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मनरेगा को कृषि से जोड़ने व एमएसपी पर सब्सिडी देने का सुझाव, समिति ने राष्ट्रपति को सौंपी रिपोर्ट

Fri, 26 Oct 2018 11:44 PM IST
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 26 Oct 2018 11:44 PM IST
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Suggestions for connecting MNREGA with agriculture and subsidy on MSP, President got the report

किसानों की आय को 2022 तक दोगुना करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी द्वारा गठित राज्यपालों की समिति ने अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति को सौंप दी हैं। समिति ने अपनी रिपोर्ट में मनरेगा को कृषि से जोड़ने और एमएसपी पर सब्सिडी देने का भी सुझाव दिया है। साथ ही रिपोर्ट में महिलाओं को खेती की ट्रेनिंग देने जैसे सिफारिशें भी की गई हैं।   

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बाजारू फसलों को एमएसपी में लाया जाए

उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने शुक्रवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि पांच राज्यपालों की समिति ने राष्ट्रपति को सौंपी अपनी रिपोर्ट में किसानों की आय बढ़ाने के लिए न्यनूतम समर्थन मूल्य में कुछ बदलावों की सिफारिश की है। 

उन्होंने बताया कि वर्तमान फसल मूल्य निर्धारण की प्रक्रिया से फसल चक्र प्रभावित हो रहा है। अगर किसी फसल की कीमतें तय मूल्यों से नीचे जाती हैं, तो किसानों को सब्सिडी उपलब्ध कराई जाए। इसके अलावा बाजार की मांग के मुताबिक ग्वार, अरंडी, मसाले (अदरक, लहसुन, हल्दी), सुगंधित फूलों और औषधीय पौधों को एमएसपी में लाने का सुझाव दिया गया है।

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मनरेगा को कृषि से जोड़ा जाए

समिति के अध्यक्ष राम नाईक के मुताबिक कुछ राज्यों में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का प्रीमियम 5 फीसदी से घटा कर 2.5 फीसदी करने और मनरेगा को कृषि क्षेत्र की गतिविधियों से जोड़ने का भी सुझाव दिया है, ताकि फसलों की कटाई रोपाई में मजदूरों की उपलब्धता बनी रहे। 

उन्होंने बताया कि केन्द्र से प्रायोजित स्कीमों राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, बागवानी विकास में फिलहाल 60:40 का अनुपात है, जिसे हटा कर 90:10 का पुराना अनुपात अपनाने की सलाह दी है, जिससे यूपी, केरल पं. बंगाल, त्रिपुरा के छोटी जोट वाले किसानों को फायदा पहुंचेगा।

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कांट्रैक्ट फार्मिंग का सुझाव

महामहिम ने बताया कि वर्तमान बाजार व्यवस्था के मद्देनजर छोटी जोतों को लाभकारी बनाने के लिए समिति ने कांट्रैक्ट फार्मिंग जैसे फॉर्मूलों का भी सुझाव दिया है। रिपोर्ट में बाजार के मुताबिक संकर प्रजातियों की फसलों के लिए ‘विशेष कृषि जोन’ बनाने की सिफारिश की है। साथ ही, क्षेत्रीय संसाधनों की उपलब्धता और जलवायु को ध्यान में रखते हुए पर्वतीय इलाकों में महंगी फसलें उगाने का सुझाव दिया है।

महिलाओं को खेती की ट्रेनिंग
राज्यपाल का कहना है कि फिलहाल कृषि में इस्तेमाल होने वाली कई तकनीकें पुरुष प्रधान हैं, लेकिन छोटी जोतों के अलाभकारी होने से पुरुष शहरों की तरफ पलायन कर रहे हैं। रिपोर्ट में महिलाओं के लिए ऐसी तकनीकों का विकास करने का सुझाव दिया है, ताकि वे कृषि क्षेत्र में योगदान दे सकें। 

इसके लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने और जिला स्तर पर सभी विभागों के साथ समन्वय करके कृषि शिकायत निवारण सेल बनाने की भी सिफारिश की है। समिति ने अपनी रिपोर्ट में सौर एवं पवन ऊर्जा को ग्रिड सप्लाई से जोड़ने और कुपोषण की समस्या से निबटने के लिए आंगनवाड़ियों को कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी फंड (सीएसआर) के जरिए ट्रेनिंग देने जैसी अहम सिफारिशें भी की हैं।

गौरतलब है कि जून माह में राष्ट्रपति भवन में आयोजित राज्यपालों के सम्मेलन से पहले एक औपचारिक बैठक में ‘अप्रोच टू एग्रीकल्चर- ए होलिस्टिक ओवरव्यू’ विषय पर सुझाव देने के लिए एक समिति का गठन किया था। इसमें हरियाणा, कर्नाटक, हिमाचर प्रदेश और मध्य प्रदेश के राज्यपालों को सदस्य नामित किया गया था, जिसका अध्यक्ष यूपी के राज्यपाल राम नाईक को बनाया गया था। राज्यपालों के सम्मेलन में साल 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने जैसे कई विषयों पर चर्चा की गई थी।

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