 2016 03:42 AM IST
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supreme court anguish over the delay in appointment of judges

हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति में हो रही देरी पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि क्या केंद्र सरकार न्याय-व्यवस्था पर ताले जड़ना चाहती है। क्या सरकार पूरी न्यायिक व्यवस्था को तबाह करना चाहती है। शीर्ष अदालत ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए  कहा कि वह इसे अहम का मसला न बनाए। साथ ही अदालत ने यह चेतावनी भी दी है कि अगर जल्द सब ठीक नहीं हुआ तो प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) और कानून मंत्रालय केसचिवों को अदालत में तलब किया जा सकता है। 

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चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति में हो रही देरी पर केंद्र सरकार को जमकर फटकार लगाते हुए कहा कि प्रशासनिक उदासीनता के कारण इस संस्थान(न्यायपालिका) को खराब कर रही है। पीठ ने कहा कि वह कार्यपालिका को सिस्टम को तबाह करने की इजाजत नहीं दे सकती। पीठ ने कहा कि सरकार को न तो संस्थान के क्रियाकलाप को बर्बाद कर सकती है और न ही उसे पूरे सिस्टम को गतिहीन करने की इजाजत दी सकती। 
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पीठ ने केंद्र सरकार की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी से कहा कि न्यायपालिका किसी अन्य संस्थान केसाथ टकराव नहीं चाहती है लेकिन यह सरकार को यह सुनिश्चित करना है कि इस तरह की स्थिति उत्पन्न न हो। पीठ ने कहा जजों की नियुक्ति को लेकर अब तक सब ठीक चल रहा था। हम चाहते हैं कि सरकार के साथ ऐसा ही सहयोग जारी रहे लेकिन कार्यपालिका की उदासीनता, अक्षमता से संस्थान को तबाह करने की इजाजत कतई नहीं दी जा सकती। 

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नियुक्ति में अभी और दो हफ्ते का वक्त लगेगा

supreme court anguish over the delay in appointment of judges

सुनवाई केदौरान अटॉर्नी जनरल ने बताया कि तीन अक्टूबर से 18 नामों को क्लीयर कर दिया गया है लेकिन उनकी नियुक्ति में अभी और दो हफ्ते का वक्त लगेगा। इलाहाबाद हाईकोर्ट के लिए आठ नाम भेजे थे लेकिन सिर्फ दो ही नामों को हरी झंडी मिली। इस पर पीठ ने कड़ा एतराज जताते हुए कहा कि जब कोलेजियम ने फरवरी में आठ नामों की सिफारिश भेजी तो इसमें देरी क्यों हुई। पीठ ने सवाल किया कि बाकी छह नामों का क्या हुआ। न तो आपने नियुक्ति की और न ही उन नामों को वापस भेजा, जिन्हें लेकर आपको आपत्ति थी। 

आखिर कोई अधिकारी इस काम को संभालते हैं। पीठ ने चेतावनी देते हुए कहा कि पीएमओ और विधि विभाग के सचिव को तलब कर देरी का कारण पूछ सकती है। इस पर अटॉनी जनरल ने कहा कि चूंकि जजों की नियुक्ति को लेकर मेमोरेंडम ऑफ प्रोसिजर (एमओपी) को अंतिम रूप नहीं दिया गया है इसलिए नियुक्तियों में देरी हो रही है। एनजेएसी के फैसले को आए एक वर्ष हो गए लेकिन अब तक नया एमओपी तैयार नहीं हो सका है। जवाब में पीठ ने स्पष्ट किया कि जब तक नया एमओपी नहीं आ जाता, तब तक पुराने सिस्टम के तहत नियुक्तियां हो। 

पीठ ने कहा कि आप संस्थान केक्रियाकलाप को गतिहीन नहीं बना सकते। क्या आप सिस्टम में क्रांतिकारी बदलाव का इंतजार कर रहे हैं। यह किसी केअहम का मामला नहीं है। हम नहीं चाहते कि इस मसले पर हम कोई न्यायिक आदेश पारित करें। हम नहीं चाहते कि ऐसी स्थिति आए कि संस्थानों के बीच टकराव की स्थिति उत्पन्न हो।

सुनवाई केदौरान पीठ ने यह भी कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट में 160 होने चाहिए लेकिन वहां फिलहाल महज 77 जज ही हैं। जजों की कमी केकारण कर्नाटक हाईकोर्ट में आधे से अधिक कोर्ट रूम बंद हैं। एक ऐसा भी वक्त था आपके पास जजों के लिए कमरे नहीं थे और आज स्थिति यह है कि अधिकतर कोर्ट रूम में ताले जड़े हैं। मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट में जजों की कमी और उनकी नियुक्ति में देरी को लेकर दाखिल कई जनहित याचिकाओं पर सुनवाई कर है। 


 
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